Monday, January 24, 2022

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चढ़ूनी ने बनायी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’, पंजाब में उतारेंगे प्रत्याशी

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किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कल शनिवार को ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ नाम से अपनी एक राजनीतिक पार्टी बनाई और ऐलान किया कि उनकी नई नवेली पार्टी अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

पार्टी का गठन करते हुये हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा-” देश में पार्टियों की कमी नहीं है परन्तु आज देश में बदलाव की ज़रूरत है। इन पार्टियों ने राजनीति को व्यापार बना लिया है। राजनीति में बदलाव लाने के लिए, राजनीति को शुद्ध करने के लिए हम अपनी नई धर्मनिरपेक्ष पार्टी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ लॉन्च कर रहे हैं”।

हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि हम ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ का गठन कर रहे हैं। और उनकी पार्टी अगले साल की शुरुआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी।

प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य राजनीति में शुचिता तथा अच्छे लोगों को आगे लाना होगा। राजनीतिक नेताओं की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि वे ग़रीबों के हितों को नज़रअंदाज़ करते हुए पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि “वर्तमान राजनीति प्रदूषित हो चुकी है। अब इसे बदला जाना चाहिए। सरकारें पूँजीपतियों के बारे में सोच रही हैं। उनके ही पक्ष में कानून बनाए जा रहे। किसी को भी ग़रीबों की फ़िक्र नहीं है। हमारी पार्टी केवल किसानों को टिकट देगी। फतेहगढ़ साहिब में एक किसान उम्मीदवार घोषित भी हो चुका है। हम फिलहाल पंजाब पर केंद्रित हैं। आने वाले समय में हरियाणा के चुनावों पर भी विचार किया जाएगा।”

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने अपनी नवगठित राजनीतिक पार्टी की विशेषताओं को मीडिया के सामने रखते हुए बताया कि – संयुक्त संघर्ष पार्टी धर्मनिरपेक्ष होगी। यह समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करेगी। हमारा मक़सद अमीर होना नहीं है।

भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि – “भाजपा अगर पांच प्रदेशों में चुनाव जीतती है तो भाजपा बिल वापस लाएगी। हालांकि ऐसी कोई संभावना नहीं है। फिर भी वापस लाएगी तो किसान लड़ने के लिए तैयार हैं। पंजाब में हमारा गठबंधन किसी के साथ नहीं है। 117 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हैं”।

https://twitter.com/GurnamsinghBku/status/1472130589247426561?s=19

उन्होंने आगे कहा कि क्या चुनाव केवल राजनीतिक पार्टियां ही लड़ सकती हैं? भाजपा को देश बेचने की छूट दे दो। हम उनको लगाम लगाने के लिए ये कर रहे हैं। हमारी बदकिस्मती है कि देश में गुंडाराज है।

पंजाब में 80 लाख वोट किसानों के हैं। 59 लाख वोट से सरकार बनी है। राजनीति में ग़लत काम करने वालों को निकालने की ज़रूरत है।

किसान नेता चढ़ूनी ने आगे कहा कि “किसान, मजूदर और व्यापारी को एकजुट होना पड़ेगा। पंजाब में नौजवान परेशान हैं। जिन अंग्रेजों को निकाला था, हमारा युवा उन्हीं अंग्रेजों के पास जा रहा है। पंजाब के अंदर कारोबार और रोज़गार नहीं है। हरसंभव प्रयास करेंगे कि पंजाब में हर व्यक्ति को रोज़गार मिले। कृषि में बड़े बदलाव की ज़रूरत है। खेती की विदेशों में डिमांड हो सकती है”।

पैदा करने से लेकर उपभोक्ता तक का कारोबार किसान के पास होगा। ऐसी खेती की जाएगी, जिसकी विदेशों में डिमांड हो। अफीम की खेती शुरू करें तो पंजाब उन्नति कर सकता है। अफीम नशा नहीं है, कमाई भी है। इसे हंसी में ना लेना।

