बीच बहस

यूपी पंचायत चुनाव:प्रशासनिक मदद से विपक्षियों का नामांकन रोक कर बीजेपी ने अपने 17 प्रत्याशी निर्विरोध जिताए

छोटी से छोटी सत्ता के लिये भी आरएसएस-भाजपा आलाकमान अपनी पूरी ताक़त और संसाधन झोंक देते हैं। इसकी बानगी उत्तर प्रदेश में चल रहे जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव हैं। जहां सत्ताधारी भाजपा और उनकी सरकार ने प्रशासनिक अमले समेत सारे हथकंडे अपनाते हुये समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों को छकाते हुये भाजपा के 17 जिलाध्यक्ष प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित करवा दिया। जिसमें प्रशासनिक अमले और निर्वाचन आयोग का योगदान अभूतपूर्व है।

राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इन 18 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय है। बता दें, आगरा से बीजेपी प्रत्याशी मंजू भदौरिया, गाजियाबाद से ममता त्यागी, मुरादाबाद से डॉ. शेफाली सिंह, बुलंदशहर से डॉ. अंतुल तेवतिया, ललितपुर से कैलाश निरंजन, मऊ से मनोज राय, चित्रकूट से अशोक जाटव, गौतमबुद्ध नगर से अमित चौधरी, श्रावस्ती से दद्दन मिश्रा, गोरखपुर से साधना सिंह, बलरामपुर से आरती तिवारी, झांसी से पवन कुमार गौतम, गोंडा से घनश्याम मिश्रा, मेरठ से गौरव चौधरी, बांदा से सुनील पटेल, वाराणसी से पूनम मौर्या तथा अमरोहा से ललित तंवर जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं। वहीं इटावा से समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव उर्फ अंशू के खिलाफ किसी ने भी नामांकन नहीं किया। निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा 29 जून को नाम वापसी के बाद होगी।

दरअसल, शनिवार 26 जून को जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव के लिए नामांकन सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक हुए। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में कुल 164 लोगों ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दर्ज़ करवाया। इनमें से 5 उम्मीदवारों का पर्चा निर्वाचन आयोग ने खारिज कर दिया, जिसके बाद 159 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया था कि नामांकन दाखिले के बाद 29 जून तक प्रत्याशी अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। इसके बाद तीन जुलाई को मतदान होगा। मतदान पूर्वान्ह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक होगा और उसके बाद मतगणना शुरू होगी। जिसका परिणाम रात तक घोषित कर दिया जाएगा।

आखिरी समय पाला बदल लिया विपक्षी प्रत्याशियों ने

ऐसे बहुत से जिले हैं जहां जिला अध्यक्ष पद के लिए खड़े विपक्षी पार्टियों के उम्मीदवार या उनके प्रस्तावक नामांकन करवाने के लिए पहुंच ही नहीं सके। राज्य के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि सत्ता और प्रशासन के दम पर भाजपा उसके प्रस्तावकों, प्रत्याशियों को नामांकन करने के लिए पहुंचने नहीं दी।

आइये देखते हैं कल क्या हुआ। सबसे पहले बात योगी की कर्मभूमि गोरखपुर जिले की। गोरखपुर से सपा प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता आखिरी वक्त में नामांकन दाखिल करने से पीछे हट गए, फिर समाजवादी पार्टी ने जितेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया जितेंद्र यादव नामांकन दाखिल करने के लिये निकले तो लेकिन कलेक्ट्रेट गेट पर ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट बंद कर दिया था, और यूपी पुलिस के लोग खड़े तमाशा देखते रहे।  इस कारण जितेंद्र नामांकन स्थल तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा समर्थित प्रत्याशी साधना सिंह का निर्विरोध निर्वाचन तय है। वहीं गोरखपुर सपा जिला अध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से सोची समझी साजिश है।

अब बात पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बागपत की। साल 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा भाजपा ज्वाइन करने की तर्ज पर ही कल नामांकन शुरू होने से पहले ही आरएलडी की प्रत्याशी ममता जय किशोर के भाजपा जॉइन करने की अफवाह फैलायी गयी। हालांकि भाजपा प्रत्याशी बबली देवी के नामांकन के बाद ही आरएलडी प्रत्याशी और उनके पति आरएलडी कार्यालय पहुंचे और प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरएलडी प्रत्याशी के पति ने बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह पर उनका अपहरण कराने और जबरन बीजेपी जॉइन कराने का आरोप लगाया। इसके बाद आरएलडी कार्यकर्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी के प्रस्तावकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे और ममता जय किशोर का जिला अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करवाया। 

प्रत्याशियों और प्रस्तावकों को नहीं पहुंचने दिया गया नामांकन केंद्र

मऊ में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के समाजवादी पार्टी द्वारा पहले से ही राम नगीना यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया गया था लेकिन वह अपना नामंकन नहीं कर सके। ऐसे में भाजपा के उम्मीदवार मनोज राय का निर्विरोध चुना जाना तय है।

