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Sunday, September 19, 2021

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सुपरटेक मामला: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को कहा- आप के आंख-नाक-कान से टपकता है भ्रष्‍टाचार

सुपरटेक टावर मामले में उच्चतम न्यायालय ने नोएडा अथॉरिटी को जमकर फटकार लगाई। अथॉरिटी को 'भ्रष्‍टाचारी संस्‍था' बताते हुए अदालत ने कहा कि वह बिल्‍डर से मिली हुई है और एक तरह से सुपरटेक की पैरवी कर रही है। जस्टिस धनंजय...

सर्विलांस तकनीक के इस्तेमाल पर रोक के लिए सिविल सोसाइटी संगठनों और विशेषज्ञों ने लिखा खुला खत

सर्विलांस तकनीक की बिक्री, लेनदेन और इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने के लिए सरकारों का आह्वान करता हुआ सिविल सोसाइटी संगठनों और विशेषज्ञों का साझा खुला खत- हम सब अधोहस्ताक्षरी नागरिक समाज संगठन और स्वतंत्र विशेषज्ञ NSO ग्रुप के स्पाइवेयर...

आदिवासी सरना समाज अनजाने में हिन्दू गिरफ्त में तो नहीं आ जा रहा?

झारखंड की राजधानी में आदिवासियों के हृदयस्थल करमटोली चौक स्थित केंद्रीय धुमकुड़िया में आज भवन निर्माण कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। बड़े-बड़े सुंदर चेहरों के साथ पूरा पोस्टर, नेता, कार्यकर्ता के फोटोज आये हुए हैं। बहुत खुशी की बात...

वंचित समाज की राजनीतिः स्वार्थ और सत्ता से समझौते तक

भारत के जातिवादी समाज का निर्माण, धर्मसत्ता और सामंतशाही की सेवा और मेवा के लिए किया गया है। आज की धर्मसत्ता और सामंतशाही, जातिवाद को तानते, नाथते, फंदों में फंसाते, वंचितों को गुलाम बना रही है। गैर बराबरी की...

राजसत्ता के लिए अतिरिक्त ताकत और जनता के लिए अतिरिक्त संकट साबित हुआ कोविड

कोविड से कई चीजें बदली हैं ये बात सच है, लेकिन किसी भी तरह का संरचनात्मक या कोई बड़ा बदलाव समाज, राजनीति या अर्थनीति में हुआ है ऐसा मानना थोडा मुश्किल है। स्थितियों का मूल्यांकन दो भागों में बांटकर...

बच्चे पालने के सवाल पर स्त्री और पुरुष के बीच पैदा हुआ पहला श्रम विभाजन

मानव विज्ञान में खुद को लगा देने का उनका संकल्प महज किसी बौद्धिक उत्सुकता का परिणाम नहीं था । इसका गहरा राजनीतिक-सैद्धांतिक मकसद था । गहन ऐतिहासिक ज्ञान के आधार पर वे वास्तविकता के सबसे करीब के उस क्रम...

प्यू के सर्वे में सामने आयी भारतीय समाज की कूढ़मगजता

इलमों बस करीं ओ यार इक्को अलफ तेरे दरकार पढ़ पढ़ लिख लिख लावें ढ़ेर ढ़ेर किताबा चार चुफेर गिरदे चानण, विच्च हनेर पुच्छो रहा ते खबर न सार.. (तुमने बहुत ज्यादा ही पढ़ाई कर ली है, तुम्हें एक ही कायदा सीखने की जरूरत है,...

भारत में नहीं हो पाएगा किसी हिटलर का उदय

जो अपने विषाद के क्षण में कहते पाए जाते हैं कि ‘भारत बदल गया है’, वे हमारे जीवन के यथार्थ के विश्लेषण में बड़ी चूक करते हैं ।सच यह है कि भारत नहीं, भारत का शासन बदल गया है...

बिरसा मुंडा: 25 साल का जीवन, 5 साल का संघर्ष और भगवान का दर्जा!

भारत के इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे आदिवासी नायक हैं जिन्होंने झारखंड में अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आदिवासी समाज की दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। अंग्रेजों द्वारा थोपे...

पुस्तक समीक्षा: ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ यानी संगीत के बहाने समाज की चीर-फाड़

रणेंद्र का ताजा उपन्यास 'गूंगी रुलाई का कोरस' चर्चा में है। राजकमल प्रकाशन से आया यह उपन्यास अमेजन पर उपलब्ध है। रणेंद्र ने झारखंड में प्रशासनिक दायित्व निभाते हुए साहित्य की दुनिया में राष्ट्रीय पहचान बनाई। इससे पहले उनके...
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सरकार चाहती है कि राफेल की तरह पेगासस जासूसी मामला भी रफा-दफा हो जाए

केंद्र सरकार ने एक तरह से यह तो मान लिया है कि उसने इजराइली प्रौद्योगिकी कंपनी एनएसओ के सॉफ्टवेयर...
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