बीच बहस

शुभेंदु अधिकारी से तुषार मेहता की भेंट से उठा हितों के टकराव का सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के आवास पर मुलाकात के लिए जाने की खबर सामने आने के बाद पूरा मामला अब न केवल राजनीतिक रंग लेता जा रहा है बल्कि न्यायिक शुचिता, आचार संहिता और हितों के टकराव का भी मामला उसी तरह बनता जा रहा है जैसा कि उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सीबीआई के तत्कालीन निदेशक रंजीत सिन्हा पर यह इल्ज़ाम लगा दिया था कि वह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दायरे में आने वाली टेलिकॉम कंपनियों के आला अधिकारियों से अपने सरकारी आवास पर मिलते थे, और इस तरह जाँच के साथ समझौता किया जा रहा है।

बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पूरे मामले पर हमलावर रुख अख्तियार करते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर तुषार मेहता को पद से हटाने की मांग की है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह साफ कर दिया कि शुभेंदु अधिकारी उनके आवास पर आए जरूर थे, लेकिन वह उनसे नहीं मिले। लेकिन तुषार मेहता के दिए इस बयान पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि शुभेंदु अधिकारी के साथ गुप्त बैठक खारिज करने का उनका यह प्रयास तभी सार्थक माना जा सकता है जब वे शुभेंदु के घर में रहने तक के सभी सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक नहीं कर देते हैं। क्या तुषार मेहता शुभेंदु के घर में रहने तक के सभी सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करेंगे? 

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी के काफिले को तुषार मेहता के आवास से निकलते हुए शुक्रवार को एक वीडियो के जरिये ट्वीट किया है। इसके साथ ही, उन्होंने सवाल किया कि क्या वे बिना पूर्व एप्वाइंटमेंट के ही सॉलिसिटर जनरल के आवास पर मौजूद थे?

एक अन्य ट्वीट में अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि शुभेंदु अधिकारी का काफिला ऑफिसर्स की मौजूदगी में प्रवेश किया और करीब 30 मिनट तक वे वहां पर रुके। क्या इसका मतलब यह है कि एक बैठक वास्तव में होने वाली थी? जैसे-जैसे यह एपिसोड अधिक अस्पष्ट होता जाता है, कोई केवल यह आशा कर सकता है कि सच्चाई सामने आएगी।

तुषार मेहता पर नारद मामले और सारदा चिट फंड घोटाला मामले में आरोपी भाजपा नेता सुभेंदु अधिकारी के साथ उनकी मुलाकात का आरोप लगाया गया है। सीबीआई और ईडी इसकी जांच कर रही है। पीएम मोदी को लिखे लेटर में टीएमसी के सांसदों ने मेहता की अधिकारी के साथ कथित मीटिंग को ‘हितों का टकराव’ करार दिया है।टीएमसी ने मांग की है कि इस मामले में मेहता को देश के शीर्ष वकील के पद से हटाया जाना चाहिए। 

टीएमसी के इन आरोपों पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सफाई दी है। उन्‍होंने कहा है कि शुभेंदु  बिना जानकारी दिए, कल 3 बजे के आस पास मेरे आवास-कम-ऑफिस में आए थे। चूंकि मैं अपने-अपने चैंबर में निर्धारित बैठक में व्‍यस्‍त था, मेरे स्‍टाफ ने उनसे ऑफिस के वेटिंग रूम में बैठने का आग्रह किया और उन्‍हें चाय ऑफर की थी। उन्‍होंने कहा कि जब मेरी मीटिंग खत्‍म हो गई तो मेरे स्‍टाफ (पर्सनल सेक्रेटरी) ने मुझे उनके (शुभेंदु के) आगमन के बारे में जानकारी दी। मैंने स्‍टाफ से, उनसे (शुभेंदु से) मिलने को लेकर मेरी असमर्थता जताने और इंतजार करने के लिए माफी मांगने को कहा था। शुभेंदु अधिकारी ने मेरे पीपीएस को धन्‍यवाद दिया था और मुझसे मिलने का आग्रह किए बिना ही चले गए थे। ऐसे में उनसे मीटिंग का सवाल ही कहां उठता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टीएमसी नेता डेरेक ओ’ ब्रायन, सुखेंदु शेखर रॉय और महुआ मोइत्रा ने पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि भारत का सॉलिसिटर जनरल भारत के महान्यायवादी के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा कानून अधिकारी है और भारत सरकार और उसके विभिन्न अंगों को नारद और शारदा मामलों जैसे महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में सलाह देता है। एक आरोपी के बीच इस तरह की बैठक गंभीर रूप से ऐसी जांच एजेंसियों को सलाह देने वाले सॉलिसिटर जनरल के साथ, जिनके द्वारा उक्त आरोपी की जांच की जा रही है, भारत के सॉलिसिटर जनरल के वैधानिक कर्तव्यों के साथ सीधे हितों के टकराव में है। ऐसी स्थिति में भारत के सॉलिसिटर जनरल जो सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में नारदा मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनका आरोपी से मिलना नतीजों को प्रभावित करने के लिए हो सकता है।

