Thu. Aug 22nd, 2019

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: यह फर्स्ट अपील है, 1949 से अब तक के सभी साक्ष्य करने होंगे पेश

1 min read

अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय में सप्ताह में पांच दिन रोजाना के आधार पर सुनवाई हो रही है। राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद में सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को हिंदू और मुस्लिम पक्षों से अपने दावे के पक्ष में सबूत पेश करने को कहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह 70 साल पुराने इस मामले में अब तक मिले सबूतों की नए सिरे से जांच करेगा। 1949 से अब तक के सभी साक्ष्य पेश करने होंगे।
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि सबको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि उच्चतम न्यायालय इस मामले की सुनवाई फर्स्ट अपील के तौर पर कर रहा है, ऐसे में न्यायालय के सामने सभी साक्ष्य पेश करने होंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से उच्चतम न्यायालय प्रभावित नहीं होगा। यह कोई स्पेशल लीव अपील नहीं है, जो आम तौर पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की जाती है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने आज तीसरे दिन लगातार इस को मामले की सुनवाई की। इस दौरान निर्मोही अखाड़े ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ पूरी 2.77 एकड़ जमीन पर अपना दावा पेश किया है। इस पर कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े से इस दलील के पक्ष में सबूत देने को कहा। पीठ ने कहा कि विवादित ढांचे की देखभाल का दावा करने वाले निर्मोही अखाड़े ने 22-23 दिसंबर 1949 के बाद मूर्तियों की पूजा के लिए ‘सेवायत’ होने का दावा किया है। ऐसे में उन्हें जमीन के राजस्व भुगतान या अकाउंट की जानकारी जैसे दस्तावेज पेश करने चाहिए। पीठ ने कहा कि ऐसे सबूत आपके पक्ष को मजबूत कर सकते हैं। इसके जवाब में निर्मोही अखाड़े ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप हमें राम जन्मभूमि से जुड़े असली दस्तावेज दिखाएं। जिसके बाद निर्मोही अखाड़े के वकील ने जवाब दिया कि सभी दस्तावेज इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजमेंट में दर्ज हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन से कहा कि यहां सबको इस बात का पता होनी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई पहली अपील के तौर पर कर रहा है, ऐसे में कोर्ट के सामने सभी साक्ष्य पेश करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित नहीं होगा। यह कोई स्पेशल लीव अपील नहीं है, जो आम तौर पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की जाती है।
पीठ ने गुरुवार को अयोध्या विवाद के एक पक्षकार ‘राम लला विराजमान’ के वकील के. परासरन से पूछा कि किसी देवता के जन्म स्थान को कानून की दृष्टि से कैसे व्यक्ति माना जा सकता है। पीठ ने कहा कि जहां तक हिंदू देवताओं की बात है तो उन्हें कानून की दृष्टि से व्यक्ति माना गया है, जो संपत्ति और संस्थाओं के मालिक हो सकते हैं और मुकदमा भी कर सकते हैं। लेकिन क्या उनके जन्म स्थान को भी कानूनी तौर पर व्यक्ति माना जा सकता है और इस मामले में एक पक्षकार के रूप में क्या राम जन्मस्थान कोई वाद दायर कर सकते हैं? पीठ ने परासरन से जानना चाहा कि क्या जन्म स्थान को कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है? जहां तक देवताओं का संबंध है तो उन्हें कानूनी व्यक्ति माना गया था।
पीठ के इस सवाल के जवाब में परासरन ने कहा कि हिन्दू धर्म में किसी स्थान को उपासना के लिए पवित्र स्थल मानने के लिए वहां मूर्तियों का होना जरूरी नहीं है। हिन्दूवाद में तो नदी और सूर्य की भी पूजा होती है और जन्म स्थान को भी कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है।

अयोध्या मामले में देवता की ओर से दायर वाद में भगवान राम के जन्म स्थान को भी एक पक्षकार बनाया गया है। इस पर पीठ ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के एक फैसले का जिक्र किया जिसमे पवित्र गंगा नदी को एक कानूनी व्यक्ति माना गया है, जो मुकदमे को आगे बढ़ाने की हकदार हैं। इसके बाद पीठ ने परासरन से कहा कि दूसरे बिन्दुओं पर अपनी बहस आगे बढ़ाएं।
परासरन ने आरोप लगाया कि राम लला विराजमान की मूर्ति को उस समय पक्षकार नहीं बनाया गया जब मैजिस्ट्रेट ने विवादित स्थल को कुर्क किया और जब दीवानी अदालत ने इस मामले में रिसीवर नियुक्त करके निषेधात्मक आदेश दिया था। जन्म स्थान के महत्व का जिक्र करते हुए परासरन ने संस्कृत के श्लोक ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी’ को पढ़ा और कहा कि जन्म स्थान स्वर्ग से भी महान है।
( जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और प्रयागराज में रहते हैं।)

देश दुनिया की अहम खबरें अब सीधे आप के स्मार्टफोन पर Janchowk Android App

Donate to Janchowk
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people start contributing towards the same. Please consider donating towards this endeavour to fight fake news and misinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

Leave a Reply