गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिला अंतर्गत भंडरिया प्रखंड के 45 परिवार गुलाबी कार्ड (PH कार्ड) धारी पिछले एक साल से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मिलने वाला राशन नहीं मिलने के कारण भूख की परेशानी से बेहाल हैं।
बिजका पंचायत के बिजका गांव में दलित-आदिवासी समुदाय के 45 परिवार के कुल 248 सदस्य हैं जो पिछले एक साल से राशन से वंचित हैं। 1 जनवरी 2024 से अभी दिसंबर 2024 तक इन्हें राशन नहीं मिला है।

बता दें कि गुलाबी कार्ड के तहत इन परिवारों को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम राशन देने का प्रावधान है। ऐसे में देखा जाए तो इन 45 परिवारों के 248 सदस्यों का पिछले 12 महीनों में कुल 14,880 किलोग्राम राशन सरकारी लापरवाही या व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गया गया है। जबकि ये लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत मिलने वाले राशन पर ही निर्भर हैं।

राशन के अभाव में सबसे खराब हालत 11 वर्षीय अनाथ बच्ची जमदीरिया कुमारी की है। भुखमरी का सामना कर रही जमदीरिया कुमारी के माता-पिता की मृत्यु के बाद वह अकेली रह गई है।
जमदीरिया कुमारी बिजका गांव के अभियान विद्यालय में पढ़ाई करती है, लेकिन पिछले 12 महीनों से उसे भी राशन नहीं मिला है। उसका राशन कार्ड नंबर 202000202973 है।

जमदीरिया की बड़ी बहन, सीमा कुमारी (उम्र 16 वर्ष), भुखमरी और घर के बोझ से टूटकर घर छोड़कर कहीं चली गई है, अबतक उसकी कोई खबर नहीं है। बहन के कहीं चले जाने के बाद जमदीरिया कुमारी की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है।
वह दूसरों के घरों से भोजन मांगकर किसी तरह जीवित है। क्योंकि रोज व रोज लोग उसे खाना नहीं दे पाते हैं। वह अपनी व्यथा भी ठीक से व्यक्त नहीं कर पाती है।
बताना जरूरी हो जाता है कि इस संकट से न केवल जमदीरिया, बल्कि अन्य 45 परिवार भी बुरी तरह प्रभावित हैं, जिनमें विधवा महिलाएं, वृद्धजन और छोटे बच्चे शामिल हैं। बिजका गांव के अन्य प्रभावित परिवार भी भुखमरी का सामना कर रहे हैं।
इस बावत राशन से वंचित बिजका गांव की सरोज देवी जिसका राशन कार्ड नंबर-202000202968 है, कहती है “राशन न मिलने के कारण हमारे परिवार को भूखे रहना पड़ रहा है। खाना जुटाना बेहद कठिन हो गया है।”

फुलमनिया कुंवर, जो एक विधवा हैं, जिनका राशन कार्ड नंबर-202000202942 है, ने बताया कि“जंगल से लासा लाकर बेचती हूं, तब जाकर बच्चों के लिए खाना जुटा पाती हूं।”
पार्वती कुंवर जिनका राशन कार्ड नंबर-202000203041 है, बताती हैं कि-“चार बेटियों को पालने के लिए मजदूरी करती हूं। राशन नहीं मिलने के कारण उधार या मायके से मदद लेनी पड़ती है। वह भी कभी-कभी नहीं मिल पाता है तो भूखा रहना पड़ता है।”
चिंता देवी, राशन कार्ड नंबर-202000202959, जो काफी वृद्ध हो चुकी हैं, स्थिति यह है कि वे अपनी परेशानी भी व्यक्त नहीं कर पाती, किसी जो बताती हैं उसका लब्बोलुआब यह है कि “खाने को लेकर बहुत परेशानी है। वृद्धा होने के बावजूद काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।”

“घुमनी कुंवर, विधवा हैं जिनका राशन कार्ड नंबर 20200020299 है, काफी रूआंसा स्वर में कहती हैं “मैं बच्चों का पालन-पोषण कैसे करती हूं यह बता नहीं सकती। एक साल से सरकार से अनाज का एक दानी भी नहीं मिला है, जैसे तैसे खाने की व्यवस्था करना पड़ता है, बहुत कष्ट हो रहा है।”
लोभनी कुंवर जिनका राशन कार्ड नंबर-202000202995 है, उनकी भी स्थिति अन्य जैसों की तरह ही है, वे कहती हैं – “बच्चों को खाना खिलाने में बेहद कठिनाई हो रही है।”
प्रभावती देवी, राशन कार्ड नंबर-202000202964, बताती हैं कि “राशन नहीं मिलने के कारण गांव के लोग रोजगार के लिए बिहार पलायन कर रहे हैं। खाने की कमी के साथ साथ इससे बच्चों की पढ़ाई छूट रही है।”

पार्वती कुंवर खेतों में मजदूरी करती हैं, कहती है “मेरी चार लड़कियां हैं। दूसरों के खेतों में मजदूरी कर किसी तरह उनका पेट भरती हूं। राशन न मिलने से उधार लेकर या मायके से मदद मांगनी पड़ती है।”
एक साल से इन लोगों को राशन नहीं मिलने के कारण पर समाजसेवी मानिकचंद कोरवा कि यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 3(1) और झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश, 2019 का स्पष्ट उल्लंघन है।

इस गंभीर लापरवाही के लिए स्थानीय प्रखंड के अधिकारी और व्यक्ति जिम्मेदार हैं जिसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी, भंडरिया, प्रखंड खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, भंडरिया, खाद्य गोदाम प्रभारी, भंडरिया, डीलर ईश्वर दयाल यादव (ग्राम तेहारो), डीलर जंगी सिंह (ग्राम बिजका), जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, गढ़वा शामिल हैं। वे बताते हैं कि भुखमरी से जूझ रहे इन परिवारों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं –
1. राशन की आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए,
2. जिम्मेदार अधिकारियों और डीलरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
3. जमदीरिया कुमारी और अन्य कमजोर वर्गों को विशेष सहायता प्रदान की जाए और प्रभावित परिवारों को उनका हक दिलाने और उनके जीवन को सुरक्षित करने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाये जाएं।
कहना ना होगा कि भुखमरी की यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह मानवीय संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।
■ संदर्भित हो कि एक साल पहले दिसंबर में जनचौक में इसी समस्या से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी
■ ‘जनचौक’ के इस रिपोर्ट का असर यह हुआ था झारखंड का खाद्य एवं आपूर्ति विभाग हरकत में आया और विभाग द्वारा 12 दिसंबर को आनन फानन में करीब 40 लोगों को दो महीने का राशन दिया गया।
वहीं 16 दिसंबर को बाकी 40 लोगों को एक महीने का और अन्य बाकी 18 लोगों का तीन महीने का बकाया राशन दिया गया। इसके साथ ही विभाग ने बताया कि जल्द ही बाकी दो महीने का राशन भी दिया जाएगा।
(झारखंड से विशद कुमार की रिपोर्ट)
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