Tue. Sep 17th, 2019

क्या किसी दबाव में काम कर रही है न्यायपालिका?

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सुप्रीम कोर्ट। फोटो साभार-गूगल।

जिस तरह उच्चतम न्यायालय पूर्व वित्त मंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम के अग्रिम जमानत मामले की सुनवाई में याचिका को एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट में फुटबाल की तरह किक किया उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या न्यायपालिका किसी दबाव में काम कर रही है ? क्या न्यायपालिका अघोषित रूप से प्रतिबद्ध न्यायपालिका बनती जा रही है ?क्या न्यायपालिका शुरू से ही चिदंबरम को जेल भेजने के पक्ष में थी और इसीलिए तकनीकी कारणों के हवाले से किसी भी कीमत पर उनकी याचिकाएं नहीं सुनना चाहती थी ?

क्या जस्टिस रमना को यह हिदायत थी कि वे चिदंबरम की याचिका को सुनने में टालमटोल करें ,जबकि इसी तकनीकी खामियों वाली भूषण स्टील से संबंधित एक याचिका पर उन्होंने न केवल सुनवाई किया था बल्कि आदेश भी  पारित किया था ? क्या चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इसीलिए संविधान पीठ द्वारा सप्ताह में पांचों दिन अयोध्या मामले की सुनवाई में बैठ रहे हैं ताकि उनके सामने किसी भी महत्वपूर्ण मामले की मेंशनिंग न हो सके और सरकार तथा सरकारी एजेंसियां मनमानी कर सकें ?

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उच्चतम न्यायालय  ने बुधवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में पी चिदंबरम की अर्जी पर सुनवाई से मना कर दिया था। चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल बार-बार इस मामले पर सुनवाई का अनुरोध करते रहे, लेकिन जस्टिस एनवी रमना  ने इस केस पर तुरंत सुनवाई से साफ-साफ इंकार कर दिया। कपिल सिब्बल चाह रहे थे कि चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक लगे, लेकिन जज रमना  ने कहा कि मैं कैसे बिना लिस्ट किए इस केस पर सुनवाई कर सकता हूं। ये नहीं हो सकता। जस्टिस रमना  की दलील थी कि चीफ जस्टिस इन दिनों अयोद्ध्या मामले पर सुनवाई कर रहे हैं और वो ही इस मामले पर कोई फैसला ले सकते हैं।

जस्टिस रमना उच्चतम न्यायालय  के सीनियर जजों में एक हैं। 16 अगस्त को उन्होंने बिना लिस्टिंग के ही एक केस की सुनवाई की थी। ये मामला भूषण स्टील के पूर्व सीएफओ और डायरेक्टर नितिन जौहरी का था। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ने इस साल मई में उन्हें गिरफ्तार किया था। उन पर कंपनी के खातों और वित्तीय ब्यौरों में हेर-फेर समते कई फर्जीवाड़े के आरोप थे। लेकिन 14 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। इसके बाद 16 अगस्त को गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय  ने उनकी ज़मानत पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस पर  जस्टिस रमना ने केस को बिना लिस्ट किए उस पर सुनवाई की। जस्टिस रमना ने ज़मानत पर रोक लगा दी। कपिल सिब्बल ने इस आदेश को याद दिलाया फिर भी जस्टिस रमना ने सुनवाई नहीं की।

कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने तो सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और मीडिया की मंशा पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। पार्टी के दिग्गज नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इशारों-इशारों में दिल्ली उच्च न्यायालय समेत देश की शीर्ष अदालत के इरादे पर सवाल उठाया और कहा कि जिस तरह ऑर्डर पास किए जा रहे हैं, वह बेहद चिंता की बात है।

इस बीच कपिल सिब्बल ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जज के बारे में कहा है कि उन्होंने 25 जनवरी से ही फैसला सुरक्षित रखा था और सात महीने बाद जब रिटायरमेंट के दो दिन बचे तो जजमेंट दे दिया। सिब्बल ने फैसले की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 3.25 बजे जजमेंट दिया गया। जजमेंट के बाद हमने अग्रिम जमानत की याचिका पेश की तो इसे शाम चार बजे रिजेक्ट कर दिया गया ताकि हम उच्चतम न्यायालय  भी नहीं जा सकें। सिब्बल ने कहा कि जिस तरह ऑर्डर पास हो रहे हैं, वह चिंताजनक है।

