Saturday, October 16, 2021

Add News

बनारस के बुनकरों ने स्मृति ईरानी को लिखा पत्र, कहा- हाथों से छिना काम, गुजर-बसर के लिए दिया जाए राहत पैकेज

Janchowkhttps://janchowk.com/
Janchowk Official Journalists in Delhi

ज़रूर पढ़े

ऐपवा के आह्वान पर सोमवार को बनारस की बुनकर महिलाओं ने परिवार के साथ घर और मोहल्ले से अपनी वाजिब मांगो के साथ आवाज बुलंद की। ऐपवा ने केंद्रीय बाल विकास मंत्री और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को उनकी जिम्मेदारियों को याद दिलाते हुए बुनकर महिलाओं, बच्चों और उनके परिवार के लिए राहत पैकेज की मांग करते हुए पत्र लिखा।

ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में बुनकर परिवारों को पहले भी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही थी, लेकिन महामारी में तालाबंदी के कारण लूमें बंद पड़ी हैं और गरीब बुनकर भुखमरी और बेरोजगारी के कारण दूसरे रोजगार की तरफ पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साड़ी व्यवसाय में महिला श्रम का मूल्य तो पहले से ही अदृश्य था, लेकिन महामारी के दौरान हुई बंदी ने महिलाओं और बच्चों की कमर तोड़ दी है।

उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्री अपनी जिमीदारियों से नहीं भाग सकतीं, जबकि वह कपड़ा मंत्रालय भी देखती हैं। कुसुम वर्मा ने कहा कि ऐपवा स्मृति ईरानी से गरीबी में गुजर-बसर कर रहे बुनकर परिवारों के लिए महामारी में राहत पैकेज की मांग करती है, जिससे वह सम्मानजनक जिंदगी जी सकें।

ऐपवा वाराणसी की जिलाध्यक्ष डॉ. नूर फ़ातिमा ने कहा कि बनारसी साड़ी को देश-विदेश में मशहूर करने वाले बुनकरों की बुरी हालत यह दर्शाती है कि हमारी सरकारों का रवैया अपनी मेहनतकश रियाया के लिए बेहद गैरजिम्मेदाराना है। ऐपवा जिला सचिव स्मिता बागड़े ने कहा कि के केंद्र और राज्य सरकारों की अनदेखी की वजह से आज बनारस के बुनकर इलाकों के बच्चे शिक्षा से वंचित होकर बाल मजदूरी के लिए विवश किए जा हैं, यह अमानवीय तो है ही साथ ही बाल श्रम कानूनों का हनन भी है।

गांधीवादी चिंतक और सोशल एक्टिविस्ट डॉ. मुनीज़ा रफीक खान ने कहा कि बुनकरी उद्योग सिर्फ साड़ी बुनने का रोजगार नहीं है, बल्कि इस देश की गंगा-जमुनी तहजीब की एक मिसाल भी है, जिसे हम कभी समाप्त नहीं होने देंगे। बनरास की बुनकर महिलाओं की नेता कैसर जहां का कहना है कि जब तक गरीब बुनकर महिलाओं और बच्चों को उनका हक नहीं मिल जाता हमारा संघर्ष जारी रहेगा, जरूरत पड़ने पर बुनकर महिलाएं सड़क पर निकलकर भी अपनी आवाज बुलंद करेंगी।

आज का प्रदर्शन सरैंया, हिरामनपुर, भगवतीपुर,पथरागांव (मुगलसराय) में आयोजित हुआ। ऐपवा की जिला इकाई ने बुनकर महिलाओं का समर्थन किया। इसमें विभा वाही, सुतपा गुप्ता, विभा प्रभाकर, आशु मीणा, सरोज सिंह, आदि महिलाएं शामिल रहीं।

बुनकरों ने सरकार से यह मांगें की हैं,
1. बुनकर परिवारों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करे मोदी सरकार।
2. साड़ी व्यवसाय को पुनः चालू किया जाए जिसकी खरीद और बिक्री की जिम्मेदारी सरकार की हो।
3. सभी गरीब बुनकरों परिवारों के कर्जे माफ किए जाएं।
4. गरीबी, भुखमरी और रोजगार से वंचित बुनकर महिलाओं को लॉकडाउन भत्ता सुनिश्चित किया जाए।
5. सभी बुनकरों के बिजली बिल को माफ कर इसे कार्ड आधारित ही किया जाए।
6. आर्थिक तंगी से जूझ रहे गरीब बुनकर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है, और बाल मजदूरी के लिए विवश होना पड़ रहा है। मांग करते हैं कि महामारी में सरकार उनके बच्चों के शिक्षा की गारंटी सुनिश्चित कर सम्मानजनक जिंदगी प्रदान करे।
7. बुनकर परिवारों में किसी को भी कोरोना पॉजिटिव होने पर उसका मुफ्त इलाज कराया जाए।

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

टेनी की बर्खास्तगी: छत्तीसगढ़ में ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्रियों का पुतला फूंका, यूपी में जगह-जगह नजरबंदी

कांकेर/वाराणसी। दशहरा के अवसर पर जहां पूरे देश में रावण का पुतला दहन कर विजय दशमी पर्व मनाया गया।...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.