अखबार में प्रकाशित होने से पहले ही अडानी समूह ने क्यों किया रिपोर्ट को खारिज?

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नई दिल्ली। अडानी एंटरप्राइजेज ने एक खबर प्रकाशित होने से पहले ही उसका खंडन कर दिया है। एक्सचेंजों के साथ एक नियामक फाइलिंग में अडानी समूह की प्रमुख कंपनी, अडानी एंटरप्राइजेज ने लंदन स्थित फाइनेंशियल टाइम्स पर दुर्भावनापूर्ण और पक्षपाती तरीके से कोल आयात में ओवरप्राइसिंग के अपने पुराने आरोपों को फिर से दोहराने का आरोप लगाया है।

अडानी समूह ने सार्वजनिक हित की आड़ में अपने निहित स्वार्थों को आगे बढ़ाने और उसकी छवि को ‘खराब’ करने की दिशा में निरंतर अभियान संचालित करने के लिए फाइनेंशियल टाइम्स की निंदा की है।

कंपनी ने कहा, “एफटी की प्रस्तावित कहानी डीआरआई के 30 मार्च, 2016 के सामान्य अलर्ट सर्कुलर पर आधारित है।” संभवत: वह उस कहानी की तरफ इशारा कर रही थी जो पत्रकार डैन मैक्रम की प्रश्नावली पर आधारित थी। डीआरआई का मतलब राजस्व खुफिया निदेशालय है जो तस्करी संबंधी गतिविधि पर नज़र रखता है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़े वाणिज्यिक धोखाधड़ी से लड़ता है।

डैन मैक्रम ने 31 अगस्त को “सीक्रेट ट्रेल अडानी के छिपे निवेशकों का खुलासा करता है” नामक शीर्षक से एक लेख भी लिखा था। वह कहानी जो संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) नाम के खोजी पत्रकारों के एक नेटवर्क के खुलासे पर आधारित थी, ने दावा किया था कि दो एशियाई व्यवसायी, संयुक्त अरब अमीरात से नासिर अली शाबान अहली और ताइवान से चांग चुंग-लिंग, ने मॉरीशस स्थित दो निवेश फंडों के माध्यम से अडानी समूह की चार कंपनियों के शेयरों में फंड पहुंचाने की साजिश रची थी। 

उस समय भी, अडानी समूह ने इस आधार पर उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था कि इसका एक हिस्सा 2014 में बिजली उत्पादन उपकरणों के आयात में ज्यादा पैसे की अदायगी के लिए अडानी पावर के खिलाफ राजस्व खुफिया विभाग द्वारा दायर किए गए एक मामले पर आधारित था।

लेकिन किसी भी कंपनी के लिए किसी कहानी को प्रकाशित होने से पहले उसको खारिज कर देना बिल्कुल बेतुकी बात है। फाइलिंग में यह नहीं बताया गया है कि अडानी ने ‘कहानी की रूपरेखा’ कैसे तैयार की। पत्रकारिता की नैतिकता से बंधा कोई भी मीडिया संगठन प्रिंट या डिजिटल प्रकाशित होने से पहले कहानी की रूपरेखा नहीं साझा करता है।

अडानी को इस बात का डर है कि आगामी खुलासा एक और डीआरआई जांच की तरफ लोगों का ध्यान खींचेगा। समूह ने अपनी नवीनतम फाइलिंग में कहा है कि “कोयले के आयात में अधिक मूल्य का मुद्दा भारत की सर्वोच्च अदालत द्वारा निर्णायक रूप से सुलझा लिया गया था।”

संभवतः जब एफटी ने समाचार प्रकाशित करने से पहले समूह से मामले को लेकर टिप्पणियां मांगी हों, ऐसा हो सकता है कि कहानी की भनक लगने के बाद अडानी कुछ ‘डैमेज कंट्रोल’ करने की कोशिश कर रहा हों। एक कहानी में कई दृष्टिकोणों से चीजों को हासिल करना अच्छी पत्रकारिता की आधारशिला है।

