Subscribe for notification

पिछले 18 साल में मनी लॉन्ड्रिंग से 112 अरब रुपये का लेन-देन, अडानी की कम्पनी का भी नाम शामिल

64 करोड़ के किकबैक से सम्बन्धित बोफोर्स सौदे का भूत भारतीय राजनीति में उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार के मानक के तौर पर आज तक ज़िंदा है लेकिन वर्ष 1999 से 2017 के 18 सालों में 3,201 ट्रांजेक्शन में मनी लॉन्ड्रिंग से पैसे भेजने वालों, बैंकों और पैसे प्राप्त करने वालों का पता भारत में है, उन्होंने कुल 1.53 अरब डॉलर (करीब 112 अरब रुपये) का लेनदेन किया है। इनके अलावा, हजारों ऐसे ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिनका पता विदेशों का है। फिनसेन फाइल्स से हाथ लगे इन दस्तावेजों में 1999 से 2017 के बीच दर्ज हुईं भारत से संबंधित घटनाओं का जिक्र है।

इस खुलासे से देश की राजनीति में भूचाल आना निश्चित है क्योंकि इसमें अडानी समूह की सिंगापुर स्थित वैश्विक कंपनी अडानी ग्लोबल पीटीईका नाम भी आ रहा है जो शेल कंपनियों के माध्यम से टैक्स हेवन सेशेल्स की मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। क्या मोदी सरकार की ईडी सरकार के चहेते गौतम अडानी को हिरासत में लेकर उसी तरह पूछ ताछ का साहस दिखा पायेगी जैसा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम के साथ उसने किया था।

अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी डिपार्टमेंट के फाइनेंशियल क्राइम्स एन्फोर्समेंट नेटवर्क (फिनसेन) के पास भारत के घोटालेबाज नेताओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, बैंकों को चूना लगाने वाले पूंजीपतियों और जालसाजों का वो कच्चा चिट्ठा है जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ सकता है। इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आईसीआईजे) की छतरी तले 88 देशों के 109 मीडिया संस्थानों ने फिनसेन फाइल्स में दर्ज इन कच्चे चिट्ठों को हासिल कर लिया है।

ऐसा दावा अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में कहा  गया है कि 2,000 ऐसे गुप्त दस्तावेजों की छानबीन के बाद कई भारतीयों के नाम सामने आए हैं जिन्होंने बड़ी मात्रा में पैसों का अवैध लेन-देन किया। दस्तावेजों में उन बैंकों के नाम भी दर्ज हैं जो इन फर्जीवाड़ों का जरिया बने और उन्हें रोक पाने में नाकामयाब रहे।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, फिनसेन के बेहद गुप्त दस्तावेजों में 2 लाख करोड़ डॉलर के फर्जीवाड़े की कहानी जब्त है। अखबार का दावा है कि उसने इन दस्तावेजों में उन लोगों के नाम खंगालने की कोशिश की जिनके खिलाफ भारत में अलग-अलग एजेंसियां जांच कर रही हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक फिनसेन के इन दस्तावेजों में 2जी स्कैम, अगस्ता वेस्टलैंड स्कैंडल, रॉल्स रॉयस घूस कांड और एयरसेल-मैक्सिस केस समेत भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी के कई मामलों से जुड़े लोगों और कंपनियों के नाम दर्ज हैं। भारत में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI), प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व खुफिया निदेशालय जैसी एजेंसियां इन मामलों की जांच कर रही हैं।

फिनसेन फाइल में कुल 2,657 डॉक्यूमेंट्स लीक हुए हैं, जिनमें 2,100 से अधिक संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट्स (एसएआर) हैं जो फिनसेन को वर्ष 2000 से 2017 के बीच सौंपे गए थे। यही फाइलें बजफीड वेबसाइट पर लीक हुई हैं। इसमें करीब दो ट्रिलियन डॉलर की लेनदेन को कवर किया गया है। इन दस्तावेजों में एचएसबीसी (एचएसबीसी) समेत कई बैंकों का कच्चा-चिट्ठा है जिन्होंने गैर-कानूनी तरीके से पैसों की लेन-देन की है। इसमें एचएसबीसी के मनी लॉन्ड्रिंग करने के अलावा जेपी मॉर्गन से जुड़े डॉक्यूमेंट लीक हुए हैं जिसमें कहा गया है कि कंपनी ने एफबीआई (एफबीआई) के टॉप 10 वांटेड क्रिमिनल की कंपनी को लंदन के एक अकाउंट के जरिये 1 बिलियन डॉलर दिए। इसके अलावा इसमें डचेस बैंक और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक  पर आतंकियों को फंड मुहैया कराने के सबूत मिले हैं।

फिनसेन के इन दस्तावेजों में 2जी स्कैम, अगस्ता वेस्टलैंड स्कैंडल, रॉल्स रॉयस घूसकांड और एयरसेल-मैक्सिस केस समेत भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी के कई मामलों से जुड़े लोगों और कंपनियों के नाम दर्ज हैं। भारत में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) जैसी एजेंसियां इन मामलों की जांच कर रही हैं। फिनसेन फाइल्स में 44 भारतीय बैंकों के नाम हैं जो भारत में विदेशी बैंकों के प्रतिनिधि हैं।

इनमें पंजाब नेशनल बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, कैनरा बैंक, इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। जिन 3,201 ट्रांजैक्शन में पैसे भेजने वालों, बैंकों और पैसे प्राप्त करने वालों का पता भारत में है, उन्होंने कुल 1.53 अरब डॉलर (करीब 112 अरब रुपये) का लेन-देन किया है। इनके अलावा, हजारों ऐसे ट्रांजैक्शन हुए हैं जिनका पता विदेशों का है।

दस्तावेजों की छान-बीन में जिनके नाम सामने आए, उनमें जेल में बंद कलाकृतियों और बहुमूल्य वस्तुओं का तस्कर, भारत में जन्मे लोगों की एक ग्लोबल डायमंड कंपनी, हेल्थकेयर और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर की एक प्रमुख ग्रुप कंपनी, नीलाम हो चुकी एक स्टील कंपनी, कई अति धनाढ्यों को चूना लगाने वाला एक लग्जरी कार डीलर, भारत की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी, आईपीएल टीम का एक स्पॉन्सर, ईडी के तहत बड़ा बवाल मचाने वाला एक कथित हवाला डीलर, भारत के अंडरवर्ल्ड डॉन का एक प्रमुख फाइनेंसर समेत कई अन्य लोग एवं कंपनियां शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मामलों में विभिन्न बैंकों के भारत में स्थापित शाखाओं का इस्तेमाल फंड मंगवाने में किया गया। कुछ मामलों में भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं के अकाउंट्स के जरिए भी ट्रांजेक्शन हुए। इस तरह, फिनसेन फाइल्स में 44 भारतीय बैंकों के नाम हैं जो भारत में विदेशी बैंकों के प्रतिनिधि हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on September 22, 2020 4:04 pm

Share