Sunday, May 22, 2022

आगरा जिले की 9 विधानसभा सीटों की चीर-फाड़

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आगरा जिले में 9 विधानसभा सीटें हैं। आगरा कैंट, आगरा (नार्थ) उत्तर, आगरा (साउथ) दक्षिणी, आगरा ग्रामीण, बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुरी सीकरी और खेरागढ़। इसमें आगरा कैंट और आगरा ग्रामीण अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है। ताजनगरी आगरा पर्यटन के अलावा चमड़ा उद्योग और पेठों के लिये भी जाना जाता है। जीएसटी और बीफ के नाम पर मॉब लिचिंग ने व्यापारियों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा आगरा के लोगों ने हाल ही में कोविड-19 और डेंगू के दंश भी झेले हैं।

राजनीति को आर्थिक दृष्टिकोण से देख रहे प्रोफेसर विजय ने आगरा विभिन्न राजनैतिक आर्थिक सामाजिक मुद्दों पर जनचौक से बात की है। प्रोफेसर विजय जी बताते हैं कि भाजपा, सपा रालोद, बसपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं। आज राजनीति में राजनीतिक पहलू तो अप्रासंगिक हो गये हैं। लोग लड़ते किसी और पार्टी से हैं और जीतने के बाद किसी और पार्टी के साथ चले जाते हैं। इससे लोगों में एक तरह की नाराज़गी और भ्रम है।

तो आगामी विधानसभा चुनाव में पोलिटिकली क्या प्रक्रिया रहेगी यह बहुत अप्रत्याशित है। राजनीति अब बिजनेस है। राजनीति में अब लोग राजनीति के लिये, समाजसेवा के लिये नहीं बल्कि व्यवसाय के लिये आते हैं। आप वहीं निवेश करते हैं जहां कमाई होगी। तो आज किसी भी पार्टी का, प्रत्याशी का अप्रोच राजनीतिक नहीं है। बिजनेस अप्रोच है। दूसरी बात यह है कि मीडिया जिस तरीके से चीजों और तथ्यों को पेश कर रहा है। जिधर से बिजनेस होगा, मिलने की संभावना है मीडिया उधर उनके पक्ष में लिख, बोल, दिखा रहा है। 

प्रोफेसर विजय कहते हैं अगर आप मुझसे मतदाताओं का जातिगत अप्रोच जानना चाहते हैं कि किस तरफ वोट पड़ेगा तो बता दूँ कि मैंने लगातार यात्रा करते हुये बसों और ट्रेनों में बहुत से लोगों से बातें की हैं। लोगों में बहुत गुस्सा है। किसी एक पार्टी को लेकर नहीं बल्कि इतने सालों में जाति, धर्म और वर्ग की राजनीति खत्म नहीं हुई इसे लेकर।

कोविडकाल का जिक्र करते हुये प्रोफेसर विजय कहते हैं, “पिछले तीन सालों में जो भुगता लोगों ने वो अपने आप भुगता। कोई भी राजनीतिक नेता सामने नहीं आया। सरकार की मजबूरी थी राशन बांटना”।

वो मतदाताओं में निराशा को रेखांकित करते हुए आगे बताते हैं कि आज समाज में तमाम छोटे-छोटे सामाजिक समूह किसी पार्टी को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। लोगों का विश्वास उठ रहा है। इससे मतदाता प्रतिशत में गिरावट आयेगी। और मतदान बंटा हुआ होगा। वोट बंटने का फायदा सत्ताधारी पार्टी को होता है।

बंटा हुआ वोट और बंटा हुआ समाज अपने हित में नहीं सोच सकता। और अगली जो भी पार्टी आयेगी वो बिजनेस अप्रोच वाली पार्टी आयेगी। आने वाले 10-15 सालों में जो अप्रोच और वोटिंग बदलेगा वो बहुत ख़तरनाक दिशा में जा रहा है। राजनीति बिजनेस होती जा रही है तो मतदाता भी बिजनेस अप्रोच से सोचेगा। वो सोचेगा जो हमारे लिये जो करेगा हम उसी को वोट देंगे।

एक नज़र आगरा जिले के सभी 9 विधानसभा सीटों के सामाजिक समीकरण और प्रत्याशियों पर-

आगरा उत्तरी (नार्थ) विधानसभा

आगरा उत्तरी विधानसभा में 3,98, 495 मतदाता हैं। जिसमें 2 लाख से अधिक वैश्य मतदाता हैं। इस सीट पर अधिकांशतः वैश्य समुदाय का प्रत्याशी ही विधायक बनता आया है। उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में न्यू आगरा, सिकंदरा, दयालबाग, बोदला, जगदीशपुरा, गढ़ी भदौरिया, बाग फरजना, कमला नगर और मदिया कटरा आदि क्षेत्र हैं।

2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के जगन प्रसाद गर्ग  (1,35,120 वोट) ने बसपा के ज्ञानेंद्र गौतम (48,800 वोट) को हराया था।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये भाजपा ने पुरषोत्तम खंडेलवाल को और कांग्रेस ने विनोद कुमार बंसल को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने ज्ञानेंद्र गौतम को प्रत्याशी बनाया है। वो पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा से चुनाव लड़े थे। बसपा ने कांग्रेस छोड़कर आए शब्बीर अब्बास को प्रत्याशी बनाया है। जबकि बसपा ने 15 जनवरी को मुरारी लाल गोयल पेंटर को प्रत्याशी घोषित किया था। अब उनकी जगह मुस्लिम प्रत्याशी उतारा गया है। मुस्लिम बहुल आगरा दक्षिण सीट की जगह वैश्य बहुल आगरा उत्तर सीट से बसपा का मुस्लिम प्रत्याशी को उतारना लोगों को समझ नहीं आ रहा।

इस विधानसभा क्षेत्र में पिछले विधायक से जनता नाराज़ है। सड़कें टूटी हुई और पानी की सप्लाई की कमी है। जनता के बीच महंगाई भी मुद्दा है। व्यापारी वर्ग के लिये जीएसटी मुद्दा है। और व्यापारी वर्ग जीएसटी लाने वाली भाजपा से नाराज़ है।

बाह विधानसभा

बाह विधानसभा में लगभग 3 लाख 15 हजार मतदाता हैं। जिसमें 80 हजार ठाकुर मतदाता, 80 हजार ब्राह्मण मतदाता, 40 हजार जाटव, 40 हजार निषाद मतदाता हैं।  

2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी व भदावर परिवार की रानी पक्षालिका सिंह (80,567 वोट) ने बसपा के मधुसूदन शर्मा (57,427 वोट) को लगभग 23 हजार वोटों से हराकर चुनाव जीती थीं।

भाजपा ने रानी रक्षालिका सिंह, कांग्रेस ने मनोज दीक्षित, बसपा ने नितिन वर्मा और रालोद ने और समाजवादी पार्टी ने मधुसूदन शर्मा को टिकट दिया है।

फतेहपुर सीकरी विधानसभा

फतेहपुर सीकरी विधानसभा में लगभग 3 लाख 40 हजार मतदाता हैं । जिसमें 90 हजार जाट, 60 हजार ब्राह्मण, 45 हजार जाटव, 40 हजार क्षत्रिय, 30 हजार मुस्लिम मतदाता हैं।

यहां से चौधरी उदयभान सिंह, भाजपा वर्तमान विधायक हैं। 2017 में भाजपा के चौधरी उदयभान सिंह (108586) ने बसपा के सूरजपाल सिंह (56249) को हराया था।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये बसपा ने डॉ मुकेश कुमार राजपूत, भाजपा ने चौधरी बाबूलाल, रालोद ने ब्रजेश चाहर और कांग्रेस ने हेमंत चाहर को अपना उम्मीदवार बनाया है। 

