गहलोत सरकार को अपदस्थ करने की साजिश पर कांग्रेस आलाकमान नरम क्यों?

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राजस्थान में राजनीतिक संकट का अभी अंत नहीं हुआ है। मगर, देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी का आलाकमान इस संकट के दौरान ‘पप्पू’ बना नज़र आया। कांग्रेस आलाकमान तो अब तक समझ ही नहीं पाया है कि उसकी भूमिका क्या होनी चाहिए। वहीं, बीजेपी आलाकमान ‘ऑपरेशन लोटस’ पर नियंत्रण नहीं रख सका। उसके हाथ बदनामी तो लगी, लेकिन उपलब्धि कुछ भी नहीं रही। 

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश हुई। इसे मानकर या नकार कर ही कांग्रेस आलाकमान अपना रुख तय कर सकता था। कांग्रेस आलाकमान की ओर से जो तीन सदस्यीय दल जयपुर पहुंचा, उसका मानना यही था कि गहलोत सरकार को गिराने की साजिश हुई। रविवार 12 जुलाई को पूरी मशक्कत करने और रात भर की मेहनत के बाद जब अगले दिन यानी सोमवार को विधायक दल की बैठक में बहुमत के लायक आंकड़ा जुटता दिखा, तो रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन और अविनाश पांडे की टीम ने इसे अपनी बड़ी सफलता के तौर पर देखा। विधायक दल की बैठक से पहले प्रेस कॉन्फ्रेन्स में सचिन पायलट खेमे के विधायकों को घर वापसी का अवसर भी दिया। 

आश्चर्यजनक तरीके से कांग्रेस नेतृत्व अपने ही भेजे हुए तीन नेताओं के दल की राय को भी अहमियत देता नज़र नहीं आया। अपनी ही पार्टी की सरकार गिराने की साजिश जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद सचिन पायलट को मनाने की कोशिशें जारी रहीं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अहमद पटेल, पी चिदंबरम जैसे नेताओं ने लगातार सचिन पायलट से बात की, मगर बात बनती दिखी नहीं। इस बीच सचिन पायलट को डिप्टी सीएम पद से बर्खास्त करना, राजस्थान कांग्रेस और युवा कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुनने जैसी घोषणा भी जयपुर में ही हो गयी। ऐसा लगा मानो कांग्रेस नेतृत्व को भी जयपुर से चुनौती दी जा रही हो। स्पीकर की ओर से पायलट समेत 19 विधायकों को निलंबन के लिए नोटिस भिजवाकर गहलोत ने अपनी ओर से ऐसे कदम बढ़ा लिए थे, जिससे वापसी आसान नहीं होती।

कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट को मनाने की कोशिश कर पूरे विवाद को कांग्रेस का अंदरूनी विवाद साबित कर डाला। ऑपरेशन लोटस का पर्दाफाश करने में जुटी अशोक गहलोत सरकार के प्रयासों पर आलाकमान ने मानो पानी फेर दिया। इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करती भी कांग्रेस नहीं दिखी। मगर, अशोक गहलोत ने अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं आने दी। सबसे पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त और राज्य सरकार को गिराने की साजिश की जांच के लिए एसओजी को जांच सौंप दी और फिर एसओजी की ओर से नोटिस भेजे गये जिससे सचिन भड़क गये। अब तीन ऑडियो सीडी भी सामने आ चुकी है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत, बीजेपी नेता संजय जैन और कांग्रेस नेता भंवरलाल शर्मा के खिलाफ केस दर्ज कराया जा चुका है। 

अशोक गहलोत की आक्रामकता को सुरजेवाला एंड कंपनी का भी पूरा समर्थन मिला है मगर केंद्रीय नेतृत्व सचिन पायलट से लगातार बात करने में जुटा है। सवाल यह है कि क्या राजस्थान कांग्रेस बदली हुई परिस्थिति में सचिन पायलट को स्वीकार करेगी? अशोक गहलोत ने इस मामले में आलाकमान से भी दो-दो हाथ करने का मन बना लिया लगता है। 

बीजेपी आलाकमान भी आक्रामक नहीं दिखता। गजेंद्र सिंह शेखावत के ऑडियो मामले में बीजेपी जरूर अपने नेता का बचाव कर रही है लेकिन अशोक गहलोत ने यह कहकर कि अगर सीडी फर्जी निकली तो वे राजनीति छोड़ देंगे, वास्तव में जबरदस्त आक्रामकता दिखाई है। इस आक्रामकता के पीछे वजह है पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की ताकत। सचिन पायलट को बीजेपी में लाने और इस बहाने गजेंद्र शेखावत को मजबूत बनाने की कोशिशों को वसंधुरा सफल होने नहीं देना चाहतीं। अमित शाह से वसुंधरा की पुरानी रार रही है। अमित शाह ने पूरी कोशिश की थी वसुंधरा के वर्चस्व को वह तोड़ें, लेकिन कभी सफल नहीं हुए। एक बार फिर वसुंधरा मजबूती से अमित शाह के प्रयासों को विफल बनाने में जुटी हैं।

बीजेपी आलाकमान पर्दे के पीछे रहते हुए अशोक गहलोत सरकार को गिराने की कोशिशों में जुटा रहा है लेकिन घटनाएं मनमाफिक तरीके से नहीं घट सकीं। सचिन पायलट 30 का आंकड़ा नहीं जुटा सके और खुद बीजेपी के भीतर से भी एकजुटता की कमी साफ दिखी। वसुंधरा के असहयोग ने बीजेपी आलाकमान के पूरे मंसूबे पर पानी फेर दिया। 

संभव है कि कानूनी लड़ाई सचिन पायलट जीत जाएं। उन्होंने विधायक दल की बैठक और ह्विप को लेकर जो सवाल उठाए हैं वह वाजिब हैं और इस बात के पूरे आसार हैं कि उन्हें अदालत से राहत मिले। मगर, अंतिम फैसला स्पीकर को करना होता है और कोई न कोई ऐसा पेंच जरूर पैदा होगा जिससे सचिन पायलट और उनके समर्थकों के लिए मुश्किल पैदा होगी। इस बीच विधायकी बचाने के लिए सचिन पायलट समर्थकों की संख्या घट भी सकती है। यानी कई विधायक उनका साथ छोड़ सकते हैं। वैसी स्थिति में अशोक गहलोत और मजबूत हो जाएंगे और वह सचिन पायलट के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक बढ़त हासिल कर चुके होंगे।

बदली हुई परिस्थिति में कांग्रेस आलाकमान को यह बताना पड़ेगा कि गहलोत सरकार के खिलाफ साजिश की बात को अधिक गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया और क्यों सचिन पायलट के प्रति सद्भावनापूर्ण रवैया दिखाया गया। अशोक गहलोत खेमे का यह सवाल बिल्कुल जायज है कि क्या सचिन को एक और मौका इसलिए दिया जाए कि वह गहलोत सरकार को गिराने की साजिश को नये सिरे से सफल कर दिखलाएं? कांग्रेस का आलाकमान राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश रचने वालों का साथ देता क्यों दिख रहा है? आलाकमान के रुख की वजह से कांग्रेस के असली दुश्मन बीजेपी पर हमले की धार कुंद हो गयी है। जिन लोगों ने ऑपरेशन लोटस की साजिश रची, उनके खिलाफ कांग्रेस एकजुट होकर हमले नहीं कर पा रही है।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल उन्हें विभिन्न टीवी चैनलों के पैनलों में देखा जा सकता है।)  

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