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यस बैंक के डूबने का भाजपा कनेक्शन

यस बैंक का संकट भी दूसरे डूबते बैंकों से अलग नहीं है। बैंक जिस उदारता से कर्ज बांटता चला गया और वसूली नहीं हुई, इसी से उसके सामने मुश्किलों का पहाड़ खड़ा होता चला गया। इस उदारता में ही बैंक के दुर्दशा की पूरी कहानी छिपी हुई है जो कहीं न कहीं भाजपा से जुड़ रही है। यस बैंक ने वर्ष 2014 के बाद जिस तेजी से क़र्ज़ बांटा और इसके बदले राणा कपूर परिवार ने कट यानि किक बैक वसूला यह जाँच एजेंसियों के राडार पर है।

यस बैंक के बड़े कर्जदारों में आइएल एंड एफएस, अनिल अंबानी समूह, सीजी पॉवर, कॉक्स एंड किंग, कैफे कॉफी डे, एस्सार पावर और जी ग्रुप वाले भाजपा सांसद सुभाष चंद्रा के एस्सेल जैसे बड़े उद्योग समूह और वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इन सभी कर्जदारों की हालत किसी से छिपी नहीं है। यह भी शोध का विषय है कि अनिल अंबानी, सुभाष चंद्रा से लेकर अधिकांश बड़े  डिफाल्टर के तार सीधे-सीधे भाजपा से जुड़े हुए हैं। या तो ये पीएम के मित्र हैं, भाजपा सांसद हैं या भाजपा नेताओं के रिश्तेदार हैं।

यस बैंक के पास इस वक्त दो लाख नौ हजार करोड़ रुपए जमा के रूप में हैं, जबकि बैंक ने सवा दो लाख करोड़ रुपए कर्ज के रूप में दे रखे हैं। किसी निजी बैंक जिसमें सरकार की कोई हिस्सेदारी न हो उसे डूबने से बचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और एलआईसी के कंसोर्टियम से निवेश कराने के सरकार के निर्णय को यस बैंक के भाजपा कनेक्शन से जोड़कर देखा जाना चाहिए, पूरी कहानी अपने आप स्पष्ट हो जाएगी।आइएलएंडएफएस का घोटाला यह बताने के लिए काफी था कि हमारा वित्तीय क्षेत्र किस तरह के कुप्रबंधन का शिकार हो चुका है। क्या इन कर्जदारों से वसूली हो पाएगी, यह अरबों खरबों का सवाल है?

भारत में बैंकों के डूबने के कई मामले सामने आ चुके हैं। न्यू बैंक आफ इंडिया, बैंक ऑफ कराड, पंजाब कोआपरेटिव बैंक, ग्लोबल ट्रस्ट बैंक जैसे कई उदाहरण हैं। भारत में बैंकों के समक्ष कर्ज की वसूली एक गंभीर संकट बन गया है। बैंकों में होने वाले घोटाले उनके भीतर कुप्रबंधन की ही देन हैं। इसका बड़ा कारण सरकार के इशारे और ऋण में कट के लिए बड़े उद्योगपतियों को नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए उदारता से कर्ज बांटना और वसूली के पक्ष को नजरअंदाज करना रहा।

इसलिए बैंक एनपीए बोझ में दबे हैं। बैंक के कर्जदारों में आरकॉम के मालिक अनिल अंबानी, एस्सेल ग्रुप, एस्सार पावर, वरदराज सीमेंट, रेडियस डेवलपर्स, आईएलएंडएफएस, दीवान हाउसिंग, नरेश गोयल का जेट एयरवेज, कॉक्स एंड किंग्स, सीजी पावर, कैफे कॉफी डे, अल्टीको आदि प्रमुख हैं। जब कई कर्जदार कंपनियां दिवालिया होने लगीं और लोन वापस नहीं मिला तो बैंक की हालत भी खस्ता होती चली गई। इधर तीन-चार वर्षों से यस बैंक की वित्तीय सेहत लगातार बिगड़ रही थी। बैंक ने जिन कंपनियों को लोन दिया उनमें अधिकतर घाटे में हैं या दिवालिया हो चुकी हैं। पैसे वापस लौटने का सिलसिला टूटा तो बैंक का हाल बिगड़ने लगा।

बैंकिंग सेक्टर से लेकर शेयर मार्केट तक को हिलाने वाले आईएल एंड एफएस पर यस बैंक के 2,442 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसे एनपीए में डाल दिया गया। प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के चहेते अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप की कई कंपनियों पर भी यस बैंक के 13,000 करोड़ रुपये बाकी हैं। हाल ही में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इन्फ्रा लोन चुकाने में डिफॉल्टर साबित हुई थी। इसके अलावा भाजपा सांसद सुभाष चंद्रा के एस्सल ग्रुप पर यस बैंक के 3,300 करोड़ रुपये बकाया हैं जी समूह की कंपनियों पर म्यूचुअल फंड और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का करीब 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें 7,000 करोड़ रुपये एमएफ कर्ज और 5,000 करोड़ रुपये एनबीएफसीज का कर्ज है। इसके कारण देश में एक और IL&FS संकट का खतरा पैदा हो गया है।

ऐसे ही 6,355 करोड़ रुपये के बैड लोन को यस बैंक ने 2017 में छिपाने की कोशिश की थी। इसके बारे में जब आरबीआई को पता चला तो उसने पाबंदियां लगानी शुरू कर दी थीं। 2018 में केंद्रीय बैंक ने सीईओ राणा कपूर को 3 महीने में पद से हटने के लिए कहा और यह यस बैंक के पतन की शुरुआत था। इसके बाद सितंबर महीने में ही बैंक के शेयरों में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।

पिछले साल जब आईएल एंड एफएस का मामला सामने आया था, उसके बाद से आईएल एंड एफएस संकट के कारण देश का पूरा एनबीएफसी  सेक्टर संकट में आ गया है। आईएल एंड एफएस डिफॉल्ट के बाद अब तक भारत की टॉप 20 एनबीएफसी की तीन लाख करोड़ की पूंजी नष्ट हो चुकी है। उससे एक-एक करके बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के घपले घोटाले सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड का नाम सबसे बड़ा है। इंडिया बुल्स के मामले में ताजा घटनाक्रम यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड यानी आईबीएचएफएल से जुड़े फंड हेराफेरी मामले में केंद्र सरकार व आरबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। .

