नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. कामराज ने अपने जीवन में जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर सारे देश के लिए काम किया। राजनीति में वह आजीवन सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ दलित-पिछड़ों की आवाज उठाते रहे। तभी तो उनकी मौत के 48 साल बाद आज भी हर राजनीतिक दल के नेताओं में उनको याद करने की होड़ लगी है। शनिवार को उनकी जयंती पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर जो शुभकामनाएं उनको प्राप्त हुईं। उससे यह रेखांकित हुआ कि तमिलनाडु का वह नेता, जिनका इंदिरा गांधी के साथ मिला-जुला संबंध था, अब दक्षिण की राजनीतिक हलकों में एक प्रमुख पिछड़ी आवाज के रूप में उन्हें नए सिरे से महत्व पा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “थिरु के. कामराज को उनकी जयंती पर जन्मदिन की शुभकामनाएं”, वो “एक दिग्गज व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत के विकास के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। सामाजिक सशक्तीकरण पर कामराज का जोर हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति की तरह है।”
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शानदार काम करने के लिए कामराज को 1976 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्हें बच्चों को शिक्षा की तरफ आकर्षित करने के लिए स्कूलों में मध्याह्न भोजन सहित कई अग्रणी योजनाओं को शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
बच्चों के पोषण और स्कूल में उपस्थिति में सुधार के लिए कामराज द्वारा 1956 में तमिलनाडु के सभी पंचायत और सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में मुफ्त भोजन योजना शुरू की गई थी। बाद में इस मॉडल का पूरे देश में अनुकरण किया गया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन ने कामराज को पुष्पांजलि अर्पित की और इस अवसर को चिह्नित करने के लिए सार्वजनिक पुस्तकालयों को 1.5 लाख से अधिक किताबें दान करने की घोषणा की, जो उन्हें समय-समय पर उपहार के रूप में मिली थीं।
अपनी श्रद्धांजलि में, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कामराज को स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक कहा और स्कूलों में मध्याह्न भोजन की अवधारणा लाने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। खड़गे ने यह भी ट्वीट किया कि कामराज को “तमिलनाडु के लोगों के द्वारा व्यापक रूप से प्रशंसा और प्यार मिला”।
उन्हें “आधुनिक तमिलनाडु का वास्तुकार” कहते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कामराज की “सामाजिक विकास के साथ आर्थिक विकास की दोहरी प्रतिबद्धता” की सराहना की। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “आज के. कामराज की जयंती है, जो 1950 और 1960 के दशक के सबसे महान राजनीतिक नेताओं में से एक थे, खासकर आधुनिक तमिलनाडु के वास्तुकार।”
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने चेन्नई में कामराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके शासनकाल को “तमिलनाडु का स्वर्ण युग” कहा। अन्नामलाई ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, “एक अशिक्षित प्रतिभा, जिसने गरीबी के कारण सभी गरीब बच्चों के लिए शिक्षा को सामान्य बनाया, स्कूलों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया और स्कूली बच्चों की भूख को कम किया।”
अन्नामलाई ने ट्वीट में कहा की “कामराज एक किंगमेकर थे जिन्होंने कई ऐसे नेता बनाए जो बड़े पदों पर पहुंचे लेकिन उन्हें सिंहासन की कोई इच्छा नहीं थी। कई बांधों और सरकारी उद्यमों के साथ, पेरुंडलाई का शासनकाल तमिलनाडु का स्वर्ण युग था। हम कर्मवीर की प्रशंसा और पूजा करते हैं जिन्होंने शिक्षा की आंखें खोलीं और कई पीढ़ियों को जीवित रखा।”
तमिलनाडु के राज्यपाल ने कहा कि कामराज महान दूरदर्शी राष्ट्रवादी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। राजभवन ने ट्वीट किया, “उन्होंने भारत की आजादी में अतुलनीय योगदान दिया और अपनी ऐतिहासिक पहलों के जरिए सामाजिक विकास को गति दी, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में।”
(राहुल कुमार की रिपोर्ट।)
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