Monday, August 8, 2022

अग्निपथ योजना पर विशेष: अब सेना में होगी अंबानी और अडानी बटालियन

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असुरक्षा एक स्थायी भाव-बोध है जिसे आरएसएस भाजपा और नरेंद्र दामोदार दास मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ऐन केन प्रकारेण देश के तमाम नागरिकों में मैनिपुलेट करने के तमाम जतन अपनी योजनाओं, नीतियों, अनीतियों, गुप्त एजेंडों के मार्फत करती आ रही है। कभी ये पाकिस्तान का ख़ौफ़ दिखाकर, कभी इस्लाम का ख़ौफ़ दिखाकर, कभी अर्बन नक्सलवाद का ख़ौफ़ देकर, कभी बुलडोजर से ज़िंदग़ी भर की कमाई नेस्तनाबूत करके, कभी यूएपीए, कभी राजद्रोह क़ानून लगाकर, कभी आंदोलनकारियों का अपराधीकरण करके चौराहों पर उनकी तस्वीरें टांगकर उनके घरों की कुर्की भेजकर, कभी जबर्दस्ती वीआरएस देकर, कभी सरकारी सेवाओं और कंपनियों की निजी हाथों में औने पौने दाम नीलामी करके, कभी छात्रों पर हमले करवाकर, कभी मुस्लिमों की लिंचिंग करवाकर, कभी बलात्कारियों के समर्थन में तिरंगा यात्रा निकालकर वो ये काम करती आ रही है। महंगाई और बेरोज़गारी दर बढ़ाना भी इसी का हिस्सा है। अब तय अवधि नौकरी (FTE) के जरिये सरकार नौजवानों में असुरक्षा बोध बढ़ा रही है। इसकी शुरुआत सरकार ने फौज से किया है। जहां अग्निपथ योजना के तहत महज चार साल के लिये अग्निवीरों की भर्ती की जायेगी। अग्निपथ योजना को समाज का अलग-अलग तबका किस तरह देख-समझ रहा है इस पर एक रिपोर्ट-

स्वतंत्र पत्रकार आशीष आनंद अग्निपथ योजना पर कहते हैं कि अग्निपथ FTE का प्रयोग है। मार्च 2018 में इसका गजट पास हुआ था। तब केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पेश किया था। इसको ट्रेड यूनियनों ने एक हद तक समझा और विरोध किया, लेकिन सुनने को कोई तैयार ही कहां है। ट्रेड यूनियनों की वजह से शायद पहले उन जगहों पर इसे नहीं लाया गया, जहां यूनियनें हैं। इसे लाया गया है सेना में।FTE क्या है इसे और स्पष्ट करते हुये आशीष आनंद बताते हैं कि फिक्स्ड टर्म एंपलॉयमेंट यानी तय अवधि रोजगार। यह व्यवस्था अभी बाकी सेक्टर में भी लागू होना है। जिनको भाजपा इसलिए चाहिए थी कि आरक्षण खत्म हो जाए, उनकी हसरत भी पूरी होगी, लेकिन इस हसरत के साथ मिलेगा FTE। अग्निपथ योजना असल में शाखावीरों के लिए है। चार साल की मिलिट्री ट्रेनिंग के बाद वे समाज में जो करेंगे, ‘गेस्टापो’ याद आएगा।

साहित्यकार कृष्ण कल्पित अग्निपथ योजना के पीछे की साजिश को यूं उजागर करते हैं और दावा करते हैं कि अग्निपथ योजना सरकारी ख़र्चे पर कार्पोरेट के लिये सुरक्षा गार्ड तैयार करना है। अग्निपथ योजना के तहत चार साल सरकार सिर्फ़ अग्निवीरों में निवेश करेगी और चार साल बाद जब उन्हें निकाल बाहर करेगी तो ये अग्निवीर कार्पोरेट की ग़ुलामी करेंगे। कृष्ण कल्पित आगे अग्निवीर शब्द की अर्थवत्ता पर सवाल खड़े करते हुये कहते हैं कि अग्निवीर व्याकरण की दृष्टि से ग़लत शब्द है!  ये कथित अग्निवीर अग्नि लगाएंगे या अग्नि में झुलसेंगे या अग्नि को बुझायेंगे, कुछ स्पष्ट नहीं है। एक मनुष्य को अग्निवीर कहना उचित नहीं। यह मनुष्यता का अपमान है। यह हमारे युवाओं का अपमान है। वे जलने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। जब यह अग्निवीर बिना पेंशन के चार साल बाद जीवित लौटकर अगर अपने गांव आयेगा तो लोग मज़ाक में कहेंगे देखो अग्निवीर जा रहा है !

