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Categories: बीच बहस

मौत जिनके दरवाजों पर रोज देती है दस्तक

नई दिल्ली। बिहार जहानाबाद के निवासी मुन्ना रजक जनवरी महीने में कैंसर का इलाज कराने एम्स आए। डॉक्टरों ने 12 लाख का इस्टीमेट बनाकर दिया था। निर्माण भवन में बोला गया था कि 15-20 दिन में पैसा चला जाएगा लेकिन 3 महीने हो गए लॉकडाउन के चलते पैसा रुक गया। जिससे उनकी कीमोथेरेपी भी रुक गई। 6 को होनी थी, फिर 13 को होनी थी, लेकिन दोनों कीमोथेरेपी नहीं हो पाई। पैसे नहीं आने के चलते।

यहां गेट नंबर एक के सामने टेंट में रहते थे। 5-6 हजार लोग थे वहां टेंट में। लॉकडाउन के बाद सबको वहां से हटा दिया गया ये कहकर कि अपनी व्यवस्था कर लो। कुछ लोगों को यमुना विहार शेल्टर होम ले जाया गया। फिर यहां आ गए। शुरु के 15 दिन खाने की बहुत दिक्कत हुई। कभी कुछ मिला कभी भूखे पेट रह गए। एक दिन मरीज के लिए दूध लेने गया तो आजाद नाम के एक व्यक्ति ने युवा कांग्रेस दफ्तर से खाना दिलवाया तब से वहीं से खाना चल रहा है। मुन्ना रजक की तबीयत बिगड़ रही है। उनका वजन भी तेजी से गिर रहा है।

गरीब दास।

कैंसर मरीज विनोद का वेंकटेश्वर अस्पताल में इलाज चल रहा था। जब तक कैश दिया तब तक इलाज किया। जब बीपीएल कार्ड लगाकर ईडब्ल्यूएस कटेगरी के तहत इलाज के लिए कहा तो मना कर दिया। अस्पताल ने कोविड-19 टेस्ट के लिए भी 4500 रुपए वसूल लिए। अस्पताल सरेआम दिल्ली हाईकोर्ट औऱ सुप्रीम कोर्ट की आज्ञा का अवहेलना कर रहे हैं।

जहांगीर दिल्ली के शास्त्रीपार्क इलाके में रहते हैं और पिछले एक साल से एम्स में उनका माउथ कैंसर का इलाज चल रहा है। दो महीने पहले का ऑपरेशन का डेट था लेकिन लॉकडाउन के चलते एम्स के बॉडीगार्ड ने अंदर नहीं जाने दिया। अशोक अग्रवाल के मार्फत केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन तक ये बात पहुँचाई गई। डॉ. हर्षवर्धन ने पीड़ित मरीज से फोन पर बात करके डॉक्टर से उनकी एप्वाइंटमेंट की तारीख फिक्स की। लेकिन जब जहांगीर एम्स गए तो उन्हें किसी डॉक्टर ने नहीं देखा। वहां से भगा दिया गया। जहांगीर बिस्तर पर हैं न कुछ खा पा रहे हैं न बोल पा रहे हैं।  

शंकर राम को किडनी की समस्या है। उनको डायलिसिस के लिए दो बार सफदरजंग ले गए । लेकिन उन्हें नहीं लिया गया। दीन दयाल उपाध्याय में दो दिन रखा फिर बिना इलाज किए जनकपुरी सुपरस्पेशलिटी के लिए भेज दिया। वहां पर सर्जन नहीं हैं ये कहकर मना कर दिया कि हमारे पास सर्जन नहीं हैं। फिर दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ने उसे सफदरजंग रेफर कर दिया। शंकर राम तीन अस्पतालों में बारी-बारी से चक्कर लगा रहा है उसे समझ में नहीं आ रहा कि इलाज कहां से होगा।

श्रमिक ट्रेन में दिल के मरीज को नहीं मिला खाना-पानी

गरीब राय दिल्ली के यूएनआई के सामने फुटपाथ पर चाय समोसे की दुकान लगाते थे। लॉकडाउन के बाद काम धंधा बंद हो गया तो खाने के लाले पड़ गए। गरीब राय दिल के मरीज हैं। 5 महीने पहले हार्ट अटैक आया था। उनका राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा है। श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन चली तो गरीब राय भतीजे के साथ बिहार के सुपौल स्थित पैतृक घर के लिए चल पड़े साथ में ज़रूरी दवाइयां भी रख ली। लेकिन बहुत चाहकर भी वो तीन दिन दवाइयाँ नहीं खा सके क्योंकि डॉक्टर ने खाली पेट दवाइयां खाने से मना किया था। गरीब राय बताते हैं कि तीन-चार दिन बिना खाना पानी के सफ़र करना पड़ा। रास्ते में गरीब राय की तबियत अगर बिगड़ जाती तो कौन जिम्मेदार होता।

मुन्ना रजक।

कई गंभीर मरीज दिन भर कड़ी धूप में लाइन में लगते हैं रजिस्ट्रेशन या ट्रेन पकड़ने के लिए सामान्य तौर पर मरीजों को आराम करने के लिए कहा जाता है। लेकिन दिल्ली में कड़कती धूप में कई गंभीर रोगी, गर्भवती, नवप्रसूता स्त्रियां और बुजुर्ग दिन-दिन भर अंबेडकर स्टेडियम, लाजपत नगर में मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए एक-एक किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े हुए हैं। थक जाते हैं तो लोग वहीं लाइन में अपना बैग रखकर बैठ जाते हैं। स्क्रीनिंग प्लेस पर बुजुर्गों बीमारों के लिए बैठने की भी व्यवस्था नही हैं। दो दिन पहले ही लाजपतनगर में मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए लाइन में लगे प्रवासी मजदूरों पर कीटनाशक के छिड़काव का मामला सामने आया था।

एक बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पास पैसे नहीं थे तो उन्होंने अपना मोबाइल बेच दिया। आधार कार्ड के अलावा कोई प्रूफ नहीं है। मैं यहां रजिस्ट्रेशन करवाने आया था सोचा आज नहीं तो कल भेज देंगे। लेकिन वो बोल रहे हैं कोई फायदा नहीं है।

(जनचौक के लिए अवधू आजाद की रिपोर्ट।)

This post was last modified on May 26, 2020 9:40 pm

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