Thursday, October 28, 2021

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जौनपुर भदेठी हिंसा: ‘संघ-बीजेपी और योगी दे रहे हैं घटना को सांप्रदायिक रंग’

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लखनऊ। जौनपुर जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेठी गांव में बच्चों के विवाद में हुई हिंसा को संघ-भाजपा और मुख्यमंत्री योगी साम्प्रदायिक रंग देकर नफरत की राजनीति कर रहे हैं। घटना के वायरल वीडियो को देखने पर मुसलमानों पर हरिजनों की मड़ई में आगजनी के आरोप संदेह के घेरे में आ गए हैं। हाईकोर्ट के जज की निगरानी में भदेठी हिंसा मामले की निष्पक्ष जांच हो। 

उक्त वक्तव्य लोकमोर्चा के संयोजक अजीत सिंह यादव व सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मैग्सेसे अवार्डी संदीप पांडेय ने दिया है। 

अजीत यादव का कहना है कि लोक मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कल जौनपुर के भदेठी गांव में स्थानीय लोगों से बातचीत कर घटना की जांच की थी। आज उक्त जांच रिपोर्ट लोक मोर्चा संयोजक को प्राप्त हुई। जिसके बाद लोकमोर्चा और सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने यह संयुक्त बयान जारी किया है।

नेता द्वय ने कहा कि भदेठी मामले को लेकर पुलिस की यह कहानी संदिग्ध प्रतीत होती है कि 300 से अधिक मुस्लिम पक्ष के लोगों ने हरिजन बस्ती पर हमला कर मड़इयों में आग लगा दी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या हमला करती तो घायलों की संख्या बहुत अधिक होती। 

घटना के वायरल वीडियो में मात्र 8-10 युवक दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक आदमी आग लगाने के कृत्य को स्वीकार करता हुआ सुनाई देता है और कहता है कि उसने आग लगाकर गलती की। जाहिर है आगजनी की घटना मामले को सनसनीखेज बनाने के लिए अंजाम दी गई। संघ-भाजपा और खुद मुख्यमंत्री योगी ने मामले को साम्प्रदायिक रंग देकर ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए इसे एक अवसर के बतौर लिया है। भय और आतंक पैदा करने के लिए बेगुनाहों पर फर्जी मुकदमे लाद कर जेल भेजने के बाद आनन-फानन में उन पर गैंगस्टर एक्ट और एनएसए लगाने का ऐलान मुख्यमंत्री योगी ने किया है।

मौके पर गयी टीम के हवाले से जो बात सामने आयी है उसके मुताबिक 9 जून को भदेठी गांव की हरिजन बस्ती में मुस्लिम पक्ष के कुछ लड़के गए थे। हरिजन पक्ष के बच्चों से मामूली बात को लेकर कहा सुनी हो गई। विवाद बढ़ जाने पर दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए और मारपीट शुरू हो गई। इसमें मुस्लिम पक्ष के जैद, प्लावर, नवीद समेत 6 व हरिजन पक्ष के तीन बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों ने घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। 

उसके बाद यह आरोप कि एक समुदाय के 300 से अधिक लोगों ने हरिजन बस्ती पर हमला करके आधा दर्जन मड़इयों को आग के हवाले कर दिया निराधार है । हमला अगर बड़ा होता तो जाहिर है घायलों की संख्या भी बहुत ज्यादा होती। जैसा कि नहीं है। इसलिए पूरा मामला संदेह के घेरे में आ जाता है। 

पुलिस प्रशासन ने बिना किसी निष्पक्ष जांच के संघ-भाजपा नेताओं के इशारे पर एकतरफा कार्यवाही की और 58 नामजद और 100 अज्ञात पर गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 38 लोगों को जेल भेज दिया। पुलिस आतंक के चलते गांव के मुसलमान घरों को छोड़ कर भाग गए हैं।

पुलिस प्रशासन भाजपा के इतने दबाव में है कि गंभीर तौर पर घायल 6 मुस्लिम युवकों की कोई रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई है । 

उन्होंने कहा कि जेल भेजे गए लोगों में सपा नेता जावेद सिद्दीकी भी शामिल हैं। जिनके बारे में स्थानीय गांव वासियों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक विद्वेष के कारण जौनपुर सदर विधायक और राज्य मंत्री गिरीश यादव के इशारे पर फंसाया गया है। जावेद सिद्दीकी और उनका परिवार शांतिप्रिय सामाजिक परिवार के बतौर जाना जाता है । इस घटना से उनका दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं था ।

लोगों ने बताया कि जावेद सिद्दीकी का परिवार क्षेत्र में सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहता है। आज़मगढ़ और जौनपुर जिलों के बॉर्डर पर पड़ने वाली नदी पर उनके द्वारा लाखों रुपया निजी खर्च कर पुल बनवाया गया है जिससे इलाके के लाखों लोगों को सहूलियत हुई है।

एक अस्पताल में भर्ती घायल मुस्लिम युवक।

नेता द्वय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी और भाजपा ने केवल साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए भदेठी हिंसा मामले पर इतनी तेजी दिखाई है जबकि प्रदेश में हिंसा और अपराध की अन्य घटनाओं पर कोई संज्ञान तक नहीं लिया। प्रतापगढ़ जनपद के गोविंदपुर गांव में सवर्ण सामंती ताकतों द्वारा सत्ता के संरक्षण में पटेल बिरादरी के किसानों मजदूरों के परिवारों पर बर्बर हमला किया गया, घरों में आगजनी की गई , महिलाओं से बदसलूकी की गई लेकिन 8 दिन तक पीड़ितों की एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई और मुख्यमंत्री योगी ने कोई संज्ञान भी नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि सभी न्याय पसंद नागरिकों को संघ-भाजपा और मुख्यमंत्री योगी की साम्प्रदायिक नफरत की राजनीति को शिकस्त देने के लिए सच का साथ देना चाहिए। 

उन्होंने मांग की है कि भदेठी हिंसा मामले की हाईकोर्ट के जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो , बेगुनाहों पर लगे मुकदमे हटाये जाएं। उन्हें जेल से रिहा किया जाए। बेगुनाहों पर एनएसए और गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमे लगाने की प्रक्रिया को रोका जाए। गंभीर रूप से घायल मुस्लिम युवकों की एफआईआर दर्ज कराई जाए।

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