Tuesday, November 29, 2022

ग्राउंड रिपोर्ट: मानसून की बेरुखी से बर्बादी के कगार पर खड़े हैं चंदौली के किसान

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चंदौली\वाराणसी। आया सावन झूम के… अब सिर्फ सिनेमा और समाज में किंवदंती में बनकर रह ही गया है। उत्तर प्रदेश में धान उत्पादन के बड़े हिस्से में शुमार पूर्वांचल के दर्जनों जनपद सूखे की कगार पर खड़े हैं। खेतों में फावड़ा चलाने पर धूल उड़ रही है और आगामी 20 जुलाई तक मूसलाधार बारिश नहीं हुई तो करोड़ों किसान बर्बाद होने के कगार पर जा पहुंचेंगे। चंदौली, वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया, बस्ती, भदोही समेत कई जनपदों के किसान बारिश की राह तक रहे हैं। कृषि विभाग चंदौली के आंकड़ों के अनुसार चंदौली में धान की कुल खेती का रकबा 1 लाख 13 हजार 613 हेक्टेयर है। अभी तक महज 11 हजार 432 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है। जुलाई का आधा महीना गुजर गया और मानक से भी कम बारिश दर्ज की गई है।  इतना ही नहीं साल 2022 में तकरीबन 30 सालों का भी रिकार्ड टूट गया है। 

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वर्ष 1991 से 2020 तक जुलाई महीने में औसतन 12 दिन बारिश हुई थी। इस बार सिर्फ दो दिन यानी पहले दिन 103 और दूसरे दिन 63 मिलीमीटर ही बारिश हो सकी है। ऐसे में चंदौली, वाराणसी, आजमगढ़ और बलिया समेत कई जिलों में किसान निजी सिंचाई पम्प से जुड़े हुए हैं। लिहाजा, पहले से ही घाटे का सौदा बनी खेती-किसानी को आगे बढ़ाने के लिए किसान हजारों-हजार रुपए डीजल फूंककर धान की रोपाई में कर रहे हैं। मसलन, तमाम जद्दोजहद के बाद रोपी गई धान की फसल का भविष्य बिन बारिश आंधी में दीपक जलाने जैसा है।  

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इलाके से गुजरने वाली नहर का दृश्य।

यूपी के पूर्वी छोर पर बसे धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली भयंकर सूखे की चपेट में है। धान की बुआई के पीक में मानसून की नाराजगी से यहां के लाखों किसान मायूस हैं। बिन बरसात खेत सूखे पड़े हैं और खेतों से धूल उड़ रही है। जिले में लगे आधा दर्जन पंप कैनाल पहले से भ्रष्टाचार और लापरवाही के शिकार हैं। भूपौली और नरवन इलाके में चलने वाले पंप कैनाल का पानी खेतों तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ दे रहा है। सैयदराजा, बहरानी, सकलडीहा, मानिकपुर सानी, तेजोपुर, नौगढ़, चकिया,  नियामताबाद, बौरी, खुरहुजा, सरने, कमालपुर, भतीजा, जलालपुर, चहनियां, बगही, नौबतपुर, सोगाई, भुजना समेत कई दर्जनों गांव में पानी की कमी के कारण किसान परेशान हैं, इनको कुछ सूझ ही नहीं रहा है कि करें भी तो क्या ?

खर-पतवार और रोग की आशंका 

चंदौली-जलालपुर के किसान अमरनाथ कुशवाहा और राजनारायण सिंह ‘जनचौक’ को बताते हैं कि ‘किसानी साल दर साल घाटे का सौदा बनती जा रही है। धान की फसल से कुछ उम्मीद रहती है। ऐसे में मानसून के दगा देने से कोई रास्ता ही नहीं सूझ रहा है। अब तक 15 हजार रुपए से अधिक का डीजल जलाकर एक तिहाई रकबे की भी बुआई नहीं की जा सकी है। बिजली पम्प का पानी भी बारिश का सहारा नहीं मिलने से कारगर साबित नहीं हो रहा है। जिसकी खेत में रोपाई भी हो रही है, वह सूखने लग रहा है। कुछ ही दिनों में पानी की कमी से जहां की फसलों में बेहिसाब खर-पतवार उग आएंगे, जो अनचाहा आर्थिक बोझ डालेंगे। वहीं, देर से धान की बुआई के चलते फसल में रोग लगने की आशंका भी है। कुल मिलाकर किसानों को न तो सरकार राहत दे रही है और ना ही मौसम।’ 

