बीच बहस

मोदी और योगी के गुंडों से नहीं होगी लोकतंत्र की रक्षा

अभी पिछले दिनों लखीमपुर खीरी में ब्लॉक प्रमुख के चुनावों के पूर्व उसके नामांकन हेतु कुछ विपक्षी दलों की महिला प्रत्याशियों के साथ बीजेपी समर्थित गुँडों और विधायकों द्वारा पूर्व प्रायोजित, सुनियोजित व सामूहिकरूप से जो हैवानियत, दरिंदगी व नरपैशाचिक कुकृत्य किया गया, वह वर्णनातीत है। भारतीय पौराणिक कथाओं में महाभारत कथा में हस्तिनापुर राज्य के अधिपति धृतराष्ट्र की भरी-पूरी सभा में हजारों लोगों के सामने, जिसमें तत्कालीन अनेक सम्मानित व शारीरिक तथा बौद्धिक दृष्टिकोण से बहुत ही बलिष्ठ, सुसंस्कृत, महान और कालजयी महापुरुषों यथा भीष्म पितामह, गुरू द्रोणाचार्य, गुरू कृपाचार्य, महानीतिज्ञ महात्मा विदुर तथा पाँचों पांडवों यथा कथित धर्मराज युधिष्ठिर, महाबली भीम, सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन आदि महारथियों के सामने एक अबला, असहाय महिला, जिसको उसका पति ही जुए में हार गया था, उस कृष्णसखा द्रौपदी की स्त्रीजन्य अस्मिता और इज्जत पर एक कौरव, कुल कलंक दुःशासन जो जुए में विजेता पक्ष की तरफ से दुर्योधन के आदेश पर स्त्री की मान-मर्यादा और उसकी अस्मता को तार-तार और धूलधूसरित करके रख दिया, उस नरपशु, निराधम, पापी, अधम, पिशाच, हैवान व दरिंदे दुःशासन को जब तक मानव सभ्यता रहेगी, तब तक वह एक नरपशु, निराधम, पापी, अधम, पिशाच, हैवान व दरिंदे के रूप में ही याद किया जाता रहेगा।

परन्तु आज 21 वीं सदी के आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के युग में भारत के स्वतंत्रता के 74 वर्षों उपरांत लखीमपुर-खीरी जिले में घटी हतप्रभ व मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना में कई दुःशासनों द्वारा मिलकर कानून के कथित रखवाले सैकड़ों पुलिस के जवानों व उनके अफसरों के सामने जिस स्त्री के  साथ सार्वजनिक रूप से अकथनीय जुल्मोसितम, वस्त्र हरण, चीरहरण, साड़ी खोलने और उसकी ब्लाउज फाड़ने का दुष्कर्म, दुष्कृत्य व दुःसाहस किया गया, वह स्त्री न तो अपने पति द्वारा जुए में हारी हुई स्त्री थी, न अबला और कमजोर थी। वह एक राजनैतिक दल द्वारा समर्थित सुयोग्य उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन भरने के लिए आई हुई थी। यक्ष प्रश्न है कि यह दुष्कर्म अचानक किसी गली-मुहल्ले के गुँडों के समूह द्वारा नहीं किया गया।

अपितु मानवता की नजरों में यह कालातीत, अत्यंत घृणात्मक कुकर्म और कुकृत्य कथित रूप से एक बहुत ही सभ्य, सुसंकृत,शालीन,भारतीय सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों की कथित रक्षक, अनुशासित राजनैतिक दल के एक मठाधीश मुख्यमंत्री व उसके सबसे सुप्रीम नेता के गोपनीय निर्देशानुसार संचालित व कार्यान्वित की गई, क्योंकि इस बेशर्म घटना के तुरंत बाद जब सारा देश इस दुःखद व बेशर्म कुकर्म की तीव्र भर्त्सना कर रहा था, लगभग उसी समय वर्तमान समय में दिल्ली की सत्ता पर सत्तासीन, कथित हिन्दू हृदय सम्राट, सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा प्रधानसेवक इस अकथनीय कुकृत्य की भर्त्सना करना तो दूर उत्तर प्रदेश के अपने दल के करिंदों, पुलिस के बड़े अफसरों और प्रशासनिक अफसरों को अपने दल के प्रत्याशियों की सफलता के लिए आभार जताते हुए, यह कह रहा था कि ‘मैं उत्तर प्रदेश के अपने सभी लोगों को इस चुनाव को शांतिपूर्वक ढंग से कराने के लिए धन्यवाद देता हूँ ‘ इससे ज्यादे बेशर्मपना और अश्लीलतापूर्ण बयान की कल्पना ही की जा सकती है।

