Monday, October 25, 2021

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गोरखपुर: आधी रात चेकिंग करने आयी योगी की ‘ठोक दो’ पुलिस ने युवा कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या की

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कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता (38 वर्ष) की गोरखपुर के एक होटल में पुलिसकर्मियों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना मंगलवार की है। दरअसल पुलिस के जवान आधी रात होटल में चेकिंग के बहाने उनके कमरे में घुस गए और आईडी दिखाने को कहा। इस पर मनीष ने पुलिस से पूछा था – “इतनी रात में यह चेकिंग का क्या तरीका है? क्या हम लोग आतंकवादी हैं?”

कारोबारी मनीष के सवाल पूछने से चेकिंग करने आये इंस्पेक्टर रामगढ़ ताल जेएन सिंह और फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्र ने इस सवाल के बाद मनीष का इगो इस कदर आहत हुआ कि उन्होंने पहले मनीष के दोनों दोस्तों को पीटकर होटल के कमरे से बाहर भगा दिया और फिर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके कारोबारी मनीष की पीट पीटकर हत्या कर दिया। मनीष की हत्या के बाद में पुलिस वाले उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हत्या को दुर्घटना में बदलने की साजिश

मनीष की हत्या के बाद गोरखपुर के एसएसपी विपिन टाडा ने बयान दिया कि होटल की चेकिंग के दौरान घबरा कर नीचे गिरने से मनीष की मौत हुई । लेकिन घटना के चश्मदीद मरहूम मनीष के दोस्तों के बयान और मीडिया में मनीष की पत्नी द्वारा पुलिस पिटाई से मनीष की मौत होने का आरोप लगाने और धरने पर बैठने के बाद गोरखपुर पुलिस बैकफुट पर चली गयी।

गोरखपुर के डीएम और एसएसपी ने बीआरडी मेडिकल कालेज पहुंच कर मनीष के परिजनों को आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आश्वासन दिया। आरोपी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ होने के बाद ही मरहूम मनीष गुप्ता के परिजन वहां से हटे।

विधानसभा चुनाव से पहले मामला कहीं सरकर के ख़िलाफ़ माहौल न खराब कर दे, इन्हीं सब नफ़ा नुकसान के आकलन के बाद मंगलवार की दोपहर इंस्पेक्टर जे एन सिंह और चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्र सहित छह पुलिस कर्मियों को सस्पेंड करके उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ की गई।

गोरखपुर के सिकरीगंज के महादेवा बाज़ार में रहने वाले व्यापारी चंदन सैनी के बुलावे पर उनके तीन दोस्त गुड़गांव से प्रदीप चौहान और हरदीप सिंह चौहान और कानपुर से मनीष गुप्ता सोमवार को गोरखपुर घूमने आये थे।
गोरखपुर न्यूजलाइन्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ गोरखपुर के व्यापारी चंदन सैनी ने अपने तीनों दोस्तों को रामगढ़ ताल इलाके के एलआईसी बिल्डिंग के समीप स्थित होटल कृष्णा पैलेस के रूम नंबर 512 में ठहराया था। सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात करीब 12:30 बजे रामगढ़ ताल पुलिस होटल में चेकिंग करने पहुंची। इंस्पेक्टर जेएन सिंह, फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा के अलावा अन्य पुलिसकर्मी भी साथ में थे। होटल के कमरे का दरवाजा खुलवाया गया। पुलिस के साथ होटल का रिसेप्शनिस्ट भी था। पुलिस वालों ने बोला कि चेकिंग हो रही है। सभी अपना आईडी प्रूफ दिखाओ।

पहले हरदीप ने खुद का और अपने साथी प्रदीप चौहान की आईडी दिखाया। तब तक मनीष सो रहा था। प्रदीप ने उन्हें आईडी दिखाने के लिए जगाया। इस दौरान मनीष ने पुलिस वालों से कहा, “इतनी रात में यह चेकिंग किस बात की हो रही है। हम लोग क्या आतंकवादी हैं? सोते हुए इंसान को आप लोग डिस्टर्ब कर रहे हैं। ”

इंस्पेक्टर।

मरहूम मनीष की हत्या के चश्मदीद दोस्तों के मुताबिक हत्यारे पुलिस वाले मनीष के इस सवाल से बौखला गये थे। मनीष के दोस्तों का कहना है कि उनमें से कई पुलिस वालों ने शराब पी रखी थी। इंस्पेक्टर जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा ने प्रदीप और हरदीप को पीटते हुए कमरे से बाहर कर दिया और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
चश्मदीद प्रदीप और हरदीप के मुताबिक़ कुछ देर बाद उन्होंने देखा कि पुलिस वाले मनीष गुप्ता को घसीटते हुए कमरे बाहर ला रहे हैं। मनीष खून से लथपथ था। पुलिस वाले मनीष को पहले एक निजी अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताया। इसके बाद मनीष को बीआरडी मेडिकल कालेज भेज दिया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किया।
मरहूम मनीष गुप्ता अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। पांच वर्ष पहले ही उनकी शादी हुई थी। परिवार में उनके बीमार पिता और पत्नी के अलावा उनका एक चार साल का एक बेटा है। जबकि मां की कुछ दिनों पहले मृत्यु हो गई थी।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

उनकी पुलिसिया हत्या पर कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल, समाजवादी पार्टी द्वारा निंदा की गयी है।

यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “गोरखपुर में एक कारोबारी को पुलिस ने इतना पीटा कि उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से पूरे प्रदेश के आमजनों में भय व्याप्त है। इस सरकार में जंगलराज का ये आलम है कि पुलिस अपराधियों पर नर्म रहती है और आमजनों से बर्बर व्यवहार करती है।”

वहीं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पीड़ित पत्नी मीनाक्षी गुप्ता के बयान का वीडियो शेयर करते हुये लिखा है – “गोरखपुर में पुलिस की बर्बरता ने एक युवा व्यापारी की जान ले ली। ये बहुत ही दुखद और निंदनीय है। उप्र की भाजपा सरकार ने एनकाउंटर की जिस हिंसक संस्कृति को जन्म दिया है, ये उसी का दुष्परिणाम है। संलिप्त लोगों पर हत्या का मुक़दमा चले और उप्र को हिंसा में धकेलने वाले इस्तीफ़ा दें।

वहीं राष्ट्रीय लोक दल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा है – “अपने परिवार का इकलौता सहारा मनीष गुप्ता को पुलिस ने होटल के कमरे में बंद कर पीट-पीट कर मार डाला। क़सूर बस इतना था कि, आधी रात को पुलिस से सवाल पूछ लिया। CM योगी के ‘ठोक दो’ आदेश का यूपी की भोली जनता को परिणाम भुगतना पड़ रहा है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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