चीन ने भारतीय सीमा में लगाया टेंट!

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नई दिल्ली। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि पूर्वी लद्दाख के डेमचोक में स्थित भारत के चारडिंग नाला इलाके में चीन ने अपना एक टेंट लगाया है।

अधिकारी ने टेंट में रहने वालों को कथित नागरिक करार दिया है। हालांकि भारत उनसे जाने के लिए कह रहा है लेकिन अभी भी उनकी मौजूदगी वहां बनी हुई है।

डेमचोक में पहले भी भारत और चीन का आमना-सामना हो चुका है। 1990 के दशक में भारत और चीन के वर्किंग ग्रुपों की बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित डेमचोक और ट्रिग हाइट्स को विवादित करार दिया गया था।

बाद में नक्शों की अदला-बदली में एलएसी पर स्थित ऐसे 10 इलाकों को चिन्हित किया गया जिनकी अवधारणाओं को लेकर मतभेद थे। इनमें समर लुंगपा, देप्सांग बुल्ज, प्वाइंट 6556, चांगलुंग नाला, कोंगका ला, पैंगांग त्सो नार्थ बैंक, स्पंगूर, माउंट साजुन, डुमचेले और चुमार शामिल हैं।

इन इलाकों के अलावा जहां आपसी तौर पर इनके विवादित होने पर सहमति बनी या फिर इनको लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग अवधारणाएं हैं पिछले साल मौजूदा तनाव के बाद उत्तरी लद्दाख में एलएसी पर पांच और संघर्ष के केंद्र उभरे हैं।

ये पांच संघर्ष के केंद्र हैं गलवान घाटी में केएम120, पीपी15 और श्योक सूला इलाके में पीपी17ए, रेचिन ला और रेजांग ला।

भारत और चीन के बीच विवादों के निपाटरे के लिए कमांडर स्तर की बातचीत पिछले साल अप्रैल में हुई थी।

ऐसे अधिकारी जिनके पास इसका विवरण है, उनका कहना है कि यह बात सही है कि बातचीत में देरी हो रही है लेकिन दोनों पक्ष हॉटलाइन पर एक दूसरे से संपर्क में हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब से तनाव शुरू हुआ है दोनों पक्षों के बीच दौलतबेग ओल्डी और चुशुल सेक्टर में हॉटलाइन पर 1500 बार संपर्क हो चुका है।

सूत्रों का कहना है कि बातचीत इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि भारत सभी फ्रिक्शन प्वाइंट से चीनी सेना के पीछे लौट जाने की शर्त रख रहा है। जबकि चीन डिस्केलेशन चाहता है। साथ ही निचले इलाकों में पहुंची अतिरिक्त सेना को पहले अपने असली अड्डे पर जाने का पक्षधर है उसके बाद फ्रिक्शन प्वाइंट से पीछे हटने की शुरुआत होगी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अधिकारी ने बताया कि वो सेना को पीछे ले जाना चाहते हैं लेकिन उसके लिए वो समझौता करना चाहते हैं। डिसएनगेजमेंट होगा लेकिन उसमें समय लगेगा।

मौजूदा समय में दोनों पक्षों की सेनाएं किसी भी बिंदु पर एक दूसरे के आमने-सामने नहीं हैं। मामले पर प्रस्ताव लेने में इसलिए देरी हो रही है क्योंकि दोनों के बीच अविश्वास बढ़ गया है। यही वजह है कि दोनों पक्षों को तकरीबन अपने 50 हजार सैनिकों की वहां तैनाती करनी पड़ी है।

सूत्रों के मुताबिक चीन अपने सैनिकों को रोटेट कर रहा है। इसके साथ ही सैन्य इंफ्रस्ट्रक्चर को बहुत तेजी से विकसित कर रहा है। इनमें हथियारों के लिए केंद्र और तोपों की पोजीशन शामिल है। अपने अंदर के इलाकों में विवादित इलाके जिंगजियांग और तिब्बती सूबों को अक्साइन चिन के रास्ते जोड़ने वाले जी219 हाइवे पर चीनी सेना की चार डिवीजन तैनात है।

भारत ने भी अपने रक्षा कामों को अपग्रेड किया है और उसमें कुछ नई जनरेशन के हथियार भी भेजे हैं।

जाड़े के समय जैसा कि पैंगांग त्सो के किनारे दोनों पक्ष अपने सैनिकों की संख्या में भीषण बढ़ोत्तरी कर देते हैं। यहां चीन 10 दिन के भीतर ही अपने सैनिकों की चक्रीय तब्दीली कर रहा है।

यह वही इलाका है जहां अगस्त-सितंबर में पहली बार चेतावनी गोलियां चलायी गयी थीं। यह एक दशक में पहली बार हुआ था। और उसकी डिसएनगेजमेंट की शुरुआत फरवरी में हुई थी। दोनों पक्षों ने अपने सैनिकों को पीछे कर लिया था।

दूसरे फ्रिक्शन प्वाइंट्स के लिए 10वें चक्र की बातचीत उस डिसएनगेजमेंट के 48 घंटे के भीतर 20 फरवरी को हुई थी। लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सभी रणनीतिक स्थानों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती कर दी गयी है।

उन्होंने बताया कि अगर चीन कैलाश रेंड हाइट्स को फिर से अपने कब्जे में लेना चाहेगा तो हम दूसरी जगह चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि एक बिल्कुल साफ संदेश दे दिया गया है कि अगर उनके द्वारा कोई प्रयास किया गया तो अगले स्तर का स्कैलेशन और ऊंचा हो जाएगा।

(इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित।)    

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