Friday, January 27, 2023

उत्तर प्रदेश बदलाव की राह पर 

Follow us:

ज़रूर पढ़े

उत्तर प्रदेश का चुनाव अपने आखिरी पड़ाव पर है। पहले तो यह लग रहा था कि सिर्फ पश्चिमी उ.प्र. में ही जहां किसान आंदोलन का असर है, समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोक दल का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी पर भारी पड़ेगा। हालाँकि चुनाव से बहुत पहले ही सपा मजबूत होती दिखाई पड़ने लगी थी, लेकिन यही माना जा रहा था कि नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार अन्य क्षेत्रों में कामयाब रहेगी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव पूर्व की ओर बढ़ा, अप्रत्याशित ढंग से एक मुद्दा – आवारा पशुओं का उठ गया, और प्रधान मंत्री तक को चौथे चरण के प्रचार में उन्नाव में कहना पड़ा कि यदि भाजपा की सरकार पुनः बनेगी तो सरकार गाय का गोबर खरीद लेगी ताकि किसानों पर अनुपयोगी पशुओं को खिलाने का बोझ न पड़े। मुख्य मंत्री ने चौथे चरण के मतदान से एक दिन पहले घोषणा की कि किसानों को प्रति पशु रु. 900 प्रति माह दिया जाएगा। खुले पशु के मुद्दे पर तो, कम से कम उ.प्र. में, भाजपा को 2019 का संसदीय चुनाव भी हार जाना चाहिए था किंतु रहस्यमयी ढंग से उसके उम्मीदवारों ने बड़े अंतरों से चुनाव जीता। लोगों को यह एहसास है कि 2019 में कुछ हेरा फेरी हुई थी, नहीं तो क्या वजह है कि इतने ‘निर्णायक’ ढंग से चुनाव जीतने के बाद भी कोई जश्न नहीं मनाया गया था।

Amit Shah
अमित शाह

अमित शाह ने बीच चुनाव में बयान दिया है कि मुसलमान बहुजन समाज पार्टी को भी मत दे सकता है। अब अमित शाह का बसपा से क्या लेना-देना है? लोगों को अंदाजा है कि शायद भाजपा एवं बसपा में कोई गोपनीय समझौता है जिसमें दोनों में से कोई भी एक दल दूसरे की सरकार बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन आम लोगों से पूछा जाए तो लोग दो बातें कह रहे हैं। एक तो वे बदलाव चाहते हैं। वे इस सरकार से मंहगाई, बेरोजगारी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की चरमराई व्यवस्था, कानून व व्यवस्था के नाम पर डर व आतंक का माहौल, जनता के धन से अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर बताने वाले विज्ञापन व कोविड के बाद एक असुरक्षा के माहौल जैसे मुद्दों पर तंग आ गए हैं। दूसरा लोग नाम लेकर कह रहे हैं कि अखिलेश यादव को पुनः मुख्य मंत्री बनना चाहिए। मुस्लिम व यादव तो इसमें एकमत हैं, अन्य जातियों के लोग भी, दलित से लेकर ब्राह्मण तक, इस बार ऐसा ही सोच रहे हैं। जहां पर सपा भाजपा को हराने की स्थिति में नहीं है वहां लोग बसपा या अन्य जो भी उम्मीदवार भाजपा को हरा सकता है उसे अपना समर्थन कर रहे हैं। यह एक अनोखी घटना है। मुसलमान तो इस बात के लिए जाना जाता है कि वह उसी उम्मीदवार का समर्थन करता है जो भाजपा को हराने की स्थिति में होता है। इस बार ऐसा सोचने वालों का दायरा बड़ा हो गया है। भाजपा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लोगों को यह कहकर डराते रहते हैं कि भारत में एक दिन मुसलमानों की जनसंख्या हिन्दुओं से ज्यादा हो जाएगी। ऐसा तो शायद कभी नहीं हो पाएगा लेकिन समाज का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों की तरह सोचने लगा है – किसी भी तरह भाजपा को सत्ता से बाहर रखना है। भाजपा की साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति का ऐसा अप्रत्याशित परिणाम निकला है।

