Tuesday, October 19, 2021

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बाबरी मस्जिद ध्वंस: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जज से कहा- हर कीमत पर हो 30 सितंबर तक फैसला

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उच्चतम न्यायालय ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अपना फैसला सुनाने के लिए सीबीआई अदालत की समय सीमा बढ़ाकर अब 30 सितंबर कर दिया है। इससे जुड़े मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा सहित 32 लोगों पर आपराधिक आरोप हैं। न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को देख रहे विशेष जज एस के यादव की ट्रायल की स्टेट्स रिपोर्ट देखने के बाद मामले की सुनवाई पूरी करने की समय सीमा को एक महीना बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है।

पहले ट्रायल पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया था। अयोध्या मामले के विशेष न्यायाधीश ने केस की प्रगति रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय में दाखिल करने के साथ ही, मुकदमे को समाप्त करने की खातिर कुछ और समय देने के लिए एक आवेदन पत्र भी दिया था।

पीठ ने 19 अगस्त के अपने आदेश में कहा है कि विद्वान विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव की रिपोर्ट को पढ़कर और यह देखते हुए कि कार्यवाहियां अंत की ओर पहुंच रही हैं, हम एक महीने का समय देते हैं। जिसका मतलब है 30 सितंबर, 2020 तक का समय कार्यवाही पूरी करके निर्णय देने के लिए दिया जाता है। इस संबंध में आखिरी आदेश मई में आया था, जब पीठ ने सीबीआई अदालत को विशेष न्यायाधीश के एक ऐसे ही अनुरोध पर ध्यान देने के बाद 31 अगस्त, 2020 तक निर्णय देने का निर्देश दिया था।

सीबीआई की विशेष अदालत ने 354 अभियोजन पक्ष के गवाहों की परीक्षा पूरी होने के बाद 5 जून से सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अभियुक्तों के बयान दर्ज कर रही है। इसके बाद अदालत बचाव पक्ष को अपने बचाव में यदि कोई साक्ष्य हो तो पेश करने की इजाज़त देगी। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से बहस की जाएगी। बहस पूरी होने के बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी।  

6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद, दो प्राथमिकी दर्ज की गईं। एफआईआर नंबर 197/92 कारसेवकों के खिलाफ दायर किया गया था, जिन्होंने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था जबकि एफआईआर नंबर 198/92, आडवाणी, जोशी, भारती, सिंह, भाजपा के राज्य सभा सांसद विनय कटियार, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा और अन्य के विरुद्ध उत्तेजक भाषण” देकर बाबरी विध्वंस के लिए कारसेवकों को उकसाने के आरोप में दर्ज़ किया गया था।

तब लगभग 47 और मामले दर्ज किए गए थे, जिन्हें विध्वंस के मामले में मिला दिया गया था। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कल्याण सिंह को राजस्थान के राज्यपाल के उनके कार्यकाल के सितंबर, 2019 में खत्म होने के बाद इस मुकदमे में एक आरोपी बनाया गया है।

बाल ठाकरे का भी नाम इसमें था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनका नाम हटा दिया गया था। तीन अन्य हाई-प्रोफाइल अभियुक्तों गिरिराज किशोर, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल और विष्णु हरि डालमिया की मृत्यु मुकदमे की सुनवाई के दौरान हो गई है, इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

इसके पहले 8 मई, 2020 को मामले की सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने ट्रायल को पूरा करने के लिए 31 अगस्त, 2020 तक का समय दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत अगस्त अंत तक मुकदमे को पूरा करे और फैसला दे। विशेष अदालत अगस्त की समय सीमा का उल्लंघन ना करे। विशेष अदालत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का उपयोग करना चाहिए। स्पेशल जज एस के यादव ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखकर और समय बढ़ाने की मांग की थी। 20 अप्रैल को ही 9 महीने की सीमा पूरी हो चुकी है।

इसके पहले 19 जुलाई, 19 को उच्चतम न्यायालय ने भाजपा के दिग्गज नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, एमएम जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह और अन्य के खिलाफ बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की साजिश की सुनवाई कर रहे लखनऊ की सीबीआई कोर्ट के विशेष जज को निर्देश दिया था कि वो नौ महीने में ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाए। इसके साथ ही पीठ ने 30 सितंबर को रिटायर हो रहे सीबीआई जज एसके यादव के कार्यकाल को भी ट्रायल पूरा होने तक बढ़ाने का आदेश जारी किया था। फैसला सुनाते हुए जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि जज 6 महीने में सुनवाई पूरी करेंगे और तीन महीने में फैसला लिखकर सुनाएंगे।

19 अप्रैल, 2017 को उच्चतम न्यायालय के जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति देकर आडवाणी, जोशी, उमा भारती और 13 अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोपों को बहाल किया था। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए पीठ ने रायबरेली की एक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित अलग मुकदमे को भी स्थानांतरित कर दिया और इसे लखनऊ सीबीआई कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही के साथ जोड़ दिया।

उच्चतम न्यायालय  ने मामले में दो साल में दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर ट्रायल को समाप्त करने का आदेश दिया था और कहा था कि विशेष जज का ट्रांसफर नहीं होगा। पीठ ने कहा था कि एक आरोपी कल्याण सिंह को राजस्थान के राज्यपाल होने के नाते संवैधानिक प्रतिरक्षा प्राप्त है लेकिन जैसे ही वह पद त्यागते हैं तो उनके खिलाफ अतिरिक्त आरोप दायर किए जाएंगे। अब उनके खिलाफ भी ट्रायल चल रहा है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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