स्लोडाउन भी नहीं डाउन कर सका वित्तमंत्री का अहंकार

Estimated read time 1 min read

वित्तमंत्री कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेरे मुर्गे की तीन टांग पर अड़ी रहीं, बोली कोई मंदी नहीं है ! कोई स्लोडाउन नहीं है! यह घोषणाएं हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की यह मांग उठा रहे थे।

लेकिन साफ दिख रहा था कि बाजार जो अर्थव्यवस्था की हालत बयान कर रहा है उसे देखकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के डायस पर बैठे लोग अंदर ही अंदर से हिले हुए हैं जुलाई और अगस्त में FPI ने बाजार से 23 हजार करोड़ की निकासी की है।

कल बिजनेस स्टैंडर्ड ने एक लेख में एक हैरान कर देने वाली जानकारी दी है। उसका कहना है कि शेयर बाजार में जो हालिया गिरावट आई है उससे भारतीय कारोबारी जगत में दिवालिया होने का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि कई फर्मों की उधारी उनके मार्केट कैपिटल से काफी ज्यादा हो गई है।

प्रमुख कंपनियों का मार्केट कैपिटल और कर्ज अनुपात असंतुलित हो गया है। इनमें वोडाफोन आइडिया (15.1 फीसदी), टाटा मोटर्स (32.7 फीसदी), टाटा पावर (30.4 फीसदी), टाटा स्टील (38.5 फीसदी), जीएमआर इन्फ्रा (37.7 फीसदी), आईआरबी इन्फ्रा (17.5 फीसदी) और जिंदल स्टील (30 फीसदी) है।

वित्त वर्ष 2018 के अंत तक ऐसी 99 कंपनियां थीं जिनकी उधारी उनके मार्केट कैपिटल से अधिक थी। मार्च 2019 में ऐसी कंपनियों की संख्या 147 हो गयी जो अब बढ़कर 195 हो गयी है। NBFC और प्राईवेट सेक्टर की 195 अन्य कंपनियों की उधारी पांच साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

ऋणदाताओं के लिए बड़ी चिंता यह है कि अधिकांश कॉरपोरेट ऋण वित्तीय क्षेत्र की इन्हीं कंपनियों में लगा है। अगस्त आते-आते तक इन 195 कंपनियों पर ऋणदाताओं का कुल 13 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो पिछले पांच साल में सर्वाधिक है। मार्च 2018 में यह 8.8 लाख करोड़ रुपये था।

कर्ज और मार्केट केपिटल में असंतुलन को देखते हुए विश्लेषकों का कहना है कि इससे कंपनियों के कर्ज चूक के मामले बढ़ सकते हैं। यही स्थिति रही तो सैकड़ों कम्पनियां दिवालिया हो सकती हैं।

हम देख रहे हैं कि नयी दिवालिया अदालत के सामने आने वाले 12 प्रमुख कंपनियों के मामले जिनमे ढाई लाख करोड़ रुपये की रकम इन्वॉल्व है उसमें 3 साल होने को आये हैं लेकिन आधे मामले भी ठीक ढंग से सॉल्व नहीं हो पाए हैं।

मार्केट की बिगड़ती स्थिति हमें साफतौर पर तभी दिखाई दे गई थी जब आईएल एंड एफएस का मामला सामने आया था लेकिन सरकार शुतर्मुर्ग की तरह रेत में गर्दन दबाए तूफान के गुजरने का इंतजार करती रही। झूठे आंकड़ों से मन बहलाती रही।

अब पानी सिर तक आ गया। कल जब वित्तमंत्री प्रेसवार्ता कर रहीं थीं तो उसके कुछ घण्टे पहले ही खबर आई कि मूडीज ने वर्ष 2019 के लिए भारत की जीडीपी की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। पहले इसे 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसी के साथ उसने 2020 के लिए भी वृद्धि दर के अनुमान को 0.6 प्रतिशत घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले भी प्रमुख राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां देश की GDP ग्रोथ के अनुमान घटा चुकी हैं। सभी को स्लोडाउन दिख रहा है लेकिन हमारी वित्तमंत्री को खोखले दम्भ भरने और अहंकारपूर्ण भाषा इस्तेमाल करने के अलावा और कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।

(गिरीश मालवीय आर्थिक मामलों के जानकार हैं और आजकल इंदौर में रहते हैं।)

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours