किसान आंदोलन में पहुंचे बौध भिक्षु, 8वें दौर की बातचीत आज

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किसान आंदोलन का आज 40वां दिन है। इस बीच आज सरकार और किसान यूनियनों के बीच आठवें दौर की बातचीत दोपहर 2 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में होनी है। आज की वार्ता के नतीजे आने वाले दिनों में किसान आंदोलन की दशा-दिशा तय करेंगे। इस बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का एजेंडा स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट रहेगा। तीन कृषि कानूनों की वापसी और MSP पर कानून बने। हम वापस नहीं जाएंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा की 7 सदस्यीय समन्वय समिति ने 1जनवरी को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया था कि अगर आज सरकार के साथ बातचीत विफल रहती है तो आंदोलन तेज किया जाएगा। किसान नेता दर्शनपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 4 जनवरी को सरकार से बातचीत है और 5 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। अगर हमारे पक्ष में बात नहीं बनी तो 6 जनवरी को केएमपी (ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे) पर ट्रैक्टर मार्च होगा। यह एक तरह से 26 जनवरी की रिहर्सल परेड होगी।

वहीं पिछले दो दिनों से दिल्ली एनसीआर में होने वाली बारिश ने आंदोलनकारी किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली नोएडा) में टेंट उड़ने से किसानों को ठंड और बारिश का सामना एक साथ करना पड़ रहा है। 

किसान आंदोलन में पहुंचे बौध भिक्षु 

गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन 40वें दिन भी जारी है। प्रदर्शन में अब बौध भिक्षुओं ने भी हिस्सा ले लिया है। एक बौध भिक्षु ने कहा, “हम लखनऊ से आए हैं। किसान सड़क पर है इसलिए हम मठों को छोड़ किसानों के साथ आए हैं। जब तक कानून वापस नहीं होंगे हम नहीं जाएंगे।”

दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते हुए किसान नेता मंजीत सिंह राय ने कहा कि संगरूर में किसानों पर लाठीचार्ज किया गया। हम इसकी निंदा करते है। हम पंजाब सरकार को अवगत कराते हैं कि आपने अगर किसानों पर लाठीचार्ज बंद नहीं किए तो उनके खिलाफ पंजाब में मोर्चा खोला जाएगा।

किसानों के एक संगठन ने तीन दिन पहले हरियाणा-राजस्थान सीमा पर बैरिकेड तोड़कर हरियाणा के रेवाड़ी जिले में प्रवेश किया था। अब वे गुरुग्राम में प्रवेश कर सकते हैं। राजस्थान के श्री गंगानगर से आंदोलनकारी किसानों के एक समूह ने रविवार शाम को राष्ट्रीय राजधानी की ओर बढ़ने का एक और प्रयास किया। इसी के चलते गुरुग्राम से करीब 17 किमी दूर रेवाड़ी के सांघवाड़ी गांव के पास पुलिस से झड़प हो गई।

हरियाणा पुलिस ने दिल्ली की तरफ जा रहे किसानों के एक समूह पर रेवाड़ी जिले के मसानी बांध के पास रविवार की शाम को आंसू गैस के गोले छोड़े। किसानों ने बुधला सांगवारी गांव के पास पहले पुलिस बैरीकेड तोड़ डाले और फिर शाम में वे दिल्ली की तरफ बढ़ने लगे। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-जयपुर राजमार्ग के सर्विस लेन पर डेरा डाले हुए थे।

दरअसल, तीन कृषि कानूनों के विरोध में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र व पंजाब के किसान पिछले कई दिनों से दिल्ली-जयपुर हाइवे पर स्थित जयसिंहपुर खेड़ा बॉर्डर पर डटे हुए थे। तीन दिन पहले ही दिल्ली-जयपुर हाइवे स्थित बाम्बड़ कट पर नया मोर्च जमाया था। 

शनिवार की देर शाम से ही नए मोर्चे बाम्बड़ कट पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। रविवार सुबह होते-होते बाम्बड़ कट के साथ साथ बॉर्डर पर भी किसानों की संख्या तीन गुना ज्यादा बढ़ गई। 500 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर पहुंचे हजारों किसानों ने रविवार की शाम ठीक चार बजे दिल्ली कूच करने का ऐलान कर दिया। 

उसके बाद किसानों के जत्थे ने हाइवे पर दो स्थानों पर बैरिकेड तोड़े और फिर आगे बढ़ते चले गए। किसानों को रोकने के लिए रेवाड़ी पुलिस सुबह से ही इंतजाम करने में लगी हुई थी। लेकिन पुलिस के सभी इंतजामों को ध्वस्त करते हुए आंदोलनकारी किसान साहबी पुल के निकट पहुंच गए और यहां किसानों के साथ आरएएफ व रेवाड़ी पुलिस के सामना हुआ। फोर्स ने पहले तो किसानों को पीछे हटने की चेतावनी दी और फिर ताबड़तोड़ आंसू गैस के गोले छोड़े।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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