जबकि समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्म प्रकाश यादव ने प्रेस वार्ता करके भाजपा के इशारे पर जिला प्रशासन द्वारा उनके प्रत्याशी को ग़ायब करने का संगीन आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नामांकन के दिन समाजवादी पार्टी के सभी कार्यकर्ता नामांकन करने के लिए तैयार थे। लेकिन कल से ही हमारा प्रत्याशी घर पर नहीं है। प्रशासन के लोग कल शाम को हमारे प्रत्याशी राम नगीना यादव के घर पर गए थे, जिसमें एडीएम और उनके साथ पुलिस फोर्स भी थी। मैं भी वहां पर मौजूद था। उनके घर पर जाकर इन लोगों ने उनको धमकाने का काम किया और घोसी कोतवाली में जाकर उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ किया। घर के पूरे परिवार को डराया धमकाया गया और कल से हमारे प्रत्याशी लापता हैं। हम लोगों को यह अंदेशा है कि कहीं न कहीं यह लोग उनको छुपा कर रखे हैं।”

वहीं जिला मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी से जिला अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार अमरीन का प्रस्तावक सपा कार्यालय ही नहीं पहुंचा। सपा उम्मीदवार के नामांकन दाखिल न होने पर सपा जिलाध्यक्ष जयवीर यादव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा है, ”प्रशासन द्वारा सपा के पंचायत सदस्यों का उत्पीड़न किया गया है, सत्ता के दबाव में पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर उनके कारोबारों को सील किया। हमारे पंचायत सदस्यों को लालच देकर खरीदा गया और आज प्रस्तावकों को भी पहुंचने नहीं दिया गया। बता दें कि मुरादाबाद में भाजपा के पास 10 पंचायत सदस्य, सपा के पास 11 सदस्य और बसपा के 12 पंचायत सदस्य हैं।

इसी तरह मेरठ जिले में डीएम कार्यालय में नामांकन पत्रों की जांच में गठबंधन प्रत्याशी सलोनी गुर्जर के नामांकन पर आपत्ति जताते हुये उनका पर्चा अस्वीकार कर दिया गया जिसके चलते भाजपा के प्रत्याशी गौरव चौधरी निर्विरोध निर्वाचित होना सुनिश्चित है।

सहारनपुर में कांग्रेस और सपा ने बसपा प्रत्याशी शिमला देवी को समर्थन दिया था। वहीं बसपा प्रत्याशी शिमला देवी अपना नामांकन भरने के लिए 3 बजे के बाद पहुंची, इसलिए उन्हें बिना पर्चा भरे ही बैरंग वापस लौटना पड़ा। शाम होते-होते जब बाकी दलों को बसपा प्रत्याशी के परचा ना भरने का कुछ एहसास हुआ तो कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुजफ्फर ने अपने प्रत्याशी के लिए पर्चा लेने की कोशिश की। लेकिन उन्हें जिला प्रशासन ने यह कह कर नॉमिनेशन फार्म नहीं दिया कि उसका समय दोपहर 11 बजे तक था। तत्पश्चात कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने एक निर्दलीय प्रत्याशी जयवीर उर्फ जोनी का संयुक्त मोर्चे के प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल करवा दिया। मुज़फ्फ़र के मुताबिक उनके संयुक्त मोर्चे के पास लगभग 34 के आसपास पंचायत सदस्य हैं भाजपा के पास सिर्फ 14 सदस्य हैं। बता दें कि सहारनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के मांगेराम चौधरी मैदान में हैं।

वहीं राजधानी दिल्ली से सटे जिला गाजियाबाद में समाजवादी पार्टी और लोकदल ने अपने प्रस्तावक को भाजपा द्वारा होटल में कैद करके रखने का गंभीर आरोप लगाया है। जबकि भाजपा प्रत्याशी ममता त्यागी का नामांकन करवाने गाजियाबाद से सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह खुद पहुंचे थे। वी.के सिंह ने कहा है कि बेशक कुल 14 सीटों में से भाजपा के पास दो अपनी और एक का निर्दलीय समर्थन है लेकिन फिर भी समीकरण उनके पास में हैं।

वहीं झांसी में समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि उनकी प्रत्याशी आशा कमल गौतम को भाजपा ने सत्ता के बल पर पुलिस की मदद से पार्टी सदस्यों को नामांकन करने के लिए आने से पहले ही रोक लिया गया। प्रस्तावक व अनुमोदक के झांसी न पहुंचने के कारण सपा प्रत्याशी आशा कमल का नामांकन ही नहीं हो सका, इस प्रकार जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर भाजपा के पवन गौतम निर्विरोध निर्वाचित हो ही चुके हैं।

छह सीटों पर निरस्त हुए नामांकन


जिन छह प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त हुए, उनमें मुजफ्फरनगर, अमरोहा, वाराणसी व गोरखपुर से एक-एक व बांदा से दो शामिल हैं। वाराणसी में समाजवादी पार्टी की चंदा यादव का नामांकन पत्र खारिज हो गया। बांदा में भी प्रशासन ने सपा-बसपा प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिए हैं जिसके बाद वहां भी बीजेपी का जिलाध्यक्ष बनना तय हो गया है।

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है। और इन सीटों को जीतने के लिये पार्टी साम, दाम दंड सब अपना रही है। भाजपा का लक्ष्य राज्य के 75 में से क़रीब 60 जिलों में अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने पर है। जिसमें से 17 प्रत्याशियों को निर्विरोध चुनवाकर भाजपा ने आधा मैदान मार ही लिया है। वहीं जिन सीटों पर भाजपा-सपा प्रत्याशी के बीच सीधा मुक़ाबला है वहाँ पुलिस प्रशासन सपा प्रत्याशी के घरों, दुकानों संस्थानों पर बुलडोजर चलवाकर उन पर मुकाबले से हटने के लिये दबाव बना रहा है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)   

This post was last modified on June 27, 2021 7:01 pm

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