Sunday, October 24, 2021

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‘GNCTD बिल 2021’ देश के फेड्रलिज़म, संघीय ढाँचे व संविधान पर हमला है

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पहले वे कम्युनिस्टों के लिए आए

और मैं कुछ नहीं बोला

क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था।

फिर वे आए ट्रेड यूनियन वालों के लिए

और मैं कुछ नहीं बोला

क्योंकि मैं ट्रेड यूनियन में नहीं था।

फिर वे यहूदियों के लिए आए

और मैं कुछ नहीं बोला

क्योंकि मैं यहूदी नहीं था।

फिर वे मेरे लिए आए

और तब तक कोई  बचा था

जो मेरे लिए बोलता।

मार्टिन निमोलार की उपरोक्त कविता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर फिट बैठती है।  लेकिन शुक्र है कि तमाम जनपक्षधर पार्टियां दिल्ली के संघीय ढांचे पर हमले के खिलाफ़ केजरीवाल के साथ खड़ी हुई हैं।

सीपीआईएमएल (CPI-ML) नेता कविता कृष्णन ने ‘जीएनसीटीडी संशोधन बिल 2021’ (Government of National Capital Territory of Delhi) को फेड्रलिज़म (federalism), भारत के संघीय ढांचे और संविधान पर बड़ा हमला बताते हुए जनचौक से फोन पर कहा है ऐसे कई हमले मोदी सरकार द्वारा किये जाते हम लोगों ने देखा है। राज्य सरकार को गिराना, उन्हें अस्थिर करने की कोशिश करना, धार 370 हटाना आदि कई ऐसे मौके हैं भारत के संघीय ढांचे पर हमले के।

उन्होंने आगे केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के संघीय ढांचे पर हमले का आम आदमी पार्टी द्वारा समर्थन किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा- “इस मामले में हम ये भी कहेंगे कि आम आदमी पार्टी को भी इस पर सोचना चाहिए कि आज जो हमला दिल्ली पर हुआ है वही हमला जब जम्मू कश्मीर में हुआ था तो उन्होंने उसका स्वागत किया था। हम इस बात को इसलिए नहीं याद दिला रहे हैं हम दिल्ली पर हुए हमले को सही ठहरायें बल्कि हम इसलिए याद दिला रहे हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि सब लोग समझें कि जम्मू कश्मीर में यदि आप संघीय ढांचे को कमजोर करने में हामी भरेंगे तो केंद्र सरकार को संविधान को कमजोर करने की जो मुहिम है उसमें आप उनका आत्मविश्वास बढ़ा रहे हैं कि वो संविधान पर हमला आसानी से कर सकते हैं। तो अब आम आदमी पार्टी को जम्मू कश्मीर के 370 को निरस्त करने पर अपनी पोजीशन पर दोबारा से विचार करना चाहिए।

कविता कृष्णन ने आगे केंद्र प्रतिनिधि राज्यपाल, उपराज्यपाल की ख़तरनाक असंवैधानिक चरित्र को उद्धृत करते हुए कहा –“जम्मू कश्मीर में 370 हटाने का एक ही रास्ता था कि उस पर राज्य की असेंबली (Assembly) को अपनी राय देनी थी। लेकिन उस समय राज्य की चुनी हुई असेंबली थी ही नहीं। राज्य की विधान-सभा भंग हो चुकी थी। तो उस समय गवर्नर के बारे में कहा गया कि गवर्नर ही राज्य की जनता का प्रतिनिधि है। जबकि वो चुने हुए प्रतिनिधि नहीं बल्कि केंद्र के प्रतिनिधि थे, लेकिन उनको जम्मू कश्मीर की जनता का प्रतिनिधि बताकर ऐसा किया गया। इस चीज को सही ठहराकर संघीय ढांचे और फेड्रलिज़म (federalism) पर हमले के लिए रास्ता साफ किया गया । और उसके बाद ये हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। इसमें कोई नहीं बचेगा। दिल्ली क्यों बचेगी, जब जम्मू कश्मीर नहीं बचा। पूरे संघीय ढांचे का और संविधान का दुश्मन है भारतीय जनता पार्टी। 

कविता कृष्णन ने अंत में कहा –“हम सब लोगों को हर राज्य में संघीय ढांचे को समर्थन करना चाहिए भले हमें उस राज्य की सरकार पसंद आये न आये। उसी तरह से हम बंगाल के बारे में कहेंगे कि बंगाल में संघीय ढांचे पर हमला किया जिस समय केंद्रीय पुलिस दल-बल को भेजा गया वहां के पुलिस कमिश्नर पर कार्रवाई करने के लिए। बिना राज्य को सूचित किये। दिशा रवि को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस को भेजा गया बिना राज्य को बताये बिना राज्य की जूडिशरी की आज्ञा लिये। ये सारे संघीय ढांचे पर हमले हैं और हमें हमेशा इनका विरोध करना चाहिए। क्योंकि ये सारे कदम देश के सारे नागरिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।

वहीं बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता पार्टी के अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मार्टिन निमोलार की उपरोक्त कविता से फासीवाद के विरुद्ध दूसरों के लिए भी खड़े होने का सबक सीखा है।

तभी तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दिल्ली की निर्वाचित सरकार की शक्तियों को कमजोर करने और दिल्ली के उप-राज्‍यपाल को अधिक शक्तियां देने के लिए Government of National Capital Territory of Delhi ACT में संशोधन के प्रस्‍ताव की राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता ने कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने GNCTD 1991 एक्ट में संशोधन की निंदा करते हुए कहा है कि – “ये कौन सा सहकारी संघवाद है जहां एक राज्य की निर्वाचित सरकार के अधिकार को छीन कर  एक नौकरशाह को सौंपने का बिल लाया जा रहा है। दिल्ली में चल रही इस मंशा का अगर विरोध नहीं हुआ तो कल किसी और राज्य का भी नंबर आएगा। मैं और मेरी पार्टी हर स्तर पर इसका विरोध करते है।”

