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बेटी विंकल संधु की नज़रों में पिता पाश

(‘उसके छोटे-छोटे हाथ केक नहीं काट पा रहे थे। वह मोमबत्तियों के पहले जलने और फिर बुझ जाने के दृश्य को देखकर अचंभित थी।’’ उस समय विंकल एक साल की हो गयी थी। 38 साल पहले पाश ने अपनी बेटी के पहले जन्मदिन पर उसे अपनी डायरी में कुछ इस तरह से प्रवेश दिया। कुछ महीनों बाद जिस तरह से उसने कुछ-कुछ शब्द बोलने शुरू किए तो पाश ने उसका आनंद लेना शुरू कर दिया। उन्होंने इसे बेटी की ‘मानवीय भाषा’ पर पकड़ की कोशिश करार दिया। पाश की शहादत के समय विंकल संधु की उम्र सिर्फ सात साल थी। आगे उनके अपने पिता के बारे में खुद उनकी कलम से जानिए- टिप्पणी और प्रकाशनः द ट्रिब्यून, 6 सितम्बर 2020)

हमारी साथ की जिंदगी अचानक और भयावह तरीके से बीच में ही कट कर छोटी हो गयी। बुधवार, 23 मार्च, 1988 को खालिस्तानियों के एक समूह ने मेरे पिता को मार डाला। लेकिन वे लोग पाश की जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से तक कभी नहीं पहुंच पाए। और वह थी उनका विश्वास, विचारधारा और भावना।

-अवतार सिंह पाश का जन्म 9 सितम्बर, 1950 को जालंधर के तलवंडी सालेम में हुआ था। वह पाश के नाम से लिखते थे। वह नक्सल आंदोलन से प्रभावित हुए और लोग उन्हें उनकी प्रतिरोध की कविताओं के लिए जानते थे। उनकी कविताओं के चार संग्रह हैं- ‘लौह कथा’, ‘उदादियां बाजान मगर’, ‘सद्दे समे्या विच’ और ‘खिलरे होये वरके’। इन सभी का बहुत सारी भाषाओं में अनुवाद हुआ है। जब उन्हें आतंकियों द्वारा 23 मार्च, 1988 को गोलियों से मार दिया गया तब वह 38 साल के थे-।

पाश की गोद में विंकल।

मेरे पिता 32 साल जिंदा रहे और जनता के हृदय में बहस की ज्योति को उन्होंने जलाया और प्रेरित किया। वह विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गये। और अक्सर शोध विद्यार्थियों की पीएचडी का विषय बने। यहां तक कि आज भी उनकी कविताएं युवाओं की जिंदगी बदल देती हैं और युवा लड़के और लड़कियों को उनके कदमों पर चलने के लिए प्रेरित कर देती हैं। यह कहने की बात नहीं है कि इस क्रांतिकारी, शक्तिशाली, प्रभावशाली, प्रगतिशील और साहसी कवि की बेटी होने पर मुझे गर्व है।

जनवरी, 1988 में एक छोटे से गांव तलवंडी सालेम, जालंधर मेरा जन्म हुआ। यह वह समय था जब बेटी के जन्म पर लोग आंसू बहाने लगते थे। लेकिन यह मेरे पिता थे जिन्होंने मेरे इस दुनिया में आने का उत्सव मनाया। उन्होंने गांव में हरेक को मिठाइयां बांटी और लाउडस्पीकर पर गाना बजवाया। बहुत से लोग इस खुशी से चकराये हुए थे। लेकिन वही थे जो बेटी के जन्म के सौंदर्य, संवेदनशीलता और मूल्य को समझते थे। और यह कि बेटी एक परिवार के लिए क्या मायने रखती है।

विंकल की मां और पिता पाश।

त्रासद घटना के समय मैं सात साल की थी। मैं तब पहली कक्षा में थी। मैं इस बात को नहीं समझ सकी कि यह पंजाब के लिए कितना बड़ा नुकसान था। मैं इतना ही जानती थी कि मैं अब कभी भी दौड़ते हुए पिता की बाहों में नहीं आ सकती। या मैं उनकी आवाज कभी नहीं सुन सकूंगी या साथ नहीं चल सकेंगे या कि उनका प्यार अब हासिल नहीं हो पायेगा। धीरे-धीरे यादें धुंधली होती गईं।