पिछले कुछ महीनों में इंडिया बुल्स में गड़बड़ी के कई आरोप लगे हैं। इस ग्रुप पर लगभग 87 हजार करोड़ रुपये का कर्जा है। अर्थव्यवस्था के उभरते हुए क्षेत्रों में इंडियाबुल्स जिस तरह से कदम बढ़ा रही थी, वह वाकई चौंकाने वाला है कि कैसे एक डॉट कॉम से शुरू करने वाली कंपनी एक दशक की अवधि में अपना व्यावसायिक साम्राज्य इतना अधिक फैला सकती है? लेकिन अब इसकी असलियत सामने आने लगी है।

इंडिया बुल्स के मालिक हैं समीर गहलोत। समीर गहलोत की गिनती भारत के टॉप 100 अमीरों में 29 वें स्थान पर होती है। भारत में सबसे युवा 5 मल्टी मिलेनियर में उनका नाम शामिल हैं, समीर के पिता बलवान सिंह गहलोत एक्स आर्मी मैन हैं और अब खनन कारोबार से जुड़े बताए जाते हैं। समीर गहलोत की माता जी हैं, भाजपा की नेता कृष्णा गहलोत, जो हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की अध्यक्ष भी रही हैं। कृष्णा गहलोत का हरियाणा भाजपा में बहुत रूतबा है। नरेंद्र गहलोत समीर गहलोत के भाई हैं। नरेंद्र गहलोत दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ग्रेजुएट हैं।

ये 25 जुलाई, 2012 को इंडियाबुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड के एमडी बने। वो इंडियाबुल्स इन्श्योरेंस एजेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के भी डायरेक्टर हैं। नरेन्द्र गहलोत की शादी हुई है ज्योति मिर्धा से जो नागौर में कांग्रेस की कद्दावर नेता मानी जाती है, ज्योति 2009 में इसी क्षेत्र से सांसद भी रही हैं ओर पाँच बार सांसद रहे कांग्रेस के बड़े जाट नेता नाथूराम मिर्धा की पोती हैं। ज्योति मिर्धा की बहन हेमश्वेता मिर्धा की शादी दीपेंद्र हुड्डा से हुई है, जो पूर्व सीएम कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा के बेटे हैं। ऐसे में बीजेपी के गहलोत परिवार और हुड्डा के बीच सीधा संबंध है, अमेरिका में पढ़ाई करने वाली श्वेता ने कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम किया है।

इनमें इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन, इंडिया बुल्स और रॉबर्ट हाफ इंटरनेशनल जैसी कंपनियां शामिल हैं। यानी पूरा परिवार ही राजनीति से जुड़ा हुआ है, क्या बीजेपी क्या कांग्रेस सब एक ही हैं। इस बीच इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस कंपनी ने रविवार को कहा है कि यस बैंक के पास बांड के रूप में कंपनी के 662 करोड़ रुपये हैं और उस पर बैंक का कोई सावधि ऋण बकाया नहीं है।

यस बैंक के पास सीजी पावर के 12.79 फीसद  शेयर हैं। यस बैंक ने थापर की अवंता होल्डिंग्स लिमिटेड के गिरवी शेयर मई में बेच दिए थे। पावर इक्विपमेंट निर्माता सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस ने गौतम थापर को अगस्त 2019 में करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोप में चेयरमैन पद से हटा दिया था। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने गुरुवार को यह फैसला लिया जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गया। सीजी पावर ने बोर्ड द्वारा की गई जांच के आधार पर 20 अगस्त को बताया कि कंपनी के कुछ नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर समेत कंपनी के कुछ मौजूदा और पूर्व लोगों ने लोन की रकम का हेर-फेर किया था। कुछ रिलेटेड और अनरिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शंस से जुड़ी जानकारियां भी छिपाईं। थापर के पास कंपनी के 62.6 करोड़ में से सिर्फ 8,574 शेयर हैं। उनके ज्यादातर शेयर पिछले कुछ सालों में कर्जदाताओं ने बेच दिए थे। थापर ने शेयर गिरवी रखकर लोन लिया था। यस बैंक के पास सीजी पावर के 12.79 फीसद शेयर हैं। यस बैंक ने थापर की अवंता होल्डिंग्स लिमिटेड के गिरवी शेयर मई में बेच दिए थे।

करोड़ों रुपये के कर्ज में डूबे एस्सार पावर, जो एस्सार ग्रुप की कंपनी है, जिसका प्रमोटर रुइया परिवार है, को दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इसके लिए हफेजा फाखरी सीताबखान को इंटरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया गया है।

नरेश गोयल की जेट एयरवेज लीज पर लिए विमानों के किराये का भुगतान करने में लगातार नाकाम रही और कंपनी पर आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज होने के कारण बंद हो गयी। अब नरेश गोयल ईडी के राडार पर हैं। इस आठ हजार करोड़ रुपये के क़र्ज़ में यस बैंक का पैसा भी शामिल है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on March 9, 2020 8:42 am

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