Tuesday, March 5, 2024

ग्राउंड रिपोर्ट: डेंगू का बढ़ता और स्वास्थ्य विभाग का गिरता ग्राफ, मरीज हलकान

सोनभद्र/मिर्ज़ापुर/भदोही। उत्तर प्रदेश के विंध्याचल मंडल के सोनभद्र मिर्जापुर सहित भदोही जिले में तेजी के साथ बढ़ते डेंगू का कहर लोगों को हलकान कर रहा है। डेंगू का डर लोगों में इस कदर समाया हुआ है कि बुखार होते ही लोगों कि धड़कनें बढ़ जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केद्रों की हालत किसी से छुपी नहीं है, जहां गिने-चुने दवाओं के बाद जिला मुख्यालय की राह दिखा दी जाती है। ऐसे में जिला अस्पतालों में जांच से लेकर उपचार के लिए जहां मरीजों की भीड़ उमड़ रही है वहीं भीड़ बेहद बढ़ने से पूरी व्यवस्था भी चरमरा गई है।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्था दुरूस्त होने के साथ-साथ अतिरिक्त बेड की व्यवस्था का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन वार्डों में साफ-सफाई से लेकर हवा इत्यादि की बदइंतजामी भर्ती मरीजों पर भारी पड़ रहा है। फिलहाल अभी तक मिर्जापुर जिले में डेंगू से किसी भी पीड़ित की मौत नहीं हुई है। मरीजों की बढ़ती संख्या के बाद मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान बताया जा रहा है।

डेंगू मरीजों की अस्पतालों में बढ़ती भीड़

अधिवक्ता दिलीप सिंह गहरवार डेंगू और वायरल फीवर के बढ़ते हुए प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के दावों को झुठलाते हुए कहते हैं “सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ ये बताने के लिए काफी है कि इसका असर थमा नहीं है।” वह जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण इलाकों में स्थित सभी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को कोसते हुए बदहाल स्थिति पर भी तल्ख टिप्पणी करते हैं। 

डेंगू वार्ड: नाम बदला व्यवस्था नहीं

मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल जिसे अब मेडिकल कॉलेज का दर्जा जरूर दे दिया गया है, लेकिन व्यवस्था में कोई आमूल चूल परिवर्तन नहीं होने से मरीजों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। यहां के डेंगू वार्ड की हालत देख दूर से ही नाक बंद रखने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कमोबेश सोनभद्र और भदोही के भी जिला अस्पताल इन दुर्व्यवस्थाओं से अछूते नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मिर्जापुर जिले में डेंगू के बढ़ते मरीजों को देखते हुए यहां के मेडिकल कॉलेज में अतिरिक्त बेड का इंतजाम किया गया है, ताकि आपात स्थिति में किसी भी तरह की परेशानी न होने पाए।

जिले में अब तक 200 से अधिक डेंगू पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। डेंगू पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए यहां अलग से डेंगू वार्ड भी बनाया गया है, जहां डॉक्टरों की तैनाती की गई है। मिर्जापुर जिले में तकरीबन 260 मरीज मिल चुके हैं। 220 मरीज डिस्चार्ज होकर मंडलीय अस्पताल से घर जा चुके हैं तो कुछ का अभी भी उपचार चल रहा है।

अस्पताल में खून जांच केंद्र पर लोगों की भीड़

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 9 सितंबर से मरीजों के बढ़ने की संख्या में वृद्धि हुई थी, जिसके बाद एक नया वार्ड विशेष रूप से डेंगू के लिए बनाया गया। इस नए वार्ड में 34 बेड है, जहां 6 बेड पहले से ही थे, कुल मिलाकर डेंगू के लिए 40 बेड बनाया गया है। अभी भी डेंगू वार्ड फुल है, 40 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। जिनके निरंतर देख-रेख के लिए सुबह, शाम और रात में दो-दो डॉक्टरों की तैनाती की गई है। खुद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य हर दिन स्वयं निरीक्षण करके जायजा लेते है।

 कई इलाकों में बना है डेंगू का डर

जिले में कुछ जगहों पर डेंगू का अधिक प्रकोप फैला हुआ है इसमें नगरी क्षेत्रों की बुरी हालत है। मिर्ज़ापुर नगर के बथुआ स्थित डंगहर मोहल्ले में डेंगू फैलने से जुगेश मिश्रा का पूरा परिवार इसकी जद में आ गया है। इसी प्रकार मोहल्ले के ही दिनेश द्विवेदी का भी पूरा परिवार डेंगू की चपेट में आ गया है ऐसा बताया गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए घर-घर जाकर सर्वे कराया जा रहा है, ताकि चिन्हित प्रभावित लोगों का उपचार किया जा सके।

जिले भर में डेंगू मरीज मिल रहे हैं, ऐसे में लोगों में जहां डेंगू का डर समाया हुआ है तो वहीं जिले में डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मंडलीय अस्पताल में डेंगू मरीजों की जांच शुरू हो गई है, जिससे मरीजों को काफी सहूलियत हुई है। हालांकि जांच की धीमी गति से जांच और रिपोर्ट लेने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं। जांच से लेकर रिपोर्ट लेने तक में दो से तीन दिन लग जाते हैं। इससे दूर दराज से चलकर आने वाले मरीजों एवं उनके तीमारदारों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताते हैं कि “डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। अभी तक किसी भी मरीज की डेंगू से मौत नहीं हुई है। मंडलीय अस्पताल से सभी मरीज इलाज के बाद ठीक होकर गए है। मंडलीय अस्पताल में डेंगू को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट और ब्लड का भी इंतजाम किया गया है।“