मैं बड़ी हो गयी। मेरे परिवार ने उनके प्रति मेरी समझ बनाने में इस रूप में मदद की कि वह कौन थे। एक पिता से ज्यादा एक लेखक के रूप में। मेरी चाचियां पम्मी और राजिंदर, चाचा अजीत और सुच्चा, मेरी मां, मेरी दादी और मेरे पिता के कुछ करीबी दोस्तों- सुरिंदर धान्जल, चमन लाल, सुखविंदर कम्बोज और अमरजीत चंदन, ये कुछ नाम हैं- ने बताया कि मेरे पिता किस तरह के थे और मैं आज ऐसा महसूस करती हूं कि जब वह यहां नहीं हैं, तो मैं उनको जानती हूं। मैं अपने दादा मेजर सोहन सिंह संधु की हमेशा ऋणी रहूंगी जो मेरे पिता को जानने के मामले में सबसे अच्छे स्रोत रहे। पिता के नहीं रहने के बाद वही मेरी जिंदगी में पिता की तरह थे।

वह मेज जिस पर बैठकर पाश लिखने-पढ़ने का काम करते थे। अंग्रेजी के शब्द उन्हीं के हैं।

पिछले तीन दशकों में पूरी दुनिया से लोग मेरे पास आए सिर्फ यह व्यक्त करने के लिए कि उनके मन में मेरे पिता के प्रति कितना प्यार और आदर है। इतना ही कहूंगी, इन बातों ने मुझे गर्व से भर दिया। आभार के लिए शब्द नहीं हैं। उनके शब्द विस्मित करते हैं। मैं हर बार जब तलवंडी सालेम जाती हूं। मेरे लिए अपने घर में रहना बेहद खुशी का पल होता है। मैं ‘खेतों को देखती और महसूस करती हूं। ये वही खेत हैं जिन्हें वह बहुत प्यार करते थे और ‘पिंड’-गांव की सामान्य सी जिंदगी जीती हूं जिसके बारे में वह लिखते थे। मैं इन क्षणों को उनके पोते-पोतियों के साथ बांटने का इंतजार नहीं कर सकती।

मैंने अभी तक दुनिया में होने वाले जितनी भी कविता समारोहों में शिरकत की है उनमें पाश को चिन्हित कर एक अलग से हिस्सा रहा है। और उनमें हमेशा कोई न कोई उनको मानने वाला, उनमें विश्वास करने वाला और उनके प्रति समर्पित व्यक्ति होता है जो उनकी कविता से जुड़ना चाहता है और उनके कदमों पर चलना चाहता है।इंटरनेशनल पाश मेमोरियल ट्रस्ट जैसे संगठन और रेडियो तथा टीवी चैनल पूरी दुनिया में पाश की कविता को जिंदा रखने में मदद करते हैं।

वह स्थान जहां पाश को गोली लगी थी।

जैसे-जैसे समय गुजर रहा है, मैंने अपने दादा जी की जगह ले ली है और अपने बच्चों अरमान और अनायत को खुद उनके नाना के बारे पढ़ाना शुरू कर दिया। और इस बात को सुनिश्चित करना चाहती हूं कि वे इस बात को जानें कि वह सच में क्या थे। उनके महत्व को जानें। और वो अपने पीछे दुनिया को पढ़ने और महसूस करने के लिए कितनी शक्तिशाली कविता छोड़ गए हैं।

आज यदि वह जिंदा होते तो मुझे लगता है कि मेरा परिवार एक अलग तरह की जिंदगी जी रहा होता। बहरहाल, मैं उनके शब्दों और विचारधारा के मुताबिक जिंदगी जीने की पूरी कोशिश कर रही हूं।

मेरी जिंदगी की कुछ सबसे बड़ी कठिनाइयों के दौर में निर्णय लेते समय मेरे पिता की कुछ कविताएं मददगार साबित हुईं। मैं उनके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहूंगी। मैं आज जिस तरह की महिला हूं उसको बनाने में भी उनकी ही भूमिका है। उन्होंने ही मेरी मां और मुझे अपने शब्दों के जरिये जीने की ताकत दी।

विंकल।

मेरे घर के ड्राइंग रूप में लगी उनकी तस्वीर के ठीक दाहिनी ओर बगल में ‘सबसे खतरनाक होता है’ कविता लटकी हुई है। मुझे ऐसा महसूस होता है कि वह रोजाना हम लोगों को देखते हैं। इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी हमारे सपनों को ध्वस्त नहीं करेगा। जब हाल ही में एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना कर रहे थे तब यह कविता मेरे साथ बनी हुई थी और मेरे पंखों के नीचे हवा का काम कर रही थी।

पाश की कविता परेशानी में सहायता और ताकत तथा आगे बढ़ने में निरंतरता और उम्मीद मुहैया कराने के साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी राह बनाने की दिशा देती है। इस तरह की शक्तिशाली और प्रगतिशील कविता को ज़रूर चिन्हित किया जाना चाहिए और उनका समारोह बनाने के साथ ही उनके साथ जिया जाना चाहिए।

(इस पीस का हिंदी अनुवाद सामाजिक कार्यकर्ता अंजनी कुमार ने किया है।)

This post was last modified on September 10, 2020 12:35 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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