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पीली पड़नी शुरू हो गयी खेतों में तैयार धान का नर्सरी।

चंदौली के 82 फीसदी खेतों को पानी का इंतजार 

दरअसल, पूर्वी उत्तर प्रदेश में चंदौली को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां पर धान की बेहद अच्छी पैदावार होती है। सभी नागरिकों का जीवन प्राथमिक कार्यों यानी कि खेती-बाड़ी पर ही निर्भर है। ऐसे में बारिश न होने की वजह से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। चंदौली मे कुल 2, 56000 किसान धान की खेती करते हैं। जनपद में साल 2022 में कुल 113600 हेक्टेयर पर धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उधर, मौसम विभाग के अनुसार जिले में अब तक जनपद में कुल 234.3 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी। लेकिन अभी तक सिर्फ 81.7 मिलीमीटर यानी 34 फीसदी ही बारिश हो पाई है। निजी, कैनाल और नहर होने के बावजूद अब तक महज 12 फीसदी ही धान की रोपाई ही हो पाई है, जबकि सामान्य स्थिति में अब तक कम से कम 30 फीसदी धान की रोपाई पूरी हो जानी चाहिए थी। जुलाई के अंत तक यह आंकड़ा 80 फीसदी हो जाना चाहिए था। लेकिन यहां तो धान की नर्सरी बचाना ही मुश्किल साबित हो रहा है।

कर्ज में डूबते किसान और पसरती उदासी 

मानिकपुर सानी गांव के किसान व सामाजिक कार्यकर्ता राम विलास मौर्य भी धान की रोपाई के लिए पानी की कमी से जूझ रहे हैं। रामविलास कहते हैं कि ‘पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह कहते थे कि किसानों की एक आंख संसद पर दूसरी आंख खेत की मेड़ पर होनी चाहिए। किसी भी तरह की परेशानी या संकट आने पर सड़क पर उतर कर आंदोलन भी करना चाहिए। लेकिन मौजूदा वक्त में किसानों, मजदूर, युवा, महिला समेत कई ग्रामीण समस्याओं पर कौन कितना जिम्मेदार है, बताने की आवश्यकता नहीं है ? पूर्वांचल का किसान उपेक्षा के चलते अभाव और तंगहाली के भंवर में उलझा हुआ है। वह जानता है कि किसानी में घाटे के सिवाय और कुछ हासिल नहीं है। फिर भी वह खेती करता है।  

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इलाकाई किसान के साथ सामाजिक कार्यकर्ता व किसान राम विलास मौर्य।

रामविलास आगे कहते हैं, ‘सरकार और जिले के किसान भी जानते हैं कि अब पर्यावरण में पहले वाली बात नहीं रह गई है। कल-कारखानों के बेलगाम होने और प्राकृतिक जलस्रोतों के अंधाधुंध दोहन से क्लाइमेट का सिस्टम ही एकदम उलट सा गया है। जाड़े में बरसात और पीक बारिश के सीजन में सूखा या फिर पानी-पानी यानी बाढ़ की स्थिति। हर तरफ से किसान परेशान हैं। जनपद में महज मुट्ठी भर ही किसान अब अपने निजी साधनों से धान की रोपाई कर पाए हैं। शेष लाखों-लाख किसान बारिश की बाट जोह रहे हैं। हमारी  जिलाधिकारी से मांग है कि जिले में बारिश और रोप-जोत का सर्वे करा कर जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। साथ ही किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। इससे किसान मौसमी आपदा से निपट सकें। वरना वे दिनों-दिन कर्ज में डूबते जाएंगे और समाज में उदासी का आलम पसर जाएगा।’ 

