Subscribe for notification

हरियाणा में और तेज हुआ किसान आंदोलन, गांवों में बहिष्कार के पोस्टर लगे

खेती-किसानी विरोधी तीनों बिलों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद हरियाणा-पंजाब में किसान आंदोलन और तेज होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति जब रविवार को बिल पर हस्ताक्षर कर रहे थे तो उसी वक्त हरियाणा के अंबाला जिले में गांवों में किसान पोस्टर लगा रहे थे, जिनमें भाजपा और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेताओं को गांव में न आने की चेतावनी दी गई थी। रविवार को देर रात एक्टिविस्ट और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने हरियाणा के डिप्टी सीएम और जेजेपी सुप्रीमो दुष्यंत चौटाला के बहिष्कार का आह्वान कर दिया।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि दुष्यंत चौटाला जैसे नेताओं का किसानों को बहिष्कार कर देना चाहिए। समझा जाता है कि योगेन्द्र यादव हरियाणा में किसान आंदोलन को धार देने की तैयारी में हैं। इस बीच, हरियाणा के मेवात इलाके से किसान अधिकार यात्रा भी शुरू हो गई है, जो राज्य के विभिन्न इलाकों में जाने वाली है। उधर, पंजाब में किसान अभी भी रेल पटरियों पर बैठे हुए हैं।

भारत बंद वाले दिन स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव हरियाणा में सिरसा जिले के रतिया कस्बे में थे। पूरी सिरसा बेल्ट ऐसी है जहां पंजाब के अलावा राजस्थान के किसानों की भी रिश्तेदारी है और किसान राजनीति के मद्देनजर सिरसा, अंबाला, हिसार जिले बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए योगेन्द्र रतिया में यूं ही नहीं पहुंच गए थे। यह सोची समझी रणनीति है, जिसके पीछे हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में किसान आंदोलन को सशक्त नेतृत्व दिया जा सके। इसका खुलासा रविवार देर रात योगेन्द्र यादव के ट्वीट से भी हो गया।

उन्होंने हरियाणा के किसानों को सीधे-सीधे दुष्यंत चौटाला समेत जेजेपी और भाजपा नेताओं के बहिष्कार की सलाह दे दी है। उन्होंने कहा कि किसान उन दलों और नेताओं को न भूलता है और न माफ करता है, जो खुद को किसानों का नेता होने का दावा करते हैं और जिन्होंने इन बिलों को पास कराने में मदद की है। उन्होंने दुष्यंत चौटाला को संबोधित ट्वीट में कहा कि सुन लें @Dchautala किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले जिन नेताओं और पार्टियों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए इन किसान विरोधी कानूनों को पास करने में मदद दी है, वो गद्दार कहलाएंगे। अफसोस कि चौधरी देवी लाल के पोते को यह दाग़ लेकर जीना पड़ेगा।

हरियाणा में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर जेजेपी पर पड़ने वाला है। पंजाब में भाजपा के प्रमुख सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के संबंध तोड़ने के बाद हरियाणा में भी भाजपा की सहयोगी जेजेपी पर ठीक उसी तरह का दबाव है। हालांकि दुष्यंत चौटाला के बयानों से फिलहाल इस तरह के कोई संकेत नहीं हैं कि फिलहाल खट्टर सरकार से उनका समर्थन वापस लेने का कोई इरादा है। लेकिन जेजेपी के ही चार विधायकों ने दुष्यंत की लाइन न लेते हुए किसानों के आंदोलन को समर्थन दे दिया है। इनमें से दो विधायक तो 25 सितम्बर के प्रदर्शन में किसानों के साथ शामिल भी हुए।

अंबाला में 24 घंटे के अंदर जो कुछ हुआ है, उसने जेजेपी और भाजपा दोनों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अंबाला जिले के गांव फड़ौली में दीवारों पर ऐसे पोस्टर देखे गए, जिसमें लिखा है – गांव फड़ौली में बीजेपी और जेजेपी पार्टी का पूर्ण रूप से बहिष्कार। पोस्टर को समस्त ग्रामवासियों की तरफ से जारी करने का दावा किया गया है। पोस्टर में दोनों दलों के नेताओं को पिटाई की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि फड़ौली गांव के सरपंच सुनील कुमार ने इस बात की पुष्टि नहीं कि गांव में ये पोस्टर किन लोगों ने लगाए। जबकि गांव में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकार्ताओं ने कहा कि पोस्टर उन लोगों ने लगाए हैं।

