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मजदूरों के लिए वर्कर्स फ्रंट का संदेश

(यूपी सरकार ने कल ही अध्यादेश जारी कर सूबे में सभी श्रम क़ानूनों पर तीन साल के लिए पाबंदी लगा दी है। इसके साथ ही अब तक मज़दूरों को हासिल सभी अधिकार समाप्त हो गए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मज़दूर अब पूँजीपतियों और अपने मालिकों के रहमोकरम पर हो गए हैं। न तो उनकी कहीं अदालत में सुनवाई होगी न ही सरकार के यहाँ। इस बीच पूरे देश में जगह-जगह फँसे मजदूरों का बुरा हाल है। सहायता करने की बात तो दूर भूख से मर रहे इन मज़दूरों से सरकार ने किराये के नाम पर वसूली शुरू कर दी है। ऐसे में मज़दूरों को एक बार ख़ुद अपने बारे में सोचना होगा। ऐसा कुछ वर्कर्स फ़्रंट कहना चाहता है। उसने इस सिलसिले में मज़दूरों के नाम एक अपील जारी की है पेश है वर्कर्स फ़्रंट की पूरी अपील-संपादक)

मजदूर साथियों,

आप अपनी रोजी-रोटी की तलाश में बाहर कमाने जाते हैं। प्रवासी मजदूरों के लिए अच्छे हालत यहां कभी नहीं रहते। अपने गांवों-कस्बों में परिवार के लिए दो जून की रोटी की व्यवस्था न हो पाने की मजबूरी ही है कि उन्हें कमाने के लिए परदेश जाना पड़ता है। लॉकडाऊन के ठीक पहले होली की छुट्टियों के बाद वापस लौटे ही थे, सरकार ने वापस लौटने का भी मौका नहीं दिया और करोड़ों प्रवासी मजदूर लॉकडाऊन में फंस गए। सरकारें चाहे जितनी बड़ी बातें करें कोई भी सरकार हो आपके लिए दो जून की रोटी का भी प्रबंध नहीं किया। लॉकडाउन में यही हाल है आपको बेसहारा छोड़ दिया गया है। घोषणा की गई कि मजदूरों को लॉकडाउन अवधि का पैसा मिलेगा, खाने-पीने व रहने का मुफ्त इंतजाम किया जायेगा।

इसकी सच्चाई आप जानते हैं। आपके बकाया मजदूरी का भुगतान भी नहीं कराया गया, किसी तरह की आर्थिक मदद तो दूर की बात है। जब आपको घरों को जाने की इजाजत दी गई तो पहले किराया मांगा गया, जैसे-तैसे मजदूरों ने किराये की व्यवस्था की तो अब जाने पर ही रोक लगाई जा रही है। उद्योगपति कह रहे हैं कि अगर सभी मजदूरों को भेज दिया गया तो इंडस्ट्री कैसे चलेगी। तब क्या सरकार आपको बंधुआ मजदूर बनाकर काम करायेगी? आप फैक्टरी में काम करते हैं रहने खाने का उचित इंतजाम हो यह आपका कानूनी अधिकार है। आपसे न तो जबरन काम कराया जा सकता है और न ही घर जाने से रोका जा सकता है। महामारी और लॉकडाउन जैसे हालात में आपको सुरक्षित घरों को पहुंचाया जाये यह आपका मौलिक अधिकार है। सरकार की यह जवाबदेही है इससे वह भाग नहीं सकती है। इसी सरकार द्वारा लॉकडाउन घोषित करने के पहले पूरे तीन महीने तक विदेशों में फंसे लाखों लोगों को मुफ्त में हवाई जहाज से लाया गया और वही सरकार आपको बोझ मान रही है।

दरअसल सरकार कोई भी हो पूंजीपतियों और अमीरों के लिए ही काम करती है इसीलिए आपके साथ भेदभाव किया जा रहा है, बर्बर व्यवहार हो रहा है, फैक्टरियों में मनमाने ढंग से काम कराना आम बात है। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि मजदूरों के हित में आवाज उठाने वाली आमतौर पर कोई पार्टी नहीं है, संगठन नहीं है। इसी का नतीजा है कि मजदूरों पर चौतरफा हमला हो रहा है और मजदूर इसके खिलाफ अपनी आवाज तक नहीं उठा पाता है। अब तो कोरोना महामारी से निपटने के लिए देशहित में जरूरी बता कर मजदूरों के बचे-खुचे अधिकारों को भी खत्म किया जायेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने कल ही घोषणा कर दी कि अगले तीन साल तक श्रम कानून लागू नहीं होंगे। इस तरह मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न की खुली छूट मिल जायेगी। महामारी के बाद शहरों में तो कारोबार चौपट होंगे ही, लेकिन गांव-कस्बों में भी रोजी-रोटी का प्रबंध सरकार करने नहीं जा रही है। ऐसे में आजीविका का संकट और बढ़ेगा।

आपमें सैकड़ों किमी पैदल चलने का साहस है, तकलीफों को उठाकर भी जिंदा रहने का जज्बा है, तकनीकी कौशल है, उद्योगों व कारोबार के आप रीढ़ हैं, आपके बिना इन्हें चलाया नहीं जा सकता है। लेकिन आप अपने अधिकारों के लिए आखिर अपना संगठन क्यों नहीं बना पाते हैं, अपनी राजनति क्यों नहीं खड़ी कर पाते इस पर आपको विचार करना है और जवाब भी खोजना है। अगर थोड़ा बहुत संगठन बना भी लिया तो मजदूरों की अपनी राजनीति क्या होगी इसकी जानकारी भी आपको नहीं है। कुल मिलाकर मजदूरों में इतनी राजनीतिक चेतना जरूर होनी चाहिए जिससे वह अपने हित व अहित को समझ सके। लॉकडाउन के दौर में यह तमाम सवाल उभर कर सामने आ गए हैं।

हम वर्कर्स फ्रंट के लोग महामारी व लॉकडाउन के इन हालातों में मजदूरों की जो मदद कर सकते हैं उसकी हर संभव कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह भी सही है कि मजदूरों के लिए हालात और खराब होंगे। इसलिए यह जरूरी है कि समझा जाये कि इन विकट परिस्थितियों में कैसे संगठन बनाया जाये, मजदूर कैसे इन चुनौतियों व हमलों का सामना करें, मौजूदा हालात में मजदूरों को संगठित करने के लिए क्या-क्या किया जाना चाहिए, मजदूरों के अगुवा लोग इसके लिए क्या भूमिका निभा सकते हैं आदि तमाम सवाल है, मुद्दे हैं इस बारे में जो भी सुझाव हो वाट्सएप नंबर 9450153307 व ईमेल aipfr.org@gmail.com पर आप जरूर भेजें और मजदूरों को संगठित करने की मुहिम में अपनी भूमिका अदा करें।

(वर्कर्स फ्रंट के यूपी अध्यक्ष दिनकर कपूर की ओर से जारी।)

This post was last modified on May 7, 2020 12:17 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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