टीएमसी नेताओं ने सुभेंदु अधिकारी और एसजीआई तुषार मेहता के बीच बैठक पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया की प्रमुख लोगों द्वारा प्रसारित विभिन्न समाचार रिपोर्टों और ट्वीट्स पर भरोसा किया है। पत्र में लिखा गया है कि हमारे पास यह मानने के कारण हैं कि इस तरह की बैठक उन मामलों के परिणाम को प्रभावित करने के लिए आयोजित की गई है जहां सुभेंदु अधिकारी एक आरोपी हैं, जो सॉलिसिटर जनरल के उच्च पद का उपयोग कर रहे हैं। पत्र में इसके अलावा यह लिखा गया है कि सॉलिसिटर जनरल का यह कार्य न केवल अनुचित है बल्कि उनकी सत्यनिष्ठा पर भी प्रश्न भी खड़ा करता है और सॉलिसिटर जनरल के पद को कलंकित करता है।

पत्र में आगे लिखा गया है कि भारत के सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय की सत्यनिष्ठा और तटस्थता के रूप में लोगों के मन में किसी भी तरह का संदेह न पैदा हो इसके लिए तुषार मेहता को भारत के सॉलिसिटर जनरल के पद से हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि हितों के टकराव के आरोप लगने पर उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा को 2जी मामले की जांच से अलग रहने का आदेश पारित किया और सीबीआई के सबसे वरिष्ठ अधिकारी से मामले की जाँच संभालने के लिए कहा था। दरअसल प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करके सिन्हा पर यह इलज़ाम था कि वह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दायरे में आने वाली टेलिकॉम कंपनियों के आला अधिकारियों से अपने आवास पर मिलते थे। इसलिए सिन्हा को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की जांच से हटाया जाए।

उच्चतम न्यायालय में रंजीत सिन्हा के घर की विजिटर बुक को भी पेश किया गया था। इससे पता चला था कि सिन्हा के घर पर सिर्फ कॉरपोरेट वर्ल्ड के मशहूर लोग या नेता ही नहीं, बल्कि कई ऐसे लोगों का भी अक्सर आना-जाना था, जो छोटा-मोटा धंधा करते हैं, एजेंट हैं या रिटायर हो चुके हैं। सिन्हा के घर आने-जाने वालों का ब्योरा रखने वाली विजिटर्स लॉगबुक्स के मुताबिक, कई लोग साल भर में दर्जनों बार से ज्यादा और एक दिन में कई बार उनके घर जाते थे। सीबीआई के निदेशक के कुछ ऐसे मेहमान भी हैं, जो हमेशा किसी अन्य व्यक्ति के साथ रंजीत सिन्हा के घर जाते थे। ऐसे लोगों के नाम के साथ विजिटर्स रजिस्टर में ‘+1’ दर्ज है।

रंजीत सिन्हा के घर आने-जाने वालों में अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) के कई प्रतिनिधियों समेत कॉरपोरेट वर्ल्ड से जुड़े कई लोग शामिल थे। एस्सार ग्रुप के सुनील बजाज और अभय ओसवाल ग्रुप के अनिल भल्ला भी रंजीत सिन्हा के घर अक्सर आने-जाने वालों में शामिल थे। मई, 2013 और अगस्त, 2014 के बीच दोनों करीब 40-40 बार सिन्हा के घर आए। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में एस्सार सीबीआई जांच के घेरे में था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 3, 2021 12:56 pm

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