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नस्लवादी विवादों के हत्थे चढ़ गयी ऑक्सफ़ोर्ड छात्र संघ की नवनिर्वाचित अध्यक्ष रश्मि की कुर्सी

हालाँकि ये खबर भारतीय अंग्रेजी समाचार पत्रों सहित पश्चिमी मीडिया में आज से तीन-चार दिन पहले से ही सुर्ख़ियों में थी, लेकिन हिंदी पट्टी में इस खबर को लेकर न तो किसी भी पत्र-पत्रिका में सुगबुगाहट हुई और न ही इसे कोई तवज्जो दी गई मानो हिंदी पट्टी के 60 करोड़ से भी अधिक पाठकों और दर्शकों को ऑक्सफ़ोर्ड जैसे शिक्षण प्रतिष्ठान या पश्चिमी जगत के समाज से कोई सरोकार हो। जनचौक अपने पाठकों के लिए इस खबर को महत्वपूर्ण समझता है, और दुनिया में पूंजीवादी लोकतंत्र शोषणकारी होने के बावजूद आज भी अपने समाज में व्यक्तिगत सोच, विचारों की आजादी और नस्लीय, रुढ़िवादी सोच के प्रति कितना संवेदनशील बना हुआ है और अपनी संस्थाओं में शुचिता को लेकर प्रतिबद्ध है, को जानना हमारे जागरुक पाठकों के लिए बेहद आवश्यक है।

हालाँकि जब यह विवाद गहराने लगा तो रश्मि सामंत ने एक खुला पत्र लिखकर अपनी टिप्पणियों के लिए माफ़ी मांग ली थी, लेकिन शिक्षा जगत में उनके इस्तीफे को लेकर विवाद बना रहा।

रश्मि सामंत जो हाल ही में पहली भारतीय महिला के तौर पर ऑक्सफ़ोर्ड छात्र संघ के पद पर काबिज हुई थीं, को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर होलोकास्ट को संदर्भित करने सहित नस्लीय टिप्पणी करने के आरोपों के चलते इस्तीफ़ा देना पड़ा है।

हालाँकि कर्नाटक की उडुपी जिले की रहने वाली रश्मि जिन्होंने मणिपाल अकैडमी ऑफ़ हायर एजुकेशन (एमएएचई) से स्नातक की डिग्री हासिल की है, ने अपने इस्तीफे के लिए हो रहे विवाद के बाद अपनी टिप्पणियों को लेकर माफ़ी मांगते हुए एक खुला पत्र जारी किया था।

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में मौजूद एक समुदाय, द ऑक्सफ़ोर्ड स्टूडेंट्स यूनियन कैंपेन फॉर रेसियल अवेयरनेस एंड इक्वलिटी (सीआरएई) ने फेसबुक पर रश्मि के एक सोशल मीडिया बयान पर उसकी आलोचना की थी।

इसमें कहा गया था कि “हालाँकि हम मिस सामंत के इरादों के बारे में पूर्व धारणा नहीं बना सकते, लेकिन हमारा विश्वास है कि यहाँ पर उनके द्वारा लिए गए एक्शन का असर अंततः कहीं ज्यादा प्रभावकारी हो जाता है: उनके इस एक्शन से पूर्व-एशियाई, यहूदी और ट्रांस जेंडर समुदायों को चोट पहुंची है। उनकी ओर से न सिर्फ सोशल मीडिया पर नस्लीय असंवेदनशील शीर्षक पोस्ट किये गए हैं, बल्कि जब उनसे इस बारे में सवाल किये गए तो उनके द्वारा उठाये गए इन क़दमों से किसी भी प्रकार के नुकसान पहुँचने को लेकर उनके द्वारा इंकार किया गया है।”

बयान में आगे कहा गया था “जिस प्रकार के बहाने उनकी ओर से दिए गए हैं वे उनकी पूर्ण अज्ञानता के बेहतरीन सूचक हैं, और इसलिए ये उम्मीदवार के ऑक्सफ़ोर्ड स्टूडेंट बॉडी का प्रतिनिधित्व कर पाने की अक्षमता को प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त हैं, या जिम्मेदारी को पुनर्निदेशित करने की कोशिशों में पूरी तरह से धांधलेबाजी दिखती है।”

ये विवाद तब उभर कर सामने आये जब रश्मि द्वारा चुनाव में जीत दर्ज के बाद वे सोशल मीडिया में भी देखी जाने लगीं। ऑक्सफ़ोर्ड द्वारा प्रकाशित एक साप्ताहिक स्टूडेंट न्यूज़पेपर चेरवेल ने सूचित किया कि रश्मि ने अपने इन्स्टाग्राम पोस्ट में मलेशिया में एक तस्वीर के साथ “चिंग चांग” शब्दों के साथ फोटो कैद की थी, एक अन्य शीर्षक के साथ होलोकॉस्ट को शामिल करते हुए एक चुटकी ली थी,  और अपने छात्र संघ के अध्यक्षीय भाषण में हिटलर और सेसिल रोड्स (एक ब्रितानी साम्राज्यवादी, जो 19वीं शताब्दी में रोडेशिया के प्रधानमंत्री पद पर रहे) के बीच में तुलना की थी।