उन्होंने आगे कहा कि 32 किसान संगठनों में से 9 जत्थेबंदिया अलग हुई हैं। वे न्यूट्रल रहेंगे। उनकी पार्टी का रजिस्टर्ड होना बाकी है। अभी चुनाव चिह्न नहीं मिला।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा खुद को सस्पेंड किये जाने के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि “एसकेएम ने मुझे इसलिए सस्पेंड किया कि ये पंजाब में इंटर क्यों कर गया। हम बता चुके हैं कि पंजाब के ऊपर लोगों की जेब का पैसा आएगा नीचे वाले की जेब में आएगा”।

उन्होंने कहा कि -” मैं पंजाब में चुनाव नहीं लड़ रहा। शिव कुमार कक्का आरएसएस का प्रधान रहा है। पंजाब में केजरीवाल के चार मेंबर आए हैं। वे जनता के बीच आ जाते और भूख हड़ताल पर बैठते”।

संयुक्त संघर्ष पार्टी’ के पदाधिकारी और पार्टी प्रधान रिछपाल सिंह ने कहा, “राजनीति में आने का मकसद यही है कि लोहा लोहे को काटता है। राजनीति में खराब लोगों को हराना है और अच्छे लोगों को लाना है। पंजाब में किसानों की दुर्दशा की दोषी अकाली दल और कॉन्ग्रेस दोनों हैं। हर संघर्ष में पहले पंजाब आगे रहा है। इसलिए हमने मिशन पंजाब के तौर पर शुरूआत की है।”

वहीं एक पत्रकार के सवाल के जवाब में किसान नेता चढ़ूनी ने कहा कि वह खुद पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

एक अन्य पत्रकार के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की कोशिश करेगी। गौरतलब है कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी राज्य के किसान संगठनों से आगामी चुनाव लड़ने के लिए कहते रहे हैं।

गौरतलब है कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी 40 किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के सदस्य हैं। एसकेएम ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ एक साल तक चले किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया। हाल ही में गुरु नानक जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के बाद किसान आंदोलन स्थगित हुआ है।

संयुक्त किसान मोर्चा मिशन पंजाब के ख़िलाफ़

इससे पहले जुलाई में गुरनाम सिंह चढ़ूनी द्वारा किसानों को 2022 के असेम्बली चुनाव लड़ने की सलाह देने पर संयुक्त किसान मोर्चा निलंबित कर दिया था।

संयुक्त किसान मोर्चा की कार्रवाई के बावजूद भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) अध्यक्ष, गुरनाम सिंह चढ़ूनी अपने रुख़ पर अडिग थे और उन्होंने पंजाब में अपने ‘मिशन 2022’ के लिए, प्रचार भी शुरू कर दिया था, और पूरे प्रांत में रैलियां और जनसभाएं करके किसानों को चुनावों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहे थे।

14 जुलाई को पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक के बाद, वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि – “किसान इकाई चढ़ूनी के मिशन 2022 के ख़िलाफ़ है।

सिंघु सीमा विरोध स्थल के पास एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, एसकेएम के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि चढ़ूनी कई मौकों पर ऐसा नहीं करने के लिए कहे जाने के बावजूद “मिशन पंजाब” के बारे में बयान दे रहे हैं। फिलहाल हम (केंद्र के कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ ) लड़ रहे हैं। हम कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं। इसके लिए, आज हमने उन्हें सात दिनों के लिए निलंबित करने का फैसला किया है। वह कोई बयान या मंच साझा नहीं कर पाएंगे। उन पर ये प्रतिबंध लगाए गए हैं।” .

19 नवंबर 2021 को किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने फिर कहा कि -” गुरनाम सिंह चढ़ूनी के साथ किसी भी दूसरे नेता की तरह बर्ताव किया जाएगा। तब बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा था कि – “किसान चढूनी और उनके समर्थकों को काले झंडे दिखाएंगे”।

किसान संगठन बीकेयू एकता उगरांहा के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगरांहा ने शुक्रवार को घोषणा की कि अगर वे वादे पूरे नहीं कर सकते हैं तो वे राजनीतिक दलों का विरोध करेंगे। उगरांहा ने कहा कि अगर वे चुनावी क्षेत्र में कूदते हैं, जीतते हैं और लोगों से किए गए वादों को भूल जाते हैं तो वह वरिष्ठ कृषि नेताओं बलबीर सिंह राजेवाल और गुरनाम सिंह चढ़ूनी का भी विरोध करेंगे।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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