काबुल में अफ़गान महिलाओं का बेखौफ प्रदर्शन

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राजधानी काबुल में काम के अधिकार की मांग  लेकर महिलाओं के एक समूह ने प्रदर्शन किया। हैरतअंगेज बात ये थी कि सशस्त्र तालिबानी उन महिलाओं से चंद मीटर की दूरी पर ही खड़े थे बावजूद इसके महिलाओं ने बेख़ौफ़ होकर विरोध प्रदर्शन किया। 

वज़ीर अक़बर खान, काबुल की महिलायें बाहर निकली हैं और सरकार के राजनीतिक और आर्थिक व्यवसाय में हिस्सेदारी के लिए विरोध कर रही हैं। 

वहीं दूसरी ओर महिलाओं को लेकर तालिबान ने बयान दिया कि हमारी बहनें मुस्लिम हैं, उन्हें शरिया का ख्याल करना होगा और हम उनके ख़िलाफ़ भेदभाव नहीं करेंगे। 

अफ़ग़ानिस्तान में तख्तापलट के बाद तालिबान अपना उदार चेहरा दुनिया के सामने लाना चाह रहा है। वो जताना चाह रहा है कि आज का तालिबान…दो दशक पुराने तालिबान से अलग है। इसी सिलसिले में तालिबान के प्रवक्ता जबीबुल्लाह मुजाहिद ने काबुल पर कब्जे के बाद कल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि तालिबान ने बीस साल की लड़ाई के बाद विदेशी सेना को भगा दिया। उन्होंने ये भी कहा कि हमारे ख़िलाफ़ जो कुछ हुआ उसे हमने भुला दिया है। अब हम सभी देशों को भरोसा देते हैं कि आपके दूतावास की सुरक्षा की जाएगी। तालिबानी प्रवक्ता ने आगे कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के ख़िलाफ़ नहीं होने देगा।  जहां तक तालिबानी क़ानून की बात है, उसके नॉर्म्स और प्रिंसिपल की चिंता किसी दूसरे को करने की ज़रूरत नही है।

वहीं अफ़ग़ानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने खुद को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है। सालेह ने मंगलवार को एक ट्वीट करके कहा, “अफ़ग़ानिस्तान के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, पलायन, इस्तीफे या मृत्यु की हालत में फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाता है। मैं इस समय अपने देश में हूं और वैध केयरटेकर प्रेसिडेंट हूं। मैं सभी नेताओं से उनके समर्थन और आम सहमति के लिए संपर्क कर रहा हूं।”

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्जे़ के बीच राष्ट्रपति अशरफ ग़नी देश छोड़कर निकल गए थे, तो दूसरी तरफ सालेह पंजशीर घाटी चले गए थे। सालेह पहले भी तालिबान के ख़िलाफ़ बयान जारी कर चुके हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि, ‘मैं कभी भी और किसी भी परिस्थिति में तालिबान के आतंकवादियों के सामने नहीं झुकूंगा। मैं अपने नायक अहमद शाह मसूद, कमांडर, लीजेंड और गाइड की आत्मा और विरासत के साथ कभी विश्वासघात नहीं करूंगा। ‘मैं उन लाखों लोगों को निराश नहीं करूंगा जिन्होंने मेरी बात सुनी।  मैं तालिबान के साथ कभी भी एक छत के नीचे नहीं रहूंगा।”

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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