भदोही में डेंगू के 21 न‌ए मरीज मिले

भदोही जिले में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। 21 न‌‌ए लोगों की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। बढ़ते डेंगू मरीजों की संख्या देख स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। जिले में भदोही, ज्ञानपुर, सुरियावां, और औराई डेंजर जोन में है। अभी पांच संदिग्धों की रिपोर्ट जांच के लिए भेजी गई है। बीते साल साल जिले में रिकार्ड 101 डेंगू के केस मिले थे। जिससे सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस बार बचाव के पुख्ता इंतजाम तेज तो किए हैं, लेकिन मानसून सीजन जैसे-जैसे बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे मरीजों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। 

पूर्व में जहां डेंगू मरीजों की संख्या केवल दो थी। अब वह बढ़कर 21 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के दावों के अनुसार डेंगू से निपटने के लिए पुख्ता तैयारियां की गई हैं। वहीं दवाओं का स्टॉक भी पर्याप्त मात्रा में है। जिले में पिछले छह महीने में 27 हजार लोगों का मलेरिया जांच भी किया गया। इसी तरह एक जुलाई से 20 सितंबर तक 2250 मरीजों की डेंगू जांच किट के माध्यम से किए जा चुके हैं।

डॉक्टर के केबिन के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते मरीज एवं परिजन

इसमें से 50 मरीज डेंगू पॉजिटिव आए हैं। इसके बाद मरीजों के नमूने लेकर एलाइजा टेस्ट कराए गए। इसमें से 21 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पिछले साल डेंगू के 101 मरीज मिले थे, जो पिछले चार वर्षों में रिकार्ड सबसे ज्यादा था। इसमें 65-70 मरीज अकेले ही भदोही के विभिन्न क्षेत्रों से मिले थे। इस वर्ष औराई, भदोही और ज्ञानपुर, सुरियावां ब्लॉक में डेंगू मरीज मिल रहे हैं।

डेंगू की त्वरित जांच के लिए एलाइजा रीडर मशीन भी लगाई जा चुकी है। इसके अलावा बीमारी से निपटने के लिए 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर 84 बेड संरक्षित किए गए हैं। इसमें जिला चिकित्सालय और महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल में 10-10 बेड, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 5-5 बेड, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 2-2 बेड संरक्षित है‌।

दूसरी ओर राज्य के अंतिम छोर पर स्थित सोनभद्र जनपद में अब 24 डेंगू मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2023 से अब तक जिले में कुल 24 डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। जिसे देखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 5-5 एवं जिला अस्पताल में 12 बेड की अतिरिक्त व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है, ताकि मरीजों के बढ़ने पर उनको परेशानी न होने पाए।

सोनभद्र के सीएमओ के मुताबिक जिला अस्पताल में अलग से डेंगू वार्ड बनाए जाने के साथ ही इससे निपटने के लिए मुक्कमल व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अर्लट है। पिछले वर्ष अक्टूबर 2022 में जिले में 142 से भी ज्यादा डेंगू मरीज सोनभद्र में पाए गए थे। सोनभद्र जनपद पहाड़ों जंगलों से घिरा हुआ जनपद है बढ़ते प्रदूषण के साथ ही साथ मच्छर जनित बीमारियों के भी प्रकोप का भय बना रहता है।

ओबरा के स्थानीय पत्रकार अजीज कुमार सिंह का कहना है कि “मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए फांगिंग और दवा का छिड़काव न होने से जंगलों, पहाड़ों, नदी नालों से लगे पिछड़े इलाकों में रहने वाले स्थानीय रहवासियों को काफी परेशान होना पड़ता है। कहने मात्र के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में दवा का छिड़काव किया जाता है।”

क्या हैं डेंगू के लक्षण

मेडिकल कॉलेज मिर्ज़ापुर इमरजेंसी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत त्रिपाठी के अनुसार, मच्छर जनित बीमारियों के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, दाने और मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। जिसमें बुखार या ठंड लगना, मांसपेशियों या शरीर में दर्द, थकान और सिरदर्द भी शामिल है। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल जाएं और इलाज कराएं।

डेंगू मरीज एवं उनके परिजन दवा लेने के लिए लाईन में लगे हैं

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “घबराएं नहीं, अपने आसपास सफाई रखें और पानी का जमाव न होने दें। साथ ही सोते समय मच्छर दानी का ज़रूर प्रयोग करें। इससे बचाव के लिए हर व्यक्ति को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग ज़रूर करना चाहिए।“

विंध्याचल मंडल के तीनों जनपदों भदोही, सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के ग्रामीण क्षेत्रों के सुदूरवर्ती इलाकों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों की बुरी हालत है। खासकर बात करते हैं सोनभद्र और मिर्ज़ापुर जनपद के पहाड़ी और पिछड़े इलाकों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों की जहां दवाओं को छोड़ दिया जाए तो चिकित्सक भी दोपहर के बाद चलते बनते हैं। रात्रि में तो अस्पताल भगवान भरोसे संचालित होते हैं।

कुछ अस्पताल तो वार्ड बॉय और फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित होते आ रहे हैं। मिर्ज़ापुर जिले के लहंगपुर, मतवार, ड्रमंडगंज, पटेहरा, भांवा, सोनभद्र के चोपन, म्योरपुर, पिपरी, रेनूकूट इत्यादि की हालत गंभीर बताई जाती है। ग्रामीणों की मानें तो मामूली मरीजों का भी उपचार करने के बजाय रेफर कर जान छुड़ाकर सरकारी चिकित्सक चलते बनते हैं। मौजूदा समय में डेंगू वायरल फीवर सहित कई मौसम जनित बीमारियों ने पांव फैला रखा है। ऐसी स्थिति में भी स्वास्थ्य सेवाओं की जो हालत है वह उचित नहीं कही जायेगी। 

(मिर्जापुर से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट।)

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