सावन में उड़ रही धूल 

मानिकपुर सानी-भुजना सीमा पर कई बीघे की खेती करने वाले किसान गोपाल, शंकर, बजरंगी, नन्हकू, लल्लन, घासी अली, सोहराब, मुत्तुर, सुरेश मौर्य, सवरू बिन्द, संजय बिन्द, वीरेंदर सिंह समेत सैकड़ों किसान को अच्छी बारिश का इंतज़ार है। किसान शंकर के मुताबिक ‘हमें अपने गांव की सीमा पर कर्मनाशा नदी में लगे 20 क्यूसेक की क्षमता वाले पंप कैनाल से बड़ी उम्मीद थी कि इस बार कैनाल चालू हो जाएगा और धान की रोपाई अच्छी से कर सकूंगा। हुआ इसके ठीक उलट। शासन और तंत्र की उदासीनता से कैनाल तो शुरू ही नहीं हो सका। साथ ही मानसून ने भी मुंह फेर लिया है। बड़ी कठिन जिंदगी है किसानों की। नदी भी सूखकर बीच धार में जा समाई है। मुझे ऐसा लगता है कि धान की बुआई करने के बाद भी सारी फसल काटना पड़ सकता है’। 

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किसान गोपाल पाठक

धनंजय मौर्य रूंधे गले से बताते हैं, ‘पिछले तीन सालों से वो धान की महीन प्रजाति और ब्लैक राइस की खेती करते आ रहे हैं। काला धान लगाने के लिए मैंने पिछले साल खेत का एक बड़ा हिस्सा रेहन रखा और कुछ रकम बैंक से लोन लिया। फसल पकने के बाद उपज अच्छी हुई, लेकिन बिक्री नहीं होने से लाखों रुपए का जबरदस्त घाटे ने मेरी आर्थिक स्थिति को ही तोड़कर रख दिया है। अब इस साल सोचे थे कि समय से धान की बुआई कर घाटे से उबरने का प्रयास करेंगे, लेकिन यह भी उम्मीद मौसम की बेरुखी से बेईमानी लग रही है।’

किसानों ने खोला सिंचाई विभाग के खिलाफ मोर्चा 

नरवन और महाईच परगना क्षेत्र में नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर कमालपुर-डेढ़गावा गांव में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों का धरना रविवार को भी लगातार तीसरे दिन जारी रहा। किसानों ने चेताया कि जब तक नहरों के आखिरी छोर तक पानी नहीं पहुंचता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। हालांकि थाना अध्यक्ष विपिन कुमार धरना स्थल पहुंचे और किसानों की समस्या को सिंचाई विभाग के अधिकारियों से फोन के जरिए पहुंचाया। 

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डेढ़गवा-कमालपुर में नहरों में टेल तक पानी की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसान।

भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष दीनानाथ ने कहा कि ‘खेतों में पानी के अभाव में धान की नर्सरी सूख रही है। कुछ किसान निजी संसाधन से धान की नर्सरी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। किसान पानी को लेकर काफी चिंतित हैं। अधिकारी कार्यालयों में बैठकर किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। जब तक नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचता है, तब तक किसानों का धरना जारी रहेगा। मांगे पूरी ना होने पर आमरण अनशन व आत्मदाह तक किया जाएगा।’ इस मौके पर मंजूर खान, सुरेंद्र सिंह, अखिलेश सिंह, पवन, राकेश, जंग बहादुर, राघव, फेकू कुशवाहा, बांके सिंह, सुभाष राय, विपिन, प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष जगमिंदर यादव व त्रिभुवन यादव आदि उपस्थित रहे।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई खेतों की धमनी 

किसान के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम नगीना सिंह ‘जनचौक’ को बताते हैं कि ‘यह पहली बार नहीं है, जब मौसम हम लोगों को धोखा दे रहा है। मानसून से धोखा खाते-खाते किसान जब मौसम की फितरत को समझ गए हैं। महंगा डीजल फूंकने के अलावा उनके पास विकल्प भी नहीं है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के प्रयासों से साल 1966 में बिजली और बगही से लेकर टेल मानिकपुर तक नहर आ गई थी। हाल के वर्षों में सरकार की उदासीनता के चलते नहर और करार पट जाने से पानी जरूरतमंद गांवों तक पहुंच नहीं पाता है।