सिब्बल ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय  में चली गतिविधियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि  मुवक्किल का हक होता है कि वह अपील करे। उन्होंने उच्चतम न्यायालय में दायर चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका के बारे में कहा कि हमें कहा गया कि चीफ जस्टिस इस पर फैसला लेंगे। जबकि उच्चतम न्यायालय हैंडबुक के मुताबिक, सीजेआई संवैधानिक बेंच में व्यस्त  हैं तो नियम यह है कि दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश इसकी सुनवाई करें। हमें अपना अधिकार नहीं मिला। रजिस्ट्रार ने बताया कि चीफ जस्टिस शाम 4 बजे इस पर सुनवाई करेंगे। 4 बजे सुनवाई का समय ही नहीं बचता है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम की याचिका पर जानबूझकर तुरंत सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा, कोर्ट सुनवाई ही नहीं करेगी और दो दिन बाद के लिए याचिका लिस्ट करेगी और इस बीच गिरफ्तारी हो जाए तो इसका मतलब है कि पेटिशन इन्फेक्चुअस (निष्प्रभावी) हो गई।

सिब्बल के साथ-साथ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और उच्चतम न्यायालय  के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मीडिया रिपोर्टों पर नाराजगी प्रकट की। सिंघवी ने मीडिया पर बरसते हुए कहा कि मीडिया जिस तरह से चिदंबरम को फरार या भगोड़ा बता रहा है, यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम कहीं नहीं गए थे। उन्होंने कांग्रेस दफ्तर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, फिर भी कहा गया कि भाग गए। यह बहुत दुखद है।

सिब्बल ने कहा कि यह सिर्फ चिदंबरम का मामला नहीं है। यह सिस्टम से जुड़ा मसला है। कानून को अपना काम करते रहना चाहिए। इसकी कोई चिंता नहीं है। चिंता की बात यह है कि सिस्टम को इस तरह तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। सिब्बल ने भविष्य में हर क्षेत्र के विरोधियों के सरकार का शिकार होने की आशंका प्रकट की। उन्होंने कहा कि अभी राजनीतिक पार्टी निशाने पर है, कल को मीडिया का शिकार किया जा सकता है।

दरअसल 20 अगस्त को  दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का मामला उच्चतम न्यायालय में पहुंचा जहां इसे फुटबाल बनाकर एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट में किक किया गया । चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने मामले की तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि इसे बुधवार को वरिष्ठ जज के सामने मेंशन करें। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और उन्होंने रजिस्ट्रार से चीफ जस्टिस को अनुरोध करने को कहा। करीब डेढ़ घंटे बाद रजिस्ट्रार ने उन्हें जानकारी दी कि चीफ जस्टिस ने आज ही सुनवाई से इनकार कर दिया है और कहा है कि इस केस को बुधवार को वरिष्ठ जज के सामने मेंशन करें। 21अगस्त को  चिदंबरम की जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई के अनुरोध को जस्टिस एन वी रमना ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के पास भेज दिया।

याचिका की तत्काल सुनवाई के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा जस्टिस रमना के सामने 21 अगस्त को  दो दौर की मेंशनिंग की गई। एक सुबह और दूसरी दोपहर 2 बजे। सिब्बल ने कहा कि सीबीआई ने चिदंबरम के लिए लुक आउट नोटिस जारी किया है और उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। जस्टिस रमना ने कहा कि जब तक इसे उचित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध नहीं किया जाता, तब तक सुनवाई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि केवल चीफ जस्टिस ही मामले की लिस्टिंग के बारे में आदेश पारित कर सकते हैं और चीफ जस्टिस के कार्यालय में फाइल भेज सकते हैं। वहीं रजिस्ट्रार ने पीठ को बताया कि अभी याचिका में डिफेक्ट दूर किए गए हैं। अब इसे चीफ जस्टिस के पास रखा जाएगा। वहीं सिब्बल का कहना था कि वो राज्यसभा के सांसद हैं और उनके कानून से भागने की कोई आशंका नहीं है। वो इसके लिए अंडरटेकिंग भी देने को तैयार हैं। लेकिन पीठ ने ये मांग भी  ठुकरा दी।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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