चार अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों ने एनएसओ पर उठाया सवाल, कहा-बंद हो जानी चाहिए ऐसी कंपनियां

Estimated read time 2 min read

अमेरिका की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के चार सांसदों ने एक बयान जारी कर कहा कि अब बहुत हो चुका है, एनएसओ ग्रुप के सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग के संबंध में हालिया खुलासे इस विश्वास को पुष्ट करते हैं कि इसे नियंत्रण में लाया जाना चाहिए। एनएसओ ग्रुप जैसी कंपनियों को या तो बंद या प्रतिबंधित किया जाए। अमेरिका की डेमोक्रैटिक पार्टी के चार प्रमुख सांसदों ने खतरनाक पेगासस स्पाइवेयर बनाने वाली इजरायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप को तत्काल बंद या प्रतिबंधित करने की मांग की है। इस बीच पेगासस स्पाइवेयर मामले की जाँच उच्चतम न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त जज से कराए जाने की मांग को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

अमेरिकी सांसदों ने सरकार द्वारा तत्काल कदम उठाने के लिए छह कदम सुझाए हैं, जिसमें एनएसओ समूह को अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा प्रशासित उस सूची में शामिल करना है जो इन साइबर उपकरणों को अधिनायकवादी सरकारों को बेचने वाले व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों का आदेश देने के लिए नियम स्थापित करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पेगासस के निशाने पर आए सभी मामलों की जांच की मांग की है।

बीते सोमवार को डेमोक्रैट कांग्रेस के सदस्य टॉम मालिनॉवस्की, केटी पोर्टर, ह्वाकीन कास्त्रो और अन्ना जी. ईशू ने कहा कि पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल के बारे में हालिया मीडिया रिपोर्ट्स दर्शाती हैं कि इस उद्योग को सख्त नियमों के तहत लाने की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ये कंपनियां ‘साइबर दुनिया का एक्यू खान’ जैसी हैं। एक्यू खान पाकिस्तान के परमाणु बम जनक थे, जिन पर आरोप है कि उन्होंने ईरान को परमाणु तकनीक दिया था।

मालिनॉवस्की के ऑफिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है, अब बहुत हो गया है। एनएसओ समूह के सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग के संबंध में हाल के खुलासे हमारे विश्वास को पुष्ट करते हैं कि इसे नियंत्रण में लाया जाना चाहिए।

फ्रांस स्थित मीडिया नॉन-प्रॉफिट फॉरबिडेन स्टोरीज ने सबसे पहले 50,000 से अधिक उन नंबरों की सूची प्राप्त की थी, जिनकी इजरायल के एनएसओ ग्रुप द्वारा निर्मित पेगासस स्पाइवेयर के जरिये निगरानी किए जाने की आशंका है। इसमें से कुछ नंबरों की एमनेस्टी इंटरनेशल ने फॉरेंसिक जांच की, जिसमें ये पाया गया कि इन पर पेगासस के जरिये हमला किया गया था।

फॉरबिडेन स्टोरीज ने इस ‘निगरानी सूची’ को द वायर समेत दुनिया के 16 मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया, जिन्होंने 18 जुलाई से एक के बाद एक बड़े खुलासे किए हैं। इस पूरी रिपोर्टिंग को ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है। इसे लेकर भारत के पत्रकारों, नेताओं, मंत्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जांच एजेंसी के अधिकारियों, कश्मीर के नेताओं, सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों, सेना, बीएसएफ, रॉ इत्यादि के अफसरों के नाम सामने आए हैं।

एनएसओ ग्रुप का दावा है कि अपने प्रोडक्ट को सिर्फ ‘प्रमाणित सरकारों’ को ही बेचते हैं। वहीं भारत सरकार ने पेगासस के इस्तेमाल को लेकर न तो स्वीकार किया है और न ही इंकार किया है। पेगासस ने इस सूची के किसी भी नंबर की हैकिंग से इंकार किया है।

