Thursday, March 23, 2023

ट्रिब्यूनलों के विधिवत गठन तक हाईकोर्ट करेंगे डीआरटी, डीआरएटी के समक्ष दायर मामलों की सुनवाई

जेपी सिंह
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जब तक ट्रिब्यूनलों में सदस्यों की नियुक्ति करके उनका विधिवत गठन नहीं होता तब तक विभिन्न हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत डीआरटी, डीआरएटी के समक्ष दायर आवेदनों पर विचार करेंगे। एक बार ट्रिब्यूनल का गठन हो जाने के बाद, मामलों को ट्रिब्यूनल में वापस लाया जा सकता है। यह आदेश पारित करते हुए उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि यह हमारे ध्यान में लाया गया था कि डीआरटी, डीआरएटी में सदस्यों की नियुक्ति न करने के संबंध में समस्याएं हैं। फिलहाल, हम उच्च न्यायालयों से अनुरोध करते हैं कि वे अनुच्छेद 226 के तहत डीआरटी, डीआरएटी के समक्ष दायर आवेदनों पर विचार करें। एक बार ट्रिब्यूनल का गठन हो जाने के बाद, मामलों को ट्रिब्यूनल में वापस लाया जा सकता है।

यह विशिष्ट याचिका मध्य प्रदेश बार काउंसिल द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के 9 जुलाई के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने डीआरटी जबलपुर के अधिकार क्षेत्र को डीआरटी लखनऊ से जोड़ने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा कि एक खोज और चयन समिति का गठन किया गया है और नियुक्तियों को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

स्टेट बार काउंसिल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता व अधिवक्ता सिद्धार्थ गुप्ता व मृगंक प्रभाकर ने बताया कि डीआरटी जबलपुर के समक्ष नियमित सुनवाई नहीं हो रही है।इस बिंदु पर, केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) जबलपुर ने बड़ी संख्या में मामलों को देखते हुए इस मुद्दे को उठाने से इनकार कर दिया था।

इस पर चीफ जस्टिस रमना ने कहा कि मैं समिति के सदस्यों से प्रक्रिया में तेजी लाने और छुट्टी के समय में इसे पूरा करने के लिए कहूंगा। जस्टिस राव ने पाया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान केवल तारीखें दी जा रही थीं, जो न्याय तक पहुंच का उल्लंघन है। इसके बाद चीफ जस्टिस रमना ने कहा कि हम नियुक्तियों में तेजी लाने के लिए समिति को कुछ समय के लिए अनुमति देंगे। उच्च न्यायालयों को फिलहाल इन आवेदनों पर विचार करने दें और उस समय तक सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी और मामले ट्रिब्यूनल में वापस जा सकते हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 2019 में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) में नियुक्ति के लिए 41 नामों की सिफारिश की गई थी और केवल 22 को मंजूरी दी गई है। पीठ ने तब नोट किया कि 28 सिफारिशें थीं और पूछा कि अन्य 6 पर क्या स्थिति है। एजी वेणुगोपाल ने कहा कि पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद 6 नामों को मंजूरी नहीं दी गई थी। चीफ जस्टिस ने तब कहा कि अपने अधिकारियों से कहें कि वे 22 को तुरंत नियुक्ति आदेश जारी करें और 6 नामों के कारण इसमें देरी न करें। पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख तक बाकी 6 नामों की नियुक्ति न करने का कारण भी पूछा। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी।

इसके पहले जुलाई 21 में उच्चतम न्यायालय ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स ऑर्डिनेंस 2021 के प्रावधानों को पलटते हुए केंद्र से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल में सभी रिक्तियों को बिना देरी के भरा जाए। दरअसल, ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स ऑर्डिनेंस 2021 के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न ट्रिब्यूनल के सदस्यों का कार्यकाल चार साल तय किया गया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव ने अपने फैसले में कहा कि सदस्यों और अध्यक्षों की बड़ी संख्या में रिक्तियां और उन्हें भरने में होने वाली अत्यधिक देरी के कारण न्यायाधिकरणों का नुकसान हो रहा है। जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट ने अपने सहमति वाले फैसले में कहा कि यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार तेजी से और प्रभावी न्याय वितरण सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों की प्रक्रिया में तेजी लाए।

जस्टिस राव ने कहा कि, “सदस्यों और अध्यक्षों की बड़ी संख्या में रिक्तियां और उन्हें भरने में अत्यधिक देरी के कारण न्यायाधिकरणों का नुकसान हो रहा है। न्यायाधिकरण का मुख्य कार्य जो त्वरित न्याय प्रदान करना है, वो नहीं हो पा रहा है क्योंकि न्यायाधिकरण असहनीय भार के कराण मुरझा रहे हैं। निस्संदेह, विधायिका कानून बनाने के लिए अपनी शक्ति का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है और नीतिगत मामलों को तय करने के लिए कार्यपालिका सबसे अच्छी न्यायाधीश है। हालांकि, यह उचित समय है कि एक गंभीर प्रयास किया जाए यह सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधितों द्वारा किया जाता है कि ट्रिब्यूनल में सभी रिक्तियों को बिना देरी के भरा जाता है। न्याय तक पहुंच और ट्रिब्यूनल द्वारा प्रशासित निष्पक्ष न्याय में वादी जनता का विश्वास बहाल करने की आवश्यकता है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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