इतने अपराधिक, बेशर्म, नीच, सार्वजनिक रूप से स्त्रियों की मान-मर्यादा और इज्जत को गुँडों और अपराधियों द्वारा तार-तार करने और अश्लीलता भरी घटनाओं को नजरंदाज करते हुए उसे शांतिपूर्ण उपमा से सुशोभित कर देना मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परिभाषा में शिष्टता, मर्यादा और सुचिता के रूप में भले ही आता हो, आम सामान्य भारतीय समाज में इस शब्द ‘शांतिपूर्वक’ की तीव्र भर्त्सना के अलावा अन्य कोई विकल्प ही नहीं है। इस देश, इस समाज और इस राष्ट्र राज्य के सामने अब मुख्य समस्या मुँह बाए खड़ी है कि आज के इन दुःशासनों, दुर्योधनों, धृतराष्ट्रों से कैसे निपटा जाएगा, इन मेघनादों, कुंभकर्णों और रावणों का सर्वनाश कब होगा, कौन करेगा, कितनी जल्दी करेगा?

अयोध्या में राम मंदिर बनाने में इन तथाकथित रामभक्त सत्ताधारियों का कोई श्रद्धाभाव और उनके जैसे प्रजावत्सलता वाली भावना सिरे से गायब है, अपितु अयोध्या में मंदिर बनाने का इनका एकमात्र उद्देश्य और मिशन केवल और केवल भारत की आम जनता में यह संदेश देना है कि ‘देखो ! हमने मुसलमानों की एक मस्जिद को ध्वस्त करके उसी स्थान पर राम का एक भव्य मंदिर बनवा दिया’, जिससे इस देश के बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय में यह संदेश जाय कि ये वर्तमान समय के सत्ता के कर्णधार राम के परम् भक्त हैं और मलेच्छ मुसलमानों को उनकी औकात खूब ठीक से बता दिया ताकि इनका बहुसंख्यक हिन्दू वोटबैंक सुरक्षित हो जाय और सत्ता पर बने रहने की इनकी अक्ष्क्षुण राक्षसी भूख, विलासितापूर्ण और ऐश्वर्यशाली जीवन जीने की एक उत्कट मोह की भी पूर्ति होती रहे।

प्रश्न है जो दल जै श्रीराम शब्द बोलकर या वंदेमातरम् न बोलने वाले पर अपने गुँडे समर्थकों से निरपराध, बेकसूर, गरीब, युवाओं, पशुव्यापारियों, किसानों, मजदूरों और लोगों की तड़पा-तड़पाकर हत्या करवा रहा हो,जिस दल का एक साँसद एक ऐसे बलात्कारी, गुँडे, माफिया विधायक के जन्मदिन पर जेल में मुबारकबाद देने पहुंच जाता हो, जिस दल का एक चरित्रहीन व दरिंदा विधायक अपने एक पड़ोसी बहन सरीखी लड़की से वर्षों बलात्कार करता रहा हो, जिसके बाप सहित उसके कई परिजनों की जेल से ही अपने गुँडों की मदद से पीट-पीटकर और ट्रक चढ़ाकर जघन्यतम् तरीके से हत्या करा देता हो, जिस दल के मंत्री ऐसे हों जो एक कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार पुलिस अफसर के हत्यारे का जेल से जमानत होने पर जेल के गेट पर फूलमालाओं से स्वागत करता हो,