Yogi Adityanath
योगी आदिनाथ

भाजपा नेताओं के तरकश के तीर खत्म होते नजर आ रहे हैं। एक तरफ योगी आदित्यनाथ बार-बार कह रहे हैं कि सपा सरकार कब्रिस्तान की दीवार बनवाती थी और उन्होंने मंदिर बनवाए हैं, तो दूसरी तरफ अमित शाह कह रहे हैं कि यदि सपा सरकार आएगी तो आजम खान, मुख्तार अंसारी व अतीक अहमद जेल से बाहर आ जाएंगे। वे यह जोड़ना भूल जाते हैं कि भाजपा फिर सत्ता में आई तो आशीष मिश्र व अजय मिश्र टेनी कभी जेल नहीं जाएंगे। अमित शाह को शायद यह अंदाजा नहीं है कि उ.प्र. का उस तरह लम्बे समय के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं किया जा सकता, जैसा करने में उनके लोग गुजरात में सफल हुए हैं। योगी आदित्यनाथ के बारे में लगने लगा है कि एक वे मुख्यमंत्री के बजाए बुलडोजर के ठेकेदार हैं। भाजपा के नेताओं की सृजन क्षमता क्षीण पड़ गई है। चौथे चरण के मतदान से एक दिल पहले भाजपा ने पूरे पृष्ठ का विज्ञापन निकाल कर आम लोगों के मुद्दों पर केंद्रित किया है। वह अब किसानों, बेरोजगारों, गरीबों व छात्रों की मांगों को पूरा करने का वायदा कर रही है। लेकिन यहां भी वह विपक्षी दलों की नकल करती नजर आ रही है जैसे महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, लड़कियों के लिए स्कूटी, गरीबों के लिए अन्नपूर्णा कैंटीन से न्यूनतम दाम पर भोजन, आदि वायदे।         

04 03 2022 Akhilesh Yadav
अखिलेश यादव

दूसरी तरफ लोग अखिलेश यादव की परिपक्वता पर आश्चर्यचकित हैं। एक तरफ अखिलेश ने अपने दल के अंदर प्रतिस्पर्धा को समाप्त किया है। पिछली सपा सरकार में साढ़े चार मुख्यमंत्री बताए जाते थे। दूसरी तरफ अखिलेश ने भाजपा के नेताओं की पूरी फौज जिसमें एक दूसरे से ज्यादा जहर उगलने की प्रतिस्पर्धा होती है, का अकेले ही बिना विचलित हुए मुकाबला किया है। उन्होंने भाजपा के किसी जाल में फंसने के बजाए भाजपा को ही मजबूर कर दिया है कि वह अपने पारम्परिक विभाजनकारी मुद्दों को छोड़ जन साधारण के मुद्दों पर बात करे। सपा के मतदाताओं ने भी बड़ी परिपक्वता दिखाई है। मुसलमान व यादव बिना शोर-शराबे के सपा का साथ दे रहा है। अन्य जाति के लोग भी इस बदलाव का खुशी खुशी हिस्सा बन रहे हैं। भाजपा को 10 मार्च को एक सदमे के लिए तैयार रहना चाहिए। उसे एक ऐसा नेता जिसकी उम्र भाजपा के राज्य व केन्द्र के सभी महत्वपूर्ण नेताओं की औसत उम्र से कम है परास्त करने वाला है।

अखिलेश यादव ने एक तरफ राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (कमेरावादी), महान दल जैसे दलों के साथ उपयोगी गठबंधन बनाए हैं तो दूसरी तरफ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नेताओं जैसे ममता बनर्जी व शरद पवार, जिन्हें एक सीट भी दी है, का आशिर्वाद लिया है। प्रियंका गांधी पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस सपा का साथ देगी। अखिलेश के पक्ष में चीजें जाती दिखाई पड़ रही हैं जबकि भाजपा के पक्ष में कुछ भी काम करता नहीं दिखाई पड़ रहा, बावजूद इसके कि उसके पास मजबूत नेतृत्व है, मजबूत ढांचा है जिसे आरएसएस का भी सहयोग प्राप्त है। धन का कोई अभाव नहीं व अनुकूल चुनाव आयोग व प्रवर्तन निदेशालय जैसे सरकारी संस्थान भी साथ में है।

जब भी भारत के लोकतंत्र पर संकट के बादल मंडराए हैं, मतदाता ने निर्णायक भूमिका निभाई है। पहली बार उसने ऐसा तब किया जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित कर लोगों के मौलिक अधिकार भी समाप्त कर दिए थे। अब मतदातओं को लग रहा है कि एक अघोषित आपातकाल की स्थिति है और संविधान खतरे में है, अतः वह पुनः निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

(संदीप पाण्डेय सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के उपाध्यक्ष हैं।)

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

हिंडनबर्ग ने कहा- साहस है तो अडानी समूह अमेरिका में मुकदमा दायर करे

नई दिल्ली। हिंडनबर्ग रिसर्च ने गुरुवार को कहा है कि अगर अडानी समूह अमेरिका में कोई मुकदमा दायर करता...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x