भोजपुर:घटना के एक सप्ताह बाद भी महादलितों पर हमला करने वाले नहीं हुए गिरफ्तार

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बिहार में नीतीश सरकार दलितों के प्रति कितनी संवेदनशील है, यह इस बात से पता चलता है कि भोजपुर जिला अंतर्गत जगदीशपुर थाना क्षेत्र के दुल्हिनगंज के नेटुआ टोली में महादलितों के साथ की मारपीट की घटना के एक सप्ताह बीतने के बाद भी अभी तक 15 आरोपियों में से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 11 जुलाई की रात 9 बजे भोजपुर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के दुल्हिनगंज के नेटुआ टोली में क्षेत्र के मुखिया और उनके लोगों द्वारा वहां बसे महादलित नट जाति के लोगों के साथ मारपीट की गई, यहां तक कि महिलाओं तक को भी नहीं बख्शा गया।
बता दें कि अपने समय के जनवाद के एक मजबूत स्तंभ और शोषित पीड़ित दलित समाज की लड़ाई लड़ने वाले व कम्युनिस्टों के बीच मार्क्स की उपाधि से विभूषित जगदीश मास्टर के दामाद भगवान सिंह कुशवाहा जो नीतीश कुमार सरकार के मंत्री रह चुके हैं, के भतीजे और दुल्हिनगंज के मुखिया नीरज सिंह कुशवाहा और उनके चचेरे भाई दीपू कुशवाहा ने नेटुआ टोली के एक परिवार के लोगों की इतनी पिटाई कर दी कि उन्हें आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना के बारे में बताया जाता है कि भगवान सिंह कुशवाहा के भतीजे और दुल्हिननगंज के मुखिया नीरज सिंह और उनका चचेरा भाई दीपू कुशवाहा अपने चार पहिया वाहन से आ रहे थे।

नेटुआ टोली के पास सड़क के किनारे धनोज कुमार और मुन्ना नट कुर्सी लगाकर बैठे थे। यह भला मुखिया जी को कैसे बर्दाश्त होता कि कोई नेटुआ उनके सामने कुर्सी पर बैठे। उन्होंने अपनी कार से उनकी कुर्सी पर धक्का दे मारा। इस अप्रत्याशित घटना पर दोनों युवक हक्का बक्का रह गए और उन्होंने नीरज को अंधा बोल दिया और पूछ डाला कि दिखता नहीं है क्या? अंधे हैं क्या? इस पर नीरज ने गाड़ी को बैक किया और पुन: उन पर अपनी कार से धक्का मारने की कोशिश की। इसे देख नेटुआ समुदाय के लोग भड़क गए और जैसा कि ऐसी स्थिति में जिस तरह की प्रतिक्रिया होती है वही हुआ। दोनों ओर से तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। नीरज और दीपू वहां से भाग खड़े हुए। लेकिन थोड़ी देर बाद लगभग 50 लोगों के साथ वे लोग आकर नट समुदाय के लोगों पर हमला बोल दिए। इस हमले में धनोज की मां राजकुमारी देवी 50 वर्ष, धनोज की पत्नी, उनकी बहन एवं उनके पिता कमलेश नट को बुरी तरह पीट कर घायल कर दिया गया। राजकुमारी देवी व उनकी पतोहू के सिर को लोहे के राड से मारा गया जिससे उनका सिर फट गया। वहीं हमलावर राजकुमारी देवी की बेटी को घसीट कर बाहर ले जाने की कोशिश करने लगे तो नट लोगों के प्रतिकार के सामने सफल नहीं सके। इस घटना की जानकारी किसी ने जगदीशपुर थाने को दी, तब जाकर पुलिस आई और मामला संभाला।

इस बीच अचानक हुए हमले से घबड़ा कर टोले के लगभग सभी पुरूष कहीं भाग गए। पुलिस ने सभी घायलों को आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के बाद सभी आक्रमणकारी फरार हो गए। बता दें कि इस टोले में नट लोगों के लगभग दस परिवार हैं। ये लोग लगभग 50 वर्षों से यहां बसे हुए हैं। घटना के दूसरे दिन घायल राजकुमारी देवी 50 वर्ष के बयान पर जगदीशपुर थाने में केस संख्या — 244/21, दिनांक — 12.7.21 के तहत आईपीसी की धारा — 147,148,149,323,307,354,279,337,504,506 दर्ज किया गया है। लेकिन घटना के इतने दिनों बाद भी आरोपियों की गिफ्तारी नहीं हो सकी है। जो इस बात का गवाह है कि भगवान सिंह की पकड़ सत्ता और प्रशासन पर कितनी मजबूत है।