जो अपने मुख्यमंत्रित्व काल में अपने राज्य में फर्जी साजिश रचकर, ट्रेन में स्वयं आग लगाकर अपने ही लोगों को जलाकर मरवाकर उसका दोष किसी और धर्म मानने वालों पर मढ़कर दंगे कराकर हजारों बेकसूर लोगों को जिंदा जला देता हो, हजारों युवतियों से बलात्कार करवाता हो, गर्भवती महिलाओं के पेट को फाड़कर उनके गर्भस्थ शिशुओं का सार्वजनिक प्रदर्शन करवाता हो, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुजरात दंगों की पुनरावृत्ति करवाकर सैकड़ों युवाओं, बुजुर्गों व महिलाओं की हत्या करवाता हो या जिन्दा जलवा देता हो, चुनाव से ठीक पूर्व अपने ही 44 जवानों को पूर्वप्रायोजित तरीकों से पुलवामा में बम विस्फोट कराकर हत्या करवा देता हो। अचानक लॉकडाउन और नोटबंदी लागूकर हजारों मजदूरों,व्यापारियों व आम जन की हत्या कर देता हो,इस देश के अन्नदाताओं द्वारा अपनी उपजाई गई फसल की कम से कम मूल्य पाने के अधिकार को,जिससे अन्नदाताओं का भी जीवनयापन हो सके, उस कानून बनाने की माँग को पिछले सात महीनों से लटका रखा हो, जिसमें अब तक 500 से भी ज्यादे हमारे अन्नदाता शहीद हो जाते हों।

श्रमसुधार के नाम पर मजदूरों का कार्यसमय 12 घंटे करने और उनके सारे अधिकार छीनने का भेदभावपूर्ण कानून बनाने वाले कुकृत्य बगैर शर्म के लागू करवा देता हो। उस सीबीआई जज की हत्या कर दिए जाने का षड्यंत्र रचता हो,जो उसको और उसके साथी को गुजरात दंगों में निर्दोष साबित करने में बाधक बन रहा हो। देश की जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए खुद की हत्या करने की कहानी गढ़ने के लिए रोना विल्सन नामक सामाजिक कार्यकर्ता के कंप्यूटर को मालवेयर या चोर सॉफ्टवेयर के जरिए हैक करके उसमें फर्जी फाइल डालकर उसी के आधार पर उसको तथा उसके अन्य 15 साथियों को गिरफ्तार करके पिछले दो सालों से जेल में ठूँस रखा हो, उस राजनैतिक दल के मुखिया, कथित प्रधानसेवक, प्रधानमंत्री से शालीनता, सभ्यता, मानवीयता और सदाचार की उम्मीद करना ही बेमानी और व्यर्थ है। 

 इस देश में वास्तविकता यह है कि कुछ कम्युनिस्ट राजनैतिक दलों को छोड़कर शेष सारे राजनैतिक दल सत्ता के महालोभियों महाभ्रष्टों, लुटेरों, मॉफियाओं, दंगाइयों, सुविधाभोगियों, विलासियों, शोषकों, दलबदलुओं, आमजन-किसानों-मजदूरों विरोधी नीतियों के प्रबल पक्षधर, पूंजीपतियों के दलालों के जमावड़े के अलावे कुछ नहीं हैं, इन कथित दलों में कोई सैद्धांतिक मतभेद नहीं है। इनका एक ही सिद्धांत है, आम जनता, किसानों, मजदूरों को जितना हो सके,निचोड़ो-निचोड़ो और निचोड़ो, इसके ठीक विपरीत अपने पूँजीपतियारों और मित्रों को अधिकतम् सुविधाएं दो, उनके लिए खरबों रूपयों लिए लोन को और टैक्स के पैसों को प्रतिवर्ष एनपीए मतलब नॉन परफार्मिंग एसेट के चोर दरवाजे से माफ देना ही है। ऐसे आतततायी, निकम्मे, क्रूर,फॉसिस्ट, अमानवीय, हिंसक, असहिष्णु शासकों को उखाड़ फेंकने के लिए इस देश के सभी प्रबुद्ध और संजीदे लोगों को अब अपनी जाति,धर्म, मजहब आदि के कृत्रिम भेदभाव को भुलाकर, संगठित, सशक्त, एकजुट होकर और जोरदार ढंग से प्रबलतम् विरोध करना ही चाहिए, क्योंकि अब इस देश में विपक्षी राजनैतिक दलों से कोई उम्मीद करना रेत से तेल निकालने वाले दिवास्वप्न के अलावे कुछ नहीं है। 

    (निर्मल कुमार शर्मा गौरैया एवं पर्यावरण संरक्षक और स्वतंत्र लेखक हैं और आप आजकल गाजियाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on July 17, 2021 12:12 pm

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