पुराने लोग इसके गवाह हैं जब तक कांग्रेस थी, तब तक सिंचाई के लिए किसानों को पानी मिलता रहा। कांग्रेस के बाद नहरों की सफाई व देखरेख करने वाला कोई नहीं रह गया। सिंचाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारी झांकने-ताकने तक नहीं आते हैं। बसपा-सपा का किसानों से खास लगाव नहीं था, इससे भी रद्दी भाजपा निकली। इसका खामियाजा, छोटे-छोटे, बड़े और बंटाईदार किसानों को दिक्कत हो रही है। अंग्रेजों के मुखबिरों को खेती-किसान से कोई मतलब नहीं है। ये देश को लूटने और बेचने में लगे हैं। नियामताबाद गांव के किसान अजय सिंह की पीड़ा भी दूसरे किसानों की तरह है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह के अंदर बरसात नहीं हुई तो किसान बर्बाद हो जाएगा।

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२-३ जुलाई को सीजन की पहली बारिश में करइल के खेतों में रोपाई करतीं महिलाएं।

आश्वासन का किसान क्या करेंगे ?

सीएम योगी ने सूबे में सूखे जैसे बनते हालात की समीक्षा कर कहा कि कृषि, सिंचाई, राहत, राजस्व आदि सम्बंधित विभाग अलर्ट मोड में रहें। सीएम ने किसानों की फसलों की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को हर परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा है। यूपी में इस साल 13 जुलाई तक मात्र 76.6 मिलीमीटर बारिश हुई है ,जो कि सामान्य वर्षा 199.7 मिलीमीटर यानी लगभग 62 फीसदी कम है। खरीफ फसलों में 13 जुलाई तक 96.03 लाख हेक्टेयर जमीन पर फसल लगाई जाती है, लेकिन अब तक सिर्फ 42.41 लाख हेक्टेयर पर ही बुवाई हो सकी है, जो कि लक्ष्य का मात्र 44.16% ही है। इसमें 45 फीसदी हिस्सा अकेले धान की बुआई का है। चंदौली समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष बलिराम सिंह यादव, योगी की बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। वह कहते हैं कि पूर्वांचल को देख लीजिये, कितने लोगों ने धान की बुआई की है, जिनके पास साधन हैं वे जुटे हुए हैं, शेष पूरी आबादी अब भी बारिश का इंतज़ार कर रही है। अब बहुत देर हो चुकी है। सीएम योगी पूर्वांचल समेत कई अन्य जिलों को भी सूखाग्रस्त घोषित करें और सर्वे करा कर किसानों को उचित मुआवजा दें। आश्वासन का किसान क्या करेंगे ? ‘  

आजमगढ़ में बारिश के लिए मांगी दुआ 

आजमगढ़ जिले में सूखा पड़ने का अंदेशा देख मुस्लिम समाज के लोगों ने शनिवार को बारिश के लिए नमाज पढ़ी। मौलाना ने बताया कि कुदरत को खुश करने के लिए नमाज पढ़ी गई है। जिसमें बारिश के लिए दुआ मांगी गई है। विशेष नमाज का यह आयोजन बिलरियागंज कस्बा स्थित जामियाअतुल फलाह के मैदान में किया गया। जामियाअतुल फलाह के डायरेक्टर मौलाना ताहिर मदनी ने कहा कि रात हो या दिन लोग गर्मी से परेशान हैं। पूरा जिला सूखे की चपेट में आता जा रहा है। पशुओं के लिए हरा चारा भी नहीं मिल रहा है। बरसात के लिए ही विशेष नमाज के माध्यम से अल्लाह ताला से गुनाहों की माफी मांगते हुए बरसात के लिए दुआ मांगी गई।

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बदहाल पानी का पंप

अनुमान गलत न हुए तो बारिश के आसार 

बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो एसएन पांडेय ने बताया कि बारिश के अभाव में बांदा, चंदौली, हमीरपुर, देवरिया, जालौन जिलों के साथ-साथ बलिया, बस्ती, गोरखपुर, महराजगंज, संतकबीर नगर और श्रावस्ती जैसे भयंकर सूखे की चपेट में हैं। आगामी 18, 19 और 20 जुलाई को कई जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है। लेकिन, चंदौली और बनारस में कम से कम पांच दिन मानसून की बारिश तो बिल्कुल नहीं होगी। कुछ इलाकों में छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। मानसून अगले पांच दिनों में एक्टिव हो सकता है। इसके बाद तेज बारिश के अनुमान हैं।

( वाराणसी से पत्रकार पीके मौर्य की रिपोर्ट।)

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