खेरागढ़ विधानसभा सीट

खेरागढ़ विधानसभा में लगभग 3 लाख 9 हजार मतदाता हैं। यहां ठाकुर (क्षत्रिय) 75 हज़ार, ब्राह्मण 65 हज़ार, जाट 20 हज़ार, जाटव 20 हज़ार और मुस्लिम 10 हज़ार हैं।

आगरा की खेरागढ़ विधानसभा सीट में पड़ने वाले एक ब्लॉक सैयां को त्यागी चालीसी के नाम से भी जाना जाता है। इस ब्लॉक में त्यागी समाज के चालीस गांव हैं…कहा जाता है कि इन 40 गांवों का ‘आशीर्वाद’ जिस उम्मीदवार को मिल जाए उसकी जीत तय है। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े महेश गोयल ने यहां से जीत दर्ज की थी।

पिछले 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के महेश कुमार गोयल ( 93510 वोट) ने बसपा के भगवान सिंह कुशवाहा (61511) को हराकर विधायक बने थे।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये सपा-रालोद ने रौतान सिंह, और कांग्रेस ने रामनाथ सिकरवार को प्रत्याशी बनाया है। वहीं भाजपा ने बसपा छोड़कर भाजपा में आये भगवान सिंह कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि बसपा ने गंगाधर सिंह कुशवाहा को टिकट दिया है। ठाकुर वोटों के साथ ही बसपा का परंपरागत दलित व पिछड़ा वोट आता है तो मुकाबला कड़ा होगा।

फतेहाबाद विधानसभा 

फतेहाबाद विधानसभा में लगभग 2 लाख 95 हजार मतदाता हैं। जिसमें 75 हजार ठाकुर, 60 हजार निषाद, 40 हजार ब्राहमण, 25 हजार कुशवाह, 15 हजार गुज्जर, 15 हजार वैश्य मतदाता हैं।

जितेंद्र वर्मा, वर्तमान भाजपा विधायक हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के जितेंद्र वर्मा ( 101960 वोट) ने सपा के राजेंद्र‍ सिंह (67596 वोट) को हराया था।

2021 विधानसभा चुनाव के लिये बसपा ने शैलेंद्र प्रताप सिंह शैलू, भाजपा ने छोटे लाल वर्मा, कांग्रेस ने होतम सिंह निषाद और सपा ने रुपाली दीक्षित को टिकट दिया है। 34 वर्षीय रुपाली बाहुबली अशोक दीक्षित की बेटी हैं। जबकि 17 जनवरी को सपा ने इस सीट से राजेश शर्मा को प्रत्याशी बनाया था। 

एत्‍मादपुर विधानसभा

एत्‍मादपुर विधानसभा में लगभग 4 लाख 15 हजार मतदाता हैं। जिसमें ठाकुर 80 हजार, बघेल 55 हजार, दलित 45 हजार, यादव 30 हजार, कुशवाहा 15 हजार, ब्राह्मण 25 हजार, मुस्लिम 20 हजार, जाट 20 हजार, और वैश्य 10 हजार हैं।

2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के राम प्रताप सिंह (1,37,381 वोट) बसपा के डॉ. धर्म पाल सिंह (90,126) को हराकर विधायक चुने गये थे।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये एत्मादपुर विधानसभा सीट पर बसपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश बघेल को प्रत्याशी बनाया है। जबकि 15 को बसपा ने सर्वेश बघेल का नाम घोषित किया था। वहीं समाजवादी पार्टी ने डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान को टिकट दिया है।

आगरा दक्षिण

कुल 3,51,273 मतदाता हैं इस विधानसभा क्षेत्र में। जिनमें सबसे अधिक 75 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। 45 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। 45 हजार जाटव मतदाता हैं जबकि सिंधी पंजाबी सरदार लगभग 35 हजार वोटों के साथ तीसरे और चौथे नम्बर पर हैं। इस सीट पर यही मुख्य वोटर हैं।

