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श्रम कानूनों के खात्मे के सरकारी फ़ैसलों के खिलाफ ऐक्टू का 12-13 मई को दो दिवसीय विरोध दिवस का ऐलान

हल्द्वानी। कोरोना आपदा की आड़ में मोदी समेत तमाम बीजेपी शासित राज्य सरकारों द्वारा मज़दूरों के अधिकारों पर हमले का ट्रेड यूनियनों ने जवाब देने का फ़ैसला लिया है। इसके तहत ऐक्टू ने आगामी 12-13 मई को दो दिवसीय देशव्यापी विरोध दिवस का आह्वान किया है।

ऐक्टू के उत्तराखंड महामंत्री केके बोरा ने कहा कि कोरोना आपदा से निपटने के लिए जारी लॉक डाउन का सारा आर्थिक बोझ देश के मजदूरों पर डाल कर मोदी सरकार बड़े-बड़े कॉरपोरेट व मालिकों की तिजोरी भरने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने मजदूरों को मालिकों और कॉपोरेट घारानों का बंधुआ व गुलाम बनाने की मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि हाल में तीन भाजपा शाषित राज्यों में लिया गया फ़ैसला उसी दिशा में एक कदम है। आपको बता दें कि यूपी में लगभग 3 वर्ष (1000 दिन) और गुजरात मे सवा तीन साल (1200 दिन) के लिये श्रम कानून को स्थगित कर दिया गया है। इसके अलावा एमपी, यूपी, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल में 8 घण्टे के काम को 12 घण्टे करने का फ़ैसला भी उसी का हिस्सा है। उन्होंने इन सूबों की तर्ज़ पर उत्तराखंड में भी श्रम कानूनों को समाप्त करने का बयान देने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेंड रावत सरकार की निंदा की है।

केके बोरा ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार मजदूरों-गरीबों के लिये डबल धोखा-डबल मुसीबत की सरकार साबित हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर हमला करते हुए कहा कि किस मुंह से गरीब मजदूरों का नाम लेते हैं क्या इनकी अंतरात्मा मजदूरों के लिये पत्थर बन गयी है? उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत से श्रम कानूनों के स्थगन पर विचार के बयान पर उत्तराखंडके मजदूरों से माफी मांगने की भी मांग की है।

उन्होंने कहा कि जो काम कभी विदेशी हुकूमत वाले अंग्रेज किया करते थे आज उन अंग्रेजों से भी आगे बढ़कर मोदी सरकार मजदूर विरोधी क्रूर निर्णय कर रही है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान ऐक्टू से सम्बद्ध सभी यूनियनें काली पट्टी बांध कर काम करेंगी साथ ही श्रम कानूनों को शिथिल व समाप्त करने के आदेश पत्र को जगह जगह जलाया जाएगा।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

This post was last modified on May 11, 2020 11:53 am

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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