अमेरिकी सांसदों ने अपनी सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कहा है कि तानाशाहों को ऐसे संवेदनशील उपकरण बेचने वाली कंपनियां साइबर दुनिया की एक्यू खान खान हैं। इन पर रोक लगाई जानी चाहिए, और यदि आवश्यक हो तो बंद कर दें। एनएसओ ग्रुप के इंकार को ‘विश्वसनीय नहीं’ बताते हुए सांसदों ने कहा कि उन्होंने ‘चुने गए प्रतिनिधियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और साइबर-सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा बार-बार उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज’ किया है।

सांसदों ने एक बयान में कहा है कि निजी कंपनियों से स्पाइवेयर खरीदने वाली अधिनायकवादी सरकारें आतंकवाद और शांतिपूर्ण विरोध के बीच कोई अंतर नहीं करती हैं। यदि वे कहते हैं कि वे इन उपकरणों का उपयोग केवल आतंकवादियों के खिलाफ कर रहे हैं, तो किसी भी तर्कसंगत व्यक्ति को यह मान लेना चाहिए कि वे पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी उनका उपयोग कर रहे हैं।वाजिब इस्तेमाल के आश्वासन के आधार पर सऊदी अरब, कजाखिस्तान और रवांडा जैसी सरकारों को साइबर-घुसपैठ तकनीक बेचना माफिया को बंदूकें बेचने जैसा है और यह विश्वास करना कि उनका उपयोग वे केवल टार्गेट प्रैक्टिस के लिए करेंगे।

दरअसल पेगासस प्रोजेक्ट के तहत इस बात का खुलासा हुआ है कि सऊदी शासन के खिलाफ बोलने वाले जमाल खशोगी की करीबी महिला को भी पेगासस स्पाइवेयर के जरिये निशाना बनाया गया था और ये सब खशोगी की हत्या के दौरान किया गया था। इतना ही नहीं, इस सूची में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत दुनिया भर के कई नेताओं के नंबर शामिल हैं, जो कि पेगासस के संभावित निशाने पर थे।

अब पत्रकारों की याचिका

वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार ने उच्चतम न्यायालय में यह याचिका तब दायर की है जब पेगासस स्पाइवेयर से विपक्षी नेताओं, कुछ मंत्रियों, क़रीब 40 पत्रकारों सहित दूसरे लोगों की जासूसी कराए जाने की रिपोर्टें आ रही हैं। इस मामले में अब तक कम से कम तीन याचिकाएँ दायर की जा चुकी हैं।

दो दिन पहले ही सीपीएम के एक सांसद और इससे भी पहले एक वकील ने अदालत में याचिका दायर कर ऐसी ही मांग की थी। प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया सहित पत्रकारों के कई संगठन भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच कराए जाने की मांग पहले ही कर चुके हैं। विपक्षी दल के नेता भी संयुक्त संसदीय कमेटी यानी जेपीसी या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच की मांग लगातार कर रहे हैं।

अब एन राम और शशि कुमार की ताज़ा याचिका में कहा गया है कि दुनिया भर के कई प्रमुख प्रकाशनों से जुड़ी वैश्विक जाँच से पता चला है कि भारत में 142 से अधिक व्यक्तियों को पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके निगरानी के संभावित लक्ष्य के रूप में पहचाना गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि उस स्पाइवेयर के संभावित टार्गेट किए गए कुछ मोबाइल फ़ोन की फ़ोरेंसिक जाँच में भी पेगासस के हमले के निशान मिले हैं। इसमें कहा गया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब ने फ़ोरेंसिक जाँच की है।

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट को सरकार को यह खुलासा करने का निर्देश देना चाहिए कि क्या उसने स्पाइवेयर के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है या इसका इस्तेमाल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह की निगरानी के लिए किया है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने न तो स्वीकार किया है और न ही इंकार किया है कि स्पाइवेयर उसकी एजेंसियों द्वारा खरीदा और इस्तेमाल किया गया था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

You May Also Like

More From Author

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments