Friday, April 19, 2024

रंजन गोगोई कहिन राज्यसभा में कौन सा जादू है, फिर काहे मनोनयन मंजूर किया जज साहिब!

उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ राज्यसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया है। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में जस्टिस गोगोई ने राज्यसभा में अपनी बेहद कम उपस्थिति को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दिया था कि मैं जब पसंद करता हूं, तब राज्यसभा जाता हूं। जब मुझे लगता है कि कोई महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर मुझे अपनी बात रखनी चाहिए, मैं राज्यसभा जाता हूं। इसी सवाल को लेकर उनके खिलाफ प्रस्ताव लाया गया है।

जस्टिस गोगोई ने इंटरव्यू में कहा था कि मैं जब पसंद करता हूं, तब राज्यसभा जाता हूं। जब मुझे लगता है कि कोई महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर मुझे अपनी बात रखनी चाहिए, तब मैं राज्यसभा जाता हूं। यह इंटरव्यू उन्होंने अपने संस्मरणों पर आधारित किताब ‘जस्टिस फॉर जज’ को लेकर दिया था। इसी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में एक नोटिस दिया है, जिसमें पार्टी ने कहा है कि जस्टिस गोगोई का बयान राज्यसभा की अवमानना है और यह उच्च सदन की प्रतिष्ठा का महत्व कम करने वाला है। यह विशेषाधिकारों के हनन का मामला बनता है। इस नोटिस में जस्टिस गोगोई के बयान का अंश भी शामिल किया गया है। 

इस इंटरव्यू में जस्टिस गोगोई ने कहा था कि संसद के शीतकालीन सत्र के पहले तक, आप राज्यसभा आरटीपीसीआर टेस्ट के बाद ही जा सकते थे और मैं अपने आपको वहां जाने को लेकर सहज महसूस नहीं कर रहा था। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को लागू किया गया था, लेकिन उनका सही तरीके से ध्यान नहीं रखा जा रहा था। बैठने की व्यवस्था को लेकर मैंने खुद को सहज नहीं पाया। मैं राज्यसभा जाता हूं, जब मैं पसंद करता हूं और जब मुझे लगता है कि ये महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर मुझे अपनी बात रखनी चाहिए।

जस्टिस गोगोई ने कहा था कि मैं नामित सदस्य हूं, मैं किसी पार्टी व्हिप से बंधा हुआ नहीं हूं। लिहाजा जब भी पार्टी सदस्यों को सदन में उपस्थित होने के लिए निर्देश किया जाता है, तो वह मुझ पर बाध्य नहीं होता है। मैं अपनी इच्छानुसार वहां जाता हूं और आता हूं। मैं सदन का निर्दलीय सांसद हूं। राज्यसभा में कौन सा जादू है? मैं यदि किसी ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष होता तो मुझे अधिक वेतन व दूसरी सुविधाएं मिल रही होतीं। मार्च 2020 में राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने से अब तक रंजन गोगोई की उपस्थिति 10 प्रतिशत से भी कम रही है।  

तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों ने भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश और राज्यसभा सदस्य रंजन गोगोई के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। संसद की कार्यवाही में भाग लेने को लेकर उनकी टिप्पणी के विरुद्ध यह नोटिस दिया गया। तृणमूल कांग्रेस ने विशेषाधिकार उल्लंघन नोटिस में कहा है कि इससे राज्यसभा की गरिमा कम होती है और यह विशेषाधिकार के उल्लंघन का मामला है। यद्यपि राज्यसभा सचिवालय द्वारा तृणमूल कांग्रेस के सदस्य जवाहर सरकार और मौसम नूर के नोटिस को स्वीकार किया जाना बाकी है।

साक्षात्कार में गोगोई ने कहा था कि कोविड प्रतिबंधों और सामाजिक दूरी के अभाव में जब उनका मन होगा और जब उन्हें लगेगा कि यह विषय महत्वपूर्ण है और इस पर बोला जाना चाहिए तब वह राज्यसभा की कार्यवाही में भाग लेना पसंद करेंगे।

अगर राज्यसभा के सभापति विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को योग्य मानते हैं, तो इसे हाउस प्रिविलेज कमेटी को आगे भेजा जा सकता है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर, यदि राज्यसभा में एक विशेषाधिकार प्रस्ताव पारित किया जाता है, तो सदस्य अपनी राज्यसभा सदस्यता खो देते हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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