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Wednesday, August 4, 2021

माओवादियों पर हमेशा भारी पड़ने वाले जवान चुनावी सीजन में कमजोर क्यों पड़ जाते हैं?

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असम में भाजपा प्रत्याशी की गाड़ी में ईवीएम बरामद होने, और पश्चिम बंगाल में टीएमसी से पिछड़ती भाजपा की चर्चा और पांच राज्यों में 6 अप्रैल को मतदान से 3 दिन पहले कल 3 अप्रैल शनिवार को सुकमा जिले के जगरगुंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जोनागुड़ा गांव के करीब सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो जाती है जिसमें 22 जवानों के शहीद होने और 30 अन्य जवानों के घायल होने की जानकारी मिलती है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे बीजापुर-सुकमा जिले की सीमा पर जगरगुंड़ा थाना क्षेत्र (सुकमा जिला) के अंतर्गत जोनागुड़ा गांव के करीब नक्सलियों की पीएलजीए बटालियन तथा तर्रेम के सुरक्षा बलों के मध्य मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ तीन से चार घंटे तक चली थी।

इससे पहले शुक्रवार रात बीजापुर और सुकमा जिले से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कोबरा बटालियन, डीआरजी और एसटीएफ के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान के लिए रवाना किया गया था। इसमें बीजापुर जिले के तर्रेम, उसूर और पामेड़ से तथा सुकमा जिले के मिनपा और नरसापुरम से लगभग दो हजार जवान शामिल थे।

पहले इस घटना के दौरान 18 अन्य जवानों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। सुरक्षा बलों ने शनिवार को शहीद तीन जवानों के शवों और 17 अन्य जवानों (कुल 22 जवानों) के शवों को बरामद कर लिया है।

2019 में लोकसभा चुनाव (11 अप्रैल से 23 मई) से ठीक दो महीने पहले 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकवादी हमला होता है, जिसमें 40 CRPF जवानों की मौत हो गई थी। इससे पहले पठानकोट में 2 जनवरी 2016 को सेना के कैंप में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 7 जवानों की मौत हुई थी।

गौरतलब है कि ठीक इसी समय 2016 में भी असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल व पुदुच्चेरि विधान सभाओं के लिए चुनाव हुए थे।

पठानकोट के बाद 18 सितम्बर 2016 को जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर भी आतंकी हमला हुआ था जिसमें 16 जवान शहीद हो गए थे।

हमले के चार महीने के अंदर ही 2017 में भारत के पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हुए, और पंजाब छोड़ बाक़ी चारों राज्यों में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज़ की थी।

इतना ही नहीं दिसंबर 2017 में ही गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले 28 सितंबर को म्यांमार बॉर्डर पर एनएससीएन के उग्रवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई और इसे उग्रवादियों के खिलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक कहकर बहुप्रचारित किया गया। दिसंबर 2017 में हुए गुजरात व हिमाचल प्रदेश में भाजपा को सत्ता का लाभ मिला।

यहां एक बात और गौरतलब है कि उरी हमले और पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने कथित काउंटर स्ट्राइक का हौव्वा खड़ा करके जनमत को प्रभावित किया था। हालांकि उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक दोनों की विश्वसनीयता पर देश में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ थे।

अभी पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और असम में भाजपा प्रत्याशी की गाड़ी में ईवीएम मिलने के बाद देश की अवाम की नज़र में संदिग्ध होती भाजपा को सुकमा में नक्सल मुठभेड़ में मारे गये सैनिकों से विमर्श की दिशा बदलने में मदद मिलेगी, और अगर अगले दिन सुबह टीवी और अख़बारों में नक्सलियों पर काउंटर अटैक कर जवानों की शहादत का बदला लेने की ख़बर चल गई तो आश्चर्यचकित मत होइएगा।

(सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं।)

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