अंबाला के जालबेहड़ा गांव में 24 सितम्बर को भी इसी तरह की पंचायत भारतीय किसान यूनियन नेताओं ने आयोजित की थी। उस पंचायत में भी जालबहेड़ा गांव में बीजेपी और जेजेपी नेताओं को न आने की चेतावनी दी गई थी। गांव के बुजुर्ग किसान रूल्दा राम ने कहा कि अगर इन दोनों पार्टियों के नेता हमारे गांव में आते हैं तो उन्हें हमारे गुस्से का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि 25 सितम्बर को किसान संगठनों ने भारत बंद का आयोजन किया था, जो पंजाब-हरियाणा में सबसे ज्यादा कामयाब रहा था।

अंबाला के गांवों में इस घटनाक्रम के बाद खट्टर सरकार ने 27 सितम्बर से खऱीफ फसलों की खरीदारी मंडियों में शुरू करा दी है लेकिन उसका कोई खास असर किसान आंदोलन पर नहीं पड़ा। हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज जो अंबाला से हैं, गांवों में पोस्टर लगने के बाद रविवार को भाजपा किसान मोर्चा के पदाधिकारियों से मंत्रणा की। हालांकि पत्रकारों को बताया गया कि यह बैठक धान की खऱीद की व्यवस्था को लेकर थी।

हरियाणा में किसान आंदोलन के साथ अब कांग्रेस खुलकर आ गई है। आज चंडीगढ़ में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन कर राज्यपाल को इस मुद्दे पर ज्ञापन देने वाले हैं। मेवात में किसान अधिकार यात्रा शुरू हुई है, जिसका नेतृत्व कांग्रेस विधायक दल के उपनेता आफताब अहमद कर रहे हैं। मेवात का इलाका दक्षिण हरियाणा का हिस्सा और दूसरी तरफ राजस्थान की सीमा से भी लगा है। किसान अधिकार यात्रा के जरिए कांग्रेस राज्य के हर इलाके के किसानों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में है।

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत इसी इलाके से आते हैं और उनके लिए भी यह किसान अधिकार यात्रा चुनौती पेश कर रही है। यात्रा में जिस तरह से गांवों के लोग जुड़ रहे हैं, उसकी एक झलक रविवार को देखने को मिली, जब मेवात के आकेड़ा गांव में आफताब अहमद को हुक्का भेंट किया गया। हरियाणा के गांवों में हुक्के को विशेष सम्मान की नजर से देखा जाता है। हुक्का भेंट करने का मतलब है सम्मान करना। हालांकि ये पूरी तरह से राजनीतिक शो है लेकिन किसानों को जीतने के लिए हरियाणा में कांग्रेस हर नुस्खा आजमा रही है।

बहरहाल, पंजाब में भी किसानों का आंदोलन जारी है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले अमृतसर-दिल्ली रेल मार्ग पर किसानों ने अमृतसर में कब्जा कर रखा है। उनका यह आंदोलन पिछले बुधवार से शुरू हुआ था जो इस रिपोर्ट के छपने तक जारी है। गांवों के गुरुद्वारों से लंगर तैयार कर रेल पटरियों पर बैठे किसानों को खिलाया जा रहा है। संघर्ष समिति के महासचिव स्वर्ण सिंह का कहना है कि अगर पंजाब से चुनकर गए सभी 13 सांसद किसानों के हमदर्द हैं तो वे लोकसभा-राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दें। दरअसल, यह मांग शिरोमणि अकाली दल की उस प्रतिक्रिया के बाद आई है, जो उसने कृषि बिलों पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद दिया है।

अकाली दल ने इसे किसानों के लिए काला दिन बताया लेकिन यह साफ नहीं किया कि उसकी आगामी रणनीति क्या होगी। इसके बाद पंजाब के किसान संगठन ने सांसदों के इस्तीफे की मांग रख दी है। किसान नेताओं ने कहा कि बादल परिवार और अकाली दल के नेता सिर्फ टाइम पास कर रहे हैं और हम लोगों को बेवकूफ समझ रहे हैं। हमारा आंदोलन 29 सितम्बर तक जारी रहेगा। उसके बाद अगली रणनीति घोषित की जाएगी।

(यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on September 28, 2020 9:49 am

Share