Monday, December 5, 2022

जमानत के बाद एक और मुकदमा, जुबैर को जेल में ही रखना चाहती है सरकार !

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ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को जब से पुलिस ने गिरफ्तार किया है, एक के बाद एक उनकी मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। दिल्ली पुलिस ने सबसे पहले एक्शन लिया, उसके बाद सीतापुर और लखीमपुर खीरी पुलिस ने भी शिकंजा कस दिया। चौतरफा विवादों से घिरे ऑल्ट न्यूज वेबसाइट के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की मुश्किल उस वक्त और बढ़ गई जब 2021 में उनके खिलाफ लखीमपुर  जिले के मोहम्मदी थाने में दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में दर्ज एक मामले में एसीजेएम कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया, जिसके बाद शुक्रवार देर शाम मोहम्मदी पुलिस ने विवादित ट्वीट मामले में जेल में निरुद्ध जुबैर को सीतापुर जिला कारागार में वारंट तामील करा दिया। अब जुबैर को मोहम्मदी की एसीजेएम कोर्ट में 11 जुलाई को पेश होना होगा। अदालत ने उन्हें सोमवार को पेशी पर तलब किया है।

दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सीतापुर में दर्ज मामले में अंतरिम जमानत दी, पर उससे जुबैर को कोई राहत नहीं मिली, क्योंकि उन्हें अब भी जेल में ही रहना होगा।उनके खिलाफ दिल्ली और लखीमपुर खीरी में आपराधिक मामले दर्ज़ हैं।  

पहली बार जब उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबर आई थी तो पता चला कि 2018 में देवता के बारे में आपत्तिजनक ट्वीट पर यह कार्रवाई की गई है, लेकिन जल्द ही जुबैर की फाइल खुलती चली गयी। जुबैर को एक ट्वीट के जरिए धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में 27 जून को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। बाद में उनके खिलाफ विदेशी फंडिग की भी जांच शुरू हो गयी।  

नया मामला यूपी की लखीमपुर पुलिस द्वारा जुबैर को एक मामले में वारंट तामील कराने का है, जिससे जुबैर का मामला और उलझता नजर आ रहा है। जुबैर के खिलाफ यह वारंट दुश्मनी को बढ़ावा देने के मामले में 2021 में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। जुबैर को 11 जुलाई को अदालत में पेश होने को कहा गया है। दरअसल अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) मोहम्मदी की अदालत ने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ वारंट भी जारी किया था, जिसे शुक्रवार को खीरी पुलिस ने तामील करा दिया है।

खीरी की एक अधीनस्थ अदालत के आदेश से 25 नवंबर 2021 को जुबैर के खिलाफ एक निजी समाचार चैनल के रिपोर्टर आशीष कटियार ने मामला दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में कटियार ने जुबैर पर चैनल के बारे में ट्वीट कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। शुक्रवार को खीरी पुलिस सीतापुर पहुंची और मोहम्मदी एसीजेएम की अदालत द्वारा जारी वारंट सीतापुर जिला जेल अधिकारियों को सौंप दिया जहां जुबैर बंद है।

दिल्ली की एक अदालत ने 2 जुलाई को ही आरोपी के कथित अपराध की प्रकृति और गंभीरता का हवाला देते हुए जुबैर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस समय कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। जुबैर 2018 में हिंदू देवता के बारे में आपत्तिजनक ट्वीट करने के मामले में आरोपी हैं और दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 201 (साक्ष्य मिटाना) तथा विदेश अंशदान (विनियमन) अधिनियम की धारा 35 भी जोड़ी है। सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया था कि आरोपी को पाकिस्तान, सीरिया और अन्य देशों से ‘रेजरपे पेमेंट गेटवे’ से पैसे मिले, जिसके लिए आगे की जांच की आवश्यकता है।

आरोपी की तरफ से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा था कि उनका मुवक्किल जुबैर कोई आतंकवादी नहीं है कि उन्हें उसकी मौजूदगी सुरक्षित करने की जरूरत है। जज ने अपने आठ पन्नों के आदेश में कहा था कि चूंकि मामला जांच के प्रारंभिक चरण में है और मामले के समग्र तथ्य और परिस्थितियां तथा आरोपी के खिलाफ कथित अपराधों की प्रकृति और गंभीरता के मद्देनजर, जमानत देने का कोई आधार नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की जाती है और आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है।’