ऑक्सफ़ोर्ड छात्र संघ की इस पत्रिका द्वारा यह भी कहा गया कि एक शीर्षक में उन्हें ‘महिलाओं’ और ‘ट्रांसवीमेन’ को भी अलग से संदर्भित करने की भी सूचना प्राप्त हुई है। “इसके अलावा एक हालिया पोस्ट में जिसे उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट में अब डिलीट कर दिया है, अध्यक्ष पद पर चुनी गई सामंत ने ट्रांस महिलाओं और महिलाओं बीच में एक अंतर बताया था, जिससे पता चलता है कि इनके लिए ट्रांस वीमेन महिलाएं नहीं हैं और इस प्रकार ये ट्रांस-एक्सक्लूसिव विचारधारा को बढ़ावा देने का काम करती हैं।” 

इसके बाद से उन्होंने अपने कुछ इन्स्टाग्राम पोस्ट डिलीट कर दिए थे जबकि सूचना है कि उनका फेसबुक अकाउंट निष्क्रिय है।

इस सन्दर्भ में रश्मि ने एक खुले पत्र के जरिये अपनी टिप्पणियों के लिए माफ़ी मांगी। “मैं इस पत्र की शुरुआत ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के सभी छात्र समुदाय से हार्दिक माफ़ी के साथ शुरू कर रही हूँ। हालाँकि हालिया घटनाक्रमों से आप सबको मेरी क्षमायाचना को लेकर विश्वास करना बेहद मुश्किल लग सकता है, लेकिन यह देखते हुए मुझे गहरा दर्द पहुंचा है कि छात्र समुदाय ने मुझ पर, मेरे घोषणापत्र पर अपने वोट और विश्वास से भरोसा जताया था, उस भरोसे को मैंने अपनी गलतियों के कारण खो दिया है।”

रश्मि ने जून में छात्र संघ की भूमिका को अपनाने का इरादा जाहिर किया था।

अपने पत्र में उन्होंने आगे लिखा था “यह बेहद अफ़सोस की बात है कि मैंने इस अद्भुत छात्र समुदाय के भीतर खुद को इस हद तक अलगाव में डाल दिया है कि वे मुझे इसके नेतृत्व के लिए अयोग्य पा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं। मैं हर उस छात्र से ईमानदारी के साथ माफ़ी मांगती हूँ जिसे मेरे एक्शन या शब्दों से दुःख पहुंचा है और मैं एक बार फिर से आप सबके विश्वास को हासिल करने का मौका चाहती हूँ।”

हालाँकि जब उनकी सोशल मीडिया पोस्ट पर हो रहे विवादों ने होने का नाम नहीं लिया तो उन्होंने पद से इस्तीफ़ा देने का मन बना लिया।

ज्ञातव्य हो कि रश्मि ने यह चुनाव चार मुख्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लड़ा था, जिसमें गैर-उपनिवेशवाद और समावेशिता सहित कोविड-19 में सभी के लिए काम करने, गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुँच और यूनिवर्सिटी को कार्बन रहित करने जैसे मुद्दे शामिल थे।

अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में पड़े कुल 3708 मतों में से उन्हें 1966 वोट हासिल हुए थे, जो कि बाकी के उम्मीदवारों के कुल मिलाकर पड़े वोटों से अधिक थे। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने यह दावा भी किया था कि वे जो साम्राज्यवादी साबित होंगे, उनकी मूर्तियों को विश्वविद्यालय से हटाए जाने के लिए पैरवी करेंगी। इसमें से क्रिस्टोफर क्रोडिंगटन की मूर्ति भी शामिल थी, एक प्रसिद्ध दास मालिक जिनकी बारबाडोस में 17वीं शताब्दी के दौरान सबसे बड़े गन्ने की खेती के बागान थे, जिनकी मूर्तियाँ यूनिवर्सिटी और कालेजों के कांफ्रेंस हाल में आज भी विराजमान हैं।

फिलहाल रश्मि सामंत ने मंगलवार के दिन फेसबुक के जरिये अध्यक्ष पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी थी, और बुधवार की रात भारत वापस आने के लिए हीथ्रो एयरपोर्ट पर अपना विमान पकड़ने से पहले उन्होंने मीडिया से कुछ बातचीत की थी।

सामंत ने अफ़सोस जताते हुए कहा था “इन्स्टाग्राम मेरा कैम्पेन पेज था, इसलिए इसे हर किसी को भेजा गया था। इन पोस्ट्स को देखने के लिए आपको काफी अंदर तक जाना पड़ेगा। मुझे नहीं पता कि किसने इन्हें खोजा। मैं दूसरों के बारे में निर्णय नहीं लेना चाहती क्योंकि मैं जानती हूँ कि किसी के बारे में राय बनाने पर कितना दुःख पहुँचता है। मुझे कई गुमनाम ईमेल प्राप्त हुए हैं। कौन अपसेट नहीं होगा? मुझे ऐसी उम्मीद थी क्योंकि आपने वो कहानियां सुनी होंगी कि जब कुछ अच्छा होता है तो वो आपसे जल्द ही छीन लिया जाता है।

22 वर्षीया सामंत ने अफ़सोस जताते हुए कहा “मैं किसी भी कम्युनिटी से नफरत नहीं करती। हर कोई सोचता है मैं बुरी हूँ, लेकिन मैं ऐसी नहीं हूँ।”

फिलहाल खबर है कि रश्मि सामंत के सभी सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट हैं।

(रविंद्र सिंह पटवाल स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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This post was last modified on February 21, 2021 12:37 pm

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