दूसरे दिन जब घटना की जानकारी अगिआंव के विधायक मनोज मंजिल को हुई तो वे घायलों को देखने सदर अस्पताल पहुंचे। जहां भगवान सिंह के लोगों ने विधायक मनोज मंजिल को जाति सूचक शब्दों से नवाजते हुए उन्हें काफी भला-बुरा कहा और कहा कि आप यहाँ राजनीत करने आए हैं। यहां राजनीति मत करिए। यहां आपका नहीं चलेगा, नेटुआ लोगों को हम लोगों ने बसाया है, हम जैसा चाहेंगे, वैसा उनके साथ बर्ताव करेंगे। काफी बकझक के बाद जब पुलिस ने हस्तक्षेप किया तब वे लोग वहां से भागे। इस बाबत मनोज मंजिल ने आरा के हरिजन थाने में एक एफआईआर दर्ज कराए हैं।


वहीं दूसरी तरफ आरोपियों द्वारा भी काउंटर केस किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ये दलित लोग हरिजन एक्ट में फंसा देने की धमकी देकर हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहते हैं। मुखिया नीरज सिंह कुशवाहा कहते हैं कि केवल गाड़ी का हार्न बजाने पर महादलित बस्ती के लोगों को इतनी दिक्कत हुई कि उन्होंने गाड़ी पर एवं उसमें बैठे लोगों पर अंधाधुंध ईट पत्थर एवं लाठी डंडे से हमला किया। विरोध करने पर सबको हरिजन एक्ट में एवं छेडख़ानी में फंसाने की धमकी दी गई। नीरज सिंह का आरोप है कि महादलित टोले में खुलेआम शराब की बिक्री एवं जुए का अड्डा चलता है यहां तक की आम लोगों की बहु बेटियों को उस रास्ते से जाने पर वे लोग अभद्र टिप्पणी करते हैं, विरोध करने पर हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी देते हैं।

विधायक मनोज मंजिल द्वारा कराया गए एफआईआर पर मुखिया नीरज कुशवाहा का कहना है कि उनके परिजनों को झूठे केस में अगीआंव के विधायक मनोज मंजिल के द्वारा फंसाना राजनीतिक गुंडई है। विधायक के द्वारा मेरे ऊपर लगाया गया आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। विधायक ने जितने भी लोगों का नाम दिया है, वो पूरी तरह झूठा है। घटना के इतने दिनों बाद भी 15 आरोपियों में से किसी की भी गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है जो इस बात का सबूत है कि नीतीश सरकार दलितों के प्रति कितनी संवेदनशील है।

माले के भोजपुर जिला सचिव जवाहर लाल सिंह बताते हैं कि भगवान सिंह का पूरा परिवार माफिया प्रवृत्ति का रहा है। मुखिया नीरज सिंह का अवैध शराब का एक बड़ा रैकेट चलता है जो सत्ता और प्रशासन के वरदहस्त से निर्वाध रूप से चल रहा है। वे बताते हैं जब भगवान सिंह मंत्री थे उस समय भी एक टैंकर स्प्रीट पकड़ा गया था जो नीरज का था। जिससे वह नकली शराब बनाने का काम करता है। मनोज मंजिल कहते हैं कि इनका पूरा परिवार शराब और ड्रग का धंधा करता है, जिसे सत्ता का आशीर्वाद प्राप्त है। बता दें कि मामले की जांच के लिए विधानसभा की एक कमेटी बनाई गई है, जिसके चेयरमैन हैं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और सदस्य हैं मनोज मंजिल, रेखा देवी, सतीश कुमार, ज्योति देवी और निक्की हेम्ब्रम।

घटना के बाद क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्त्ताओं की टीम दुल्हिनगंज गांव में जायजा लेने पहुंची जिसके प्रतिनिधिमंडल में जगदेव सेना के जिला अध्यक्ष लाल बहादुर महतो, वरिष्ठ नेता विनय मिश्र, युवा नेता अनूप पटेल, पूर्व प्रमुख परशुराम चन्द्रवंशी, संजय पासी, पिंटू चंद्रवंशी, डॉ. नरायण सिंह, रहीमुद्दीन वारसी शामिल थे। घटना स्थल पर महादलित परिवार के अमन नट ने बताया कि यह घटना पहली बार की नहीं है। नीरज मुखिया हमेशा से ही पुलिस को साथ लेकर घर में छपेमारी कराते रहते हैं। वहीं सुशीला देवी पति छोटन नट ने बताया की घटना के दिन हमारी भाभी की मौत हो गई थी, हमारा पूरा परिवार परेशान था। पर सुना है कि धनोज नट और मुन्ना नट रोड पर किनारे कुर्सी लगा कर बैठ थे। दोनों पक्षों में कहा सुनी होते होते मामला मारपीट तक पहुंच गया। वहीं उपेन्द्र यादव एवं कामता यादव ने बताया कि घटना के समय दीपू कार लेकर जा रहा था और धनोज नट एवं मुन्ना नट कुर्सी लगा कर बैठे थे उन्हें हार्न बजा कर हटाने का प्रयास ही मारपीट का कारण है।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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