जनवरी में अमेरिकी शार्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट से उत्पन्न मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई फिर से शुरू होने से पहले अडानी समूह किसी भी प्रतिकूल मीडिया रिपोर्ट के बारे में थोड़ा चिंतित हो सकता है। जिसने समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में एकतरफा गिरावट शुरू कर दी थी। एक समय में बाज़ार का मूल्यांकन $120 बिलियन से अधिक नीचे आ गया था। हालांकि, उसके बाद अडानी का स्टाक रिकवर हो गया है। और अडानी फिर से शेयरों की वैल्यू में उसी तरह की गिरावट नहीं देखना चाहते हैं।

फाइलिंग में कहा गया है कि “यह महज संयोग नहीं है कि ऐसी कहानियां भारत की अदालतों में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की तारीखों से ठीक पहले सामने आने की अद्भुत क्षमता रखती हैं।”

हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नेट एंडरसन ने तुरंत एक्स पर पोस्ट करके बताया कि जब मैक्रम को अतीत में इसी तरह के एक और हमले का सामना करना पड़ा था तो क्या हुआ था।

एंडरसन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि “अडानी एक आगामी लेख को लेकर फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) में पत्रकार डैन मैक्रम पर हमला कर रहे हैं। आखिरी कंपनी जिसने यह प्रयास किया था वह वायरकार्ड थी, जिसे बाद में जर्मन इतिहास का सबसे बड़ी धोखाधड़ी पायी गयी थी।”

मैक्रम ने कथित तौर पर जर्मन तकनीकी दिग्गज वायरकार्ड द्वारा की गई मल्टी-अरब डॉलर की धोखाधड़ी के बारे में लेखों की एक श्रृंखला चलाई और एक किताब ‘मनी मेन’ लिखा और वायरकार्ड घोटाले के रूप में नेटफ्लिक्स पर एक डॉक्यूमेंट्री में प्रदर्शित किया गया।

अडानी फाइलिंग में हंगरी के अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस का भी उल्लेख किया गया है, जो ओसीसीआरपी के कई समर्थकों में से एक के रूप में सूचीबद्ध हैं।

फाइलिंग में कहा गया है कि “ओसीसीआरपी को जॉर्ज सोरोस द्वारा फंड किया जाता है, जिन्होंने खुले तौर पर अडानी समूह के खिलाफ अपनी शत्रुता की घोषणा की है।”

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने तर्क संबंधी दोष को इंगित करने के लिए एक्स का सहारा लिया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “पहले उन्होंने कहा कि अडानी भारत है और अडानी विरोधी कोई भी आरोप भारत विरोधी है। अब वे कहते हैं कि एफटी ही सोरोस है! हम सभी सोरोस एजेंट हैं – लेकिन अडानी के लिए एक सगा भाई भी उनसे जुड़ा पक्ष नहीं है।”

सांसद मोइत्रा गौतम अडानी के भाई विनोद का जिक्र कर रही थीं जो संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं और साइप्रस के नागरिक माने जाते हैं।

जब हिंडेनबर्ग रिपोर्ट सामने आई, तो अडानी समूह ने इस बात से सख्ती से इनकार किया था कि विनोद अडानी समूह का हिस्सा थे।

लेकिन कुछ महीने बाद, अडानी को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा कि विनोद प्रमोटर समूह और एक संबंधित पार्टी का हिस्सा थे। जब रिपोर्टों की एक और गट्ठर से पता चला कि विनोद और उनकी संस्थाएं सीएचएफ मई 2022 में होलसिम से 6.4 बिलियन में एसीसी और गुजरात अंबुजा सीमेंट के अधिग्रहण में पीछे से काम कर रही थीं।

“विनोद अडानी, अडानी समूह के भीतर विभिन्न सूचीबद्ध संस्थाओं के ‘प्रवर्तक समूह’ का हिस्सा हैं,” और ये बात समूह ने ना चाहते हुए भी स्वीकार किया था।

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