पेशे से शिक्षक शशि पटेल अग्निपथ का नाम सुनते ही झल्लाकर कहते हैं सरकार एक एक करके सारी सरकारी कंपनियां, सरकारी कल कारखाने, सरकारी सेवाओं, सरकारी संपत्तियों को बेंच दे रही है। जबकि ये सारी चीजें सरकार के लिये आय का साधन होती हैं। सरकार के खर्चे इनसे चलते थे। आप सिर्फ़ टैक्स बढ़ाकर सब कुछ सुचारू तरीके से नहीं चला सकते। अब सब कुछ बेंच देने के बाद सरकार पर अपने ख़र्चे कम करने का दबाव है। इसीलिये सेना का निजीकरण किया जा रहा है। अग्निपथ योजना सेना के निजीकरण की ओर पहला क़दम है।

रिटायर्ड फौजी नीलेश सिंह राजपूत कहते हैं कि सैनिकों को संविदाकर्मी बनाने की मुहिम है अग्निपथ योजना। इसके बाद धीरे से सेना का निजीकरण कर दिया जायेगा। अभी आप जो मराठा बटालियन, राजपूत बटालियन, गोरखा बटालियन आदि तरह तरह के बटालियन सेना में सुनते आये हैं आने वाले दिनों में आप अडानी बटालियन, अंबानी बटालियन के नाम से सुनेंगे। फिर जैसे प्राइवेट कंपनियों में किसी हादसे में मजदूरों के मरने पर परिजनों को ठेंगा दिखा दिया जाता है और कोई मुआवजा नहीं दिया जाता उसी तरह दुश्मन देश के सैनिकों और आतंकियों के हाथों शहीद होने पर सैनिकों के परिजनों को भी ठेंगा दिखा दिया जायेगा। 

नीलेश सरकार के मंसूबे को उजागर करते हुए कहते हैं दरअसल सरकार चाहती तो है कि लोग सेना में आयें और कुर्बानी दें लेकिन बदले में सरकार से कुछ न लें। अगर ये सरकार यूं ही कुछ दिन और बनी रही तो ये यह नियम भी बना सकते हैं कि हर नौजवान पढ़ाई के समय दो-तीन साल सेना को देगा तभी सर्टिफिकेट मिलेगा। या कि इजरायल, रूस, कोरिया, ईरान आदि देशों की तर्ज़ पर अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दिया जाय और राष्ट्रवाद के नाम पर ये सेवा मुफ्त में ही ली जाये।

समाजिक कार्यकर्ता मैमुना अब्बास मुल्ला अग्निपथ को विनाशपथ बताते हुये युवा विरोधी करार देती हैं। वो कहती हैं कि अग्निपथ रोज़गार के नाम पर बेरोज़गारों के ज़ख़्म पर नमक छिड़कने जैसा है। अग्निपथ फ़ौज का निजीकरण और ठेकाकरण है। इसलिए देश की सुरक्षा और नौजवानों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले अग्निपथ के ख़िलाफ़ देशव्यापी रोष जारी है। इस का जवाब सरकार कैसे दे रही है? लेकिन शर्मनाक। 

पेशे से खांटी किसान कुंअर बहादुर पटेल अग्निपथ योजना को कोढ़ में खाज बताते हैं। वो कहते हैं किसानों के बच्चों के लिये सरकारी नौकरी का एक ही तो सहारा था- फौज। इस सरकार ने वो भी छीन लिया। पहले सरकार ने कृषि क़ानून बनाकर हमारी फसलें, हमारे खेत खलिहान छीनने की कोशिश की थी लेकिन 1 साल तक चले किसान आंदोलन के आगे सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। अब सरकार ने अग्निपथ योजना लाकर किसानों की लाठी पर हमला किया है। उनके बच्चों की रोजी पर हमला किया है।   

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)    

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