जज ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए जांच के दौरान नई धाराएं जोड़े जाने को भी संज्ञान में लिया। इस दलील पर कि लैपटॉप और मोबाइल फोन की जब्ती अवैध थी और आरोपी की गोपनीयता को प्रभावित कर रही थी, अदालत ने कहा कि यह पुलिस की फाइल का हिस्सा था कि आरोपी के पास से 27 जून को जब्त किए गए मोबाइल फोन में कोई डेटा नहीं था। आरोपी के इस दावे पर कि उसका पुराना मोबाइल चोरी हो गया था, अदालत ने कहा, ‘रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो यह दर्शाता हो कि आरोपी का कोई मोबाइल फोन खो गया है।

जज ने कहा कि आरोपी को 16 जुलाई को संबंधित अदालत या ड्यूटी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में जुबैर के खिलाफ यूपी के सीतापुर जिले में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में बीते शुक्रवार को उन्हें पांच दिन के लिए या नियमित पीठ में सुनवाई के समय पारित होने वाले आदेश तक अंतरिम जमानत दे दी है । हालांकि वह एक अन्य मामले में दिल्ली की एक अदालत के आदेशानुसार हिरासत में ही रहेंगे और अब एक नया मामला खीरी का भी जुड़ गया है ।

उच्चतम न्यायालय ने जुबैर के मामले को लेकर कुछ भी ट्वीट नहीं करने और किसी सबूत, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या सामग्रियों से छेड़छाड़ नहीं करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत से जुड़ा आदेश सीतापुर में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में है और इसका दिल्ली में जुबैर के खिलाफ दायर एक अन्य मामले से कोई लेना-देना नहीं है। जुबैर इस समय दिल्ली में न्यायिक हिरासत में हैं।

जुबैर के वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने कहा था कि यह विडंबना है कि जो घृणा फैलाने वाले भाषण देते हैं, वे जमानत पर हैं, जबकि उनके ऐसे भाषणों का खुलासा करने वाला याचिकाकर्ता हिरासत में है। उन्होंने कहा कि यह देश क्या बन गया है? न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने जुबैर की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और मामले को 12 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने सीतापुर में दर्ज मामले में जांच पर रोक नहीं लगाई है और जरूरत पड़ने पर पुलिस लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर सकती है।

हिंदू शेर सेना की सीतापुर जिला इकाई के अध्यक्ष भगवान शरण द्वारा जुबैर के खिलाफ की गई शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश मामले में जांच अधिकारी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (ए) और धारा 152 ए (समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत प्रथम दृष्ट्या मामला बनता है। उन्होंने कहा कि जुबैर द्वारा सार्वजनिक रूप से संतों को घृणा फैलाने वाले’ कहने से एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होने से हिंसा भड़क सकती है, क्योंकि उन्होंने जिस व्यक्ति के खिलाफ ट्वीट किया है, वह सम्मानित हैं और उसके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।

गोंजाल्वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल ने ट्वीट करने की बात स्वीकार की है, लेकिन इन ट्वीट से कोई अपराध नहीं हुआ है और उन्होंने घृणा पैदा करने वाले भाषण देने के अपराधों का केवल जिक्र किया था और पुलिस ने बाद में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की।

सालिसीटर जनरल मेहता ने कहा कि यह एक या दो ट्वीट की बात नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि वह एक ऐसे सिंडिकेट का हिस्सा हैं, जिसने देश को अस्थिर करने के इरादे से नियमित रूप से इस प्रकार के ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा कि हम अधिक खुलासा नहीं कर सकते, क्योंकि जांच लंबित है, लेकिन इस मामले में धन की संलिप्तता का सवाल है। उन्हें उन देशों ने धन अनुदान में दिया है, जो भारत के विरोधी हैं।’ गोंजाल्वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल के जीवन को खतरा है और उनकी रक्षा की जानी चाहिए। पीठ ने निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया आदेश सुनवाई की अगली तारीख से पहले अन्य दस्तावेजों के साथ दाखिल किया जाए।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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