नल का जल पहुंचा नहीं, गंदे जल के दोबारा इस्तेमाल करने की योजना शुरू

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देश के हर घर में नल का जल पहुंचाने की केन्द्रीय योजना के लिए कई बड़े राज्यों में केवल 40 प्रतिशत काम हो पाया है, फिर भी जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र शेखावत ने विश्व जल दिवस के अवसर पर 22 मार्च को घरेलू गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल करने की राष्ट्रीय योजना की शुरूआत कर दी है।  इस योजना को सुजलम-2 नाम दिया गया है। इसके तहत नहाने, कपड़े धोने और रसोईघर से निकलने वाले गंदे पानी को साफ किया जाएगा।

देश के हर घर में 2024 तक नल का जल उपलब्ध कराने की योजना की धीमी प्रगति पर संसद की स्थाई समिति ने चिंता जताई है। कई बड़े राज्यों में 40 प्रतिशत से भी कम काम हुआ है। ढेर सारे घरों में लगे नल कार्यरत नहीं हैं। समिति ने जल जीवन मिशन के लिए आवंटित कोष के बहुत कम उपयोग होने पर निराशा जताई है और कहा है कि इससे लक्षित घरों में नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं किया जा सकेगा। केंद्र ने इस कार्यक्रम की घोषणा अगस्त 2019 में की थी।

स्थाई समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने लोकसभा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि अभी देश के 19.18 करोड़ ग्रमीण घरों में से 8.96 करोड़ (46.48 प्रतिशत) घरों में नल से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो पा रही है। बड़े राज्यों मसलन-उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, आसाम, मध्यप्रदेश, केरल और तमिलनाडु में तो 40 प्रतिशत से भी कम घरों में नल का जल पहुंच पा रहा है। जबकि हरियाणा, तेलंगाना, गोवा,अंडमान व निकोबार,दादरा व नगर हवेली और पुडुचेरी में सौ प्रतिशत घरों में नल का संयोग स्थापित हो गया है। पंजाब,हिमाचल प्रदेश और गुजरात में 90 प्रतिशत से अधिक काम हो गया है, यह बहुत जल्द सौ प्रतिशत हो जाएगा।

कोष के कम इस्तेमाल के बारे में समिति ने कहा है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत वर्ष 2021-22 के दौरान बजट में 50,011 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था, जिसे बाद में घटाकर 45011 करोड़ रुपए कर दिया गया, पर अभी तक केवल 28,238 करोड़ रुपए खर्च किया जा सका है।

इधर सरकारी आंकडों के अनुसार, देश के ग्रामीण इलाके में प्रतिदिन 31 अरब टन (31हजार मिलियन) गंदा पानी निकलता है जो नाले-नदियों में बेकार बह जाता है। अगर इस पानी को साफ करके सिंचाई में उपयोग किया जा सका तो सूखाड़ का भी मुकाबला किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की खपत लगातार बढ़ रही है। जिसे पूरा करने के लिए गंदे पानी के दोबारा इस्तेमाल का उपाय करना जरूरी हो गया है।

जलशक्ति मंत्री शेखावत ने  सुजलम-2 परियोजना की घोषणा करते हुए कहा कि जल की खपत लगातार बढ़ते जाने से इसका संरक्षण करना बेहद जरूरी हो गया है। अटल भूजल योजना के अंतर्गत जल के अभाव से ग्रस्त 81 जिलों में भूजल पुनर्भरण कार्य हो रहा है। वहां करीब 104.2 लाख पुनर्भरण इकाईयों लगभग एक अरब 85 करोड घनमीटर वर्षा जल का संग्रह किया जा रहा है। हालांकि चुनौती काफी बड़ी है। देश की एक तिहाई जिलों में जलाभाव उत्पन्न होता रहता है। पानी की कमी होने से पनबिजली प्रकल्पों को बंद करना पड़ता है। ऐसे अभाव के दौरान जगह जगह वाटर टैंकर से पानी लाना पड़ता है। महाराष्ट्र में रेलगाडी से पानी ढोया जाता है।

जानकार लोगों का कहना है कि इसका मुख्य कारण वर्षा कम होना नहीं है, बल्कि वर्षाजल का संरक्षण नहीं किया जाना है। वैसे देश में विश्व में उपलब्ध जल का केवल 4 प्रतिशत है जबकि विश्व की करीब 16 प्रतिशत आबादी यहां निवास करती है। शहरी क्षेत्रों में वर्तमान में 135 लीटर प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन की खपत होती है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 40 लीटर प्रति व्यक्ति है। खेती में सिंचाई की जरूरत इसमें शामिल नहीं है। उसमें भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए घरेलू इस्तेमाल से गंदा हुए जल को साफ करके सिंचाई करने की व्यवस्था हो तो समस्या का समाधान किया जा सकता है।

(अमरनाथ झा वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ पर्यावरण मामलों के जानकार भी हैं। आप आजकल पटना में रहते हैं।)

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