साल 2017 में भाजपा प्रत्याशी योगेंद्र उपाध्याय (111882 वोट) ने बसपा के जुल्‍फिकार अहमद भुट्टो (57657 वोट) हराया था।

समाजवादी पार्टी ने विनय अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया है। जबकि कुछ दिन पहले सपा ने यहां से रिज़वान रईसुद्दीन को उम्मीदवार बनाया था।  

आगरा कैंट विधानसभा सीट

आगरा कैंट अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है।

4,27, 525 मतदाताओं वाले इस विधानसभा सीट में क़रीब 75 हजार जाटव, 25 हजार वाल्मीकि, 30 हजार मुस्लिम, 65 हजार ब्राह्मण, राठौर 25 हजार, यादव 15 हजार, जाट 15 हजार, सिंधी और पंजाबी मतदाताओं की संख्या भी 30 हजार है।

पिछले 8 चुनाव में यहां से 5 बार भाजपा और 3 बार बसपा प्रत्याशी जीते हैं। सपा और रालोद यहां से कभी नहीं जीते। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ गिरराज सिंह धर्मेश (1,13178 मत) ने बसपा प्रत्याशी गुटियारी लाल दुवेश (66,853 मत) को 46325 मतों के भारी अंतर से हराया था। जबकि साल 2012 में बसपा के गुटियारी लाल दुवेश ने (67,786) भाजपा के गिरराज सिंह धर्मेश (61,371) को 6,415 मतों से हराया था। साल 2007 में बसपा के जुल्फिकार अहमद भुट्टो (30,534) ने भाजपा के केशो मेहरा (27,149) को हराया था।  

बसपा ने भारतेंद्र अरुण को, और भाजपा ने डॉ जीएस धर्मेश को प्रत्याशी बनाया है। कुंवर सिंह वकील को समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया है।

ब्राह्मण, राठौर, जाट और गैरजाटव मतदाताओं के बूते भाजपा का इस सीट पर दबदबा रहा है। लेकिन अबकी बार बसपा के जीतने के चांस ज़्यादा हैं क्योंकि भाजपा के प्रति मतदाताओं में नाराज़गी है। आगरा में जूता बनाने का कुटीर उद्योग चलता है और करीब 5000 इकाइयां यहां काम करती हैं। बीफ के मुद्दे पर होने वाली मॉब लिंचिंग से दलित और मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल है। इससे आगरा के चमड़ा उद्योग को नुकसान हुआ है।

आगरा देहात विधानसभा सीट

पहले दयालबाग़ के नाम से जाने जानी वाली यह सीट भी आरक्षित सीट है। 3,92,467 मतदाताओं वाला यह विधानसभा सीट जाट बाहुल्य है। जिनकी संख्या 1 लाख के क़रीब है। इसके बाद जाटव मतदाताओं की संख्या 65000 है। 40 हजार ब्राह्मण मतदाता और यादव मतदाता 28000 हैं। 

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हेमलता दिवाकर (1,29,887) ने बसपा के काली चरण सुमन (64,591) को 65,296 के भारी अंतर से हराया था। जबकि साल 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के काली चरण सुमन (69,969) ने समाजवादी पार्टी की हेमलता (51,215) को 18,754 मतों से हराया था।

इस सीट से बसपा ने किरन प्रभा केसरी, भाजपा ने बेबीरानी मौर्या को उतारा है। महेश कुमार जाटव को रालोद ने उतारा है। जबकि कांग्रेस ने उपेद्र सिंह को टिकट दिया है।

डेंगू और कोरोना का कहर इस क्षेत्र ने देखा है। लोगों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार के प्रति गुस्सा है। भाजपा की मौजूदा विधायक हेमलता दिवाकर के खिलाफ़ लोगों में नाराज़गी के चलते भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बेबीरानी मौर्या को प्रत्याशी बनाया है। मलपुरा, धनोली, चमरोली, कजराई समेत कई गांवों में मौजूदा विधायक के ख़िलाफ़ पोस्टर लगाये गये हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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