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Friday, September 24, 2021

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संस्कृति-समाज

जयंती पर विशेष: प्रेमचंद की परम्परा एक सामूहिक प्रगतिशील परम्परा थी

जिस प्रेमचन्द के निधन पर उनके मुहल्ले के लोगों ने कहा कि कोई मास्टर था जो मर गया, जिस प्रेमचन्द की  अत्येंष्टि  में दस बारह लोग ही मुश्किल से शामिल हुए थे, वह प्रेमचन्द अपने निधन के 85 साल...

किताब समीक्षा: कविता की जनपक्षधरता पर शैलेंद्र चौहान की नज़र

शैलेंद्र चौहान बुनियादी तौर पर कवि हैं उन्होंने कुछ कहानियां और एक उपन्यास भी लिखा है। लघु पत्रिका ‘धरती’ का एक लंबे अंतराल तक संपादन भी किया है। आलोचनात्मक आलेख और किताबों की समीक्षा गाहे-बगाहे लिखते रहे हैं। आठवें दशक से...

मौजूदा राजनीतिक हालत पर टिप्पणी करता है खालिद जावेद का उपन्यास ‘एक ख़ंजर पानी में’

प्रो. खालिद जावेद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के ब्रांड एंबेसडर हैं। अपने बेमिसाल अफसानों से न सिर्फ उर्दू बल्कि दूसरी जुबान के लोगों का ध्यान खींचने वाले खालिद का उपन्यास, 'एक खंजर पानी में' उर्दू अदब में एक नया...

पुस्तक समीक्षा: दर्जाबंदी तोड़ने की निगाह

सदियां गुजर गईं मगर वंचनाओं ने आज तक आधी दुनिया का पीछा नहीं छोड़ा। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां महिलाएं किसी न किसी रूप में वंचनाओं की शिकार न हों। यह भी एक हद तक...

शीला संधु को लेकर पंकज बिष्ट का संस्मरण: उन्होंने चुनौती स्वीकारी

अगर उनके निजी जीवन को देखें तो कहना गलत नहीं होगा कि शीला संधु सही अर्थों में चुनौती का दूसरा नाम थीं। हिंदी प्रकाशन व्यवसाय को राजकमल प्रकाशन के माध्यम से चरम पर पहुंचानेवाली शीला संधु (24 मई 1924...

सीपी-कमेंट्री: आत्महत्या के विरुद्ध

एक कविता से दिवंगत गोरख पांडेय की याद आती है। याद उस कविता का फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन द्वारा किए अनुवाद की भी आती है। उस अनुवाद के बारे में हमारी न्यूज़ एजेंसी यूएनआई के माध्यम से मुंबई से...

जन्मदिन पर विशेष: मौत के बाद भी जिंदा रहने का नाम है चे

एक नाम है चे ग्वेरा। चे का आज जन्मदिन है। चे मिसाल हैं कि जीकर ही नहीं मरकर भी जिंदा रहा जा सकता है। चे के लिए दुनिया सरहदों में बंटी नहीं थी। इसीलिए 9 अक्तूबर, 1967 में बोलीविया...

जन्मदिन पर विशेष: कोरोना में बेहद प्रासंगिक हो गया है चे ग्वेरा का सामाजिक चिकित्सा विज्ञान का सिद्धांत

संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बड़े देश की तुलना में क्यूबा जैसे छोटे देश द्वारा कोरोना को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया गया। क्यूबा की इन स्वास्थ्य नीतियों की नींव क्रांतिकारी डॉ. अर्नेस्टो ग्वेरा के सामाजिक चिकित्सा विज्ञान पर रखी...

बिरसा मुंडा: 25 साल का जीवन, 5 साल का संघर्ष और भगवान का दर्जा!

भारत के इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे आदिवासी नायक हैं जिन्होंने झारखंड में अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आदिवासी समाज की दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। अंग्रेजों द्वारा थोपे...

शहीद दिवस: बिरसा के उलगुलान ने मोड़ दी थी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की धारा

जून का महीना झारखंड के लिए विशेष महत्व इसलिए रखता है कि इसी महीने की 9 तारीख को पूरा झारखंड बिरसा मुंडा की शहादत को याद करता है, वहीं 30 जून को हूल (विद्रोह) दिवस के रूप में याद...
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Latest News

धनबाद: सीबीआई ने कहा जज की हत्या की गई है, जल्द होगा खुलासा

झारखण्ड: धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की मौत के मामले में गुरुवार को सीबीआई ने बड़ा खुलासा करते हुए...
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