 गौरतलब है कि  05 अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी नीत केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर से ‘राज्य’ का जनतांत्रिक दर्ज़ा छीनकर उसकी सारी शक्तियों को उपराज्यपाल में निहित कर दिया था। तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने केंद्र सरकार के लोकतंत्र विरोधी फासीवादी कदम की सराहना करते हुए उन्हें समर्थन दिया था।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी GNCTD संशोधन बिल का विरोध करते हुए कहा है – “संसद और सड़कों दोनों पर एनसीटी संशोधन विधेयक का विरोध करने की आवश्यकता है।

दिल्ली भारत की राजधानी है – निर्वाचित सीएम को गोलवलकर के मनोनीत कठपुतलियों से नहीं हटाया जा सकता है।

महुआ मोइत्रा ने भाजपा को सीख देते हुए कहा है कि भाजपा लोकतंत्र की भावना का सम्मान करना सीखें, न कि अपने पाश्र्व घोषणापत्र का।

17 मार्च को दिल्ली के जंतर मंतर पर आम आदमी पार्टी ने ‘GNCTD बिल 2021’ के खिलाफ़ धरना प्रदर्शन किया था। जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत पार्टी के तमाम नेता और विधायक पार्षद समेत हजारों कार्यकर्ता पहुंचे थे। 

अरविन्द केजरीवाल के ट्वीट से सम्बन्धित link –
https://twitter.com/i/broadcasts/1YqKDeLmbdLGV?t=5m55s&s=08

जम्मू कश्मीर से संघीय राज्य का दर्ज़ा छीनकर उसकी सारी जनतांत्रिक शक्तियां उपराज्यपाल में निहित करने का समर्थन करने वाले अरविंद केजरीवाल ने कल जंतर-मंतर से, संविधान, चुनाव प्रक्रिया, जनादेश की दुहाई देते हुए ‘GNCTD बिल 2021’ को जनता के साथ धोखा बताया है।

इससे पहले कल जंतर मंतर पर GNCTD बिल के खिलाफ़ धरना प्रदर्शन करते हुए दिल्ली कांग्रेस कमेट अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि-” GNCTD बिल को लागू कर के केंद्र सरकार दिल्ली में LG के सहारे अपनी हुकूमत चलाना चाहती है। केंद्र इस ऐक्ट में बदलाव कर के दिल्ली में चुनी हुई सरकार को LG का दरबारी बनाना चाहती है। फ़ैसले लेने और करने वाली सरकार को याचिकाकर्ता बना देना चाहती है, जो लोकतंत्र के लिए भी घातक है।”

उन्होंने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार और दिल्ली के सरकार में बैठे नए तथाकथित देशभक्त अरविंद केजरीवाल ने GNCTD 1991 ACT में संशोधन पर चुपचाप समर्थन देकर यह बता दिया है की वह भाजपा की B-Team के रुप में काम कर रहे हैं। दिल्ली कांग्रेस 17 मार्च को इसी काले कानून के विरोध में जंतर मंतर पर धरना देगी।”

GNCTD 1991 एक्ट में संशोधन

केंद्र सरकार के द्वारा संसद में पेश किए गए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक-2021 (GNCTD Amendment Bill 2021) पेश किया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक पेश किया। विभिन्न वर्गों में संशोधन के माध्यम से विधेयक को पेश किया है। केंद्रशासित प्रदेश की सरकार को किसी भी प्रशासनिक फैसले लेने से पहले उपराज्यपाल की राय या फाइलें भेजनी ज़रूरी होगी। विधेयक के जरिए उपराज्यपाल के साथ अधिनियम में सरकार को प्रतिस्थापित करना है। विधेयक में कहा गया है कि विधानसभा द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी कानून में को लागू करने से पहले उपराज्यपाल के पास जाना होगा। अन्य संशोधन धारा-44 में किया गया है। दिल्ली सरकार के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम-1991 की धारा 44 में संशोधन कर पेश किया गया। विधेयक कहता है कि मंत्रिपरिषद या एक मंत्री के निर्णय के अनुपालन में कोई भी कार्रवाई करने से पहले सभी शक्तियां उपराज्यपाल के पास होगी।

केंद्र सरकार का कहना है कि अधिनियम की धारा-44 के व्यवसाय के संचालन से संबंधित है। इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि आदेश जारी करने से पहले उपराज्यपाल को किस प्रस्ताव या मामलों को भेजना आवश्यक होगा। विधेयक में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बारे में भी बात की गई है और कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 04 जुलाई 2018 के अपने फैसले में और सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 14 फरवरी 2019 को जो आदेश दिया उसके बारे में बताया गया है।

बता दें कि दिल्ली के उपराज्यपाल और सरकार के बीच कई बार फैसलों को लेकर टकराव लगातार सामने आते रहे हैं। साल 2019 में दोनों की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी सुनाया था, जिसमें कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस, पब्लिक ऑर्डर और जमीन संबंधित मामलों पर उप-राज्‍यपाल की अनुमति को ज़रूरी बताया था। इस बिल में यदि संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो उससे दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल की शक्तियां पहले से अधिक हो जाएंगी।

बता दें कि इससे पहले 05 अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी नीत केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर से ‘राज्य’ का जनतांत्रिक दर्ज़ा छीनकर उसकी सारी शक्तियों को उपराज्यपाल में निहित कर दिया था। इसके लिए धारा 370 के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों में फेरबदल तक किया गया था।

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