पहला पन्ना

रोजगार के मामले में प्रयागराज के बाद मेरठ फिसड्डी

बात चौंकाने वाली है, किन्तु भारत सरकार के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (National Sample Survey Office) की रिपोर्ट बताती है कि बेरोजगारी की दर में मेरठ 8.5% के हिसाब से देश में दूसरे नम्बर पर है। पहला स्थान 8.9% की दर पर प्रयागराज का है। टॉप टेन में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज व मेरठ के अलावा कानपुर, गाजियाबाद व लखनऊ भी हैं।

मेरठ में रोजगार के प्रचुर साधन जोड़े जा सकते हैं, बशर्ते सरकार इस ओर सोचे या युवा सरकार को सोचने के लिए मजबूर करें। भौगोलिक दृष्टिकोण से यह गंगा व जमुना के बीच का क्षेत्र है। खेती व सिंचाई के साधनों की कमी नहीं है। यह कृषि सम्पन्न क्षेत्र है, यदि गन्ने का भुगतान समय से हो तो युवाओं का रूझान कृषि की ओर बढ़ सकता है। पशु पालन भी उत्कृष्ट घरेलू रोजगार का साधन है। दूध उत्पादक को उपभोक्ता मूल्य के आधे दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं अन्यथा बड़ी संख्या में युवाओं के रोजगार सृजन का जरिया डेयरी हैं।

बेशक यहां बड़े उद्योग नहीं हैं परन्तु रोजगार में 11% की भागीदारी वाले सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों के लिए मेरठ मुफीद है। यदि यहां के उद्यमियों द्वारा मांगी जा रही सुविधाओं पर सरकार ध्यान दे तो मेरठ के उद्यमी अन्य शहरों के बेरोजगारों को मेरठ में रोजगार उपलब्ध कराने का हौसला रखते हैं।

पिछले दस वर्षों से उद्योगों के लिए नई जमीन नहीं मिली है। डेढ़ दशक पूर्व आवास विकास द्वारा विकसित लोहिया नगर अभी पूर्ण विकसित नहीं है। कारखानों के लिए जमीन की कमी के रहते छोटे उद्योगों की चाहत रखने वाले कुछ युवाओं ने मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में यूनिटें लगा ली हैं। उन्हें विकास प्राधिकरण व आवास विकास के कोप का भाजन बनना पड़ रहा है।

छोटे उद्योग वाले चाहते हैं कि उनके बनाए हुए सामान के प्रचार के लिए सरकार की मदद मिले। अपने उत्पादों की देश-विदेश में विक्रय हेतु अपने सामान के प्रचार लायक पूँजी हरेक के पास नहीं होती। केन्द्र व राज्य सरकारें इसमें साधन उपलब्ध कराकर मदद कर सकती हैं। सरकार सीधे विज्ञापन न कर क्षेत्रीय स्तर पर प्रदर्शनी लगाकर तथा उस प्रदर्शनी का प्रचार कर अपने राज्य का व्यापार व अपनी जीडीपी बढ़ा सकती है। मेरठ निवासी कहते हैं कि उनके यहाँ नौचन्दी मैदान साल के 11 महीने खाली पड़ा रहता है। सरकार इस विशाल मैदान को स्थाई प्रदर्शनी स्थल में बदल कर यहाँ दिल्ली ट्रेड फेयर या नोएडा एक्सपो सेंटर की तर्ज पर शेड बनवा सकती है जहाँ मेरठ, सहारनपुर व मुरादाबाद मंडल के उद्यमी अपने उत्पादों की समय-समय पर प्रदर्शनी लगा सकते हैं। इस प्रदर्शनी स्थल पर विक्रेता व क्रेता वन टू वन मीटिंग कर सकते हैं।

मेरठ ऐतिहासिक धरोहरों से परिपूर्ण है जिनको पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित कर देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित किया जा सकता है। पर्यटन उद्योग रोजगार सृजन के साथ राष्ट्रीय आय मे इजाफा करने वाला सेक्टर है।

पांडवों की राजधानी व जैन तीर्थ स्थल हस्तिनापुर, सरधना का चर्च, बरनावा में लाक्षागृह, गढ़मुक्तेश्वर का पवित्र गंगा तीर्थ स्थल व 1857 का क्रान्ति उद्गम स्थल काली पलटन मन्दिर आदि ऐसे स्थान हैं जो सैलानियों को खींच कर ला सकते हैं। इनके आस-पास के स्थलों का सौंदर्यीकरण तथा इन तक पहुँचने के मार्ग चौड़े व सपाट करा देने से उत्साहवर्द्धक परिणाम मिलेंगे। हस्तिनापुर को रेल लिंक मिलते ही दुनिया भर से जैन समाज के लोग यहाँ आने लगेंगे। पर्यटन के अन्तर्गत अनेकों प्रकार से होटल, बाजार, ट्रान्सपोर्ट युवाओं को रोजगार दिलवायेंगे।

प्रशासन की वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार टोल-टैक्स एक बुरा कन्सेप्ट है। इससे बेहतर विकल्प सड़क निर्माण के साथ बाजार विकास है जिससे प्राप्त सर्विस टैक्स तुलनात्मक रुप से शासन के लिए लाभकारी है। कोई भी युक्ती टोल को जाम मुक्त नहीं कर सकती। यात्रियों की झुंझुलाहट, रोजमर्रा की मारपीट व ईंधन की बरबादी टोल-टैक्स के साइड इफेक्ट हैं।

मेरठ का हवाई अड्डा अभी I.C.U. वाली स्थिति में ही है। यहाँ VIP प्लेन, हेलीकॉप्टर तो उतरते हैं परन्तु कॉमर्शियल फ्लाइट का इंतजार है जिसके चालू होते ही सहारनपुर, मुरादाबाद तक के उत्पादकों के लिए ग्राहकों की आमद बढ़ेगी।

क्षेत्र में यह विचार भी काफी हवा ले रहा है कि क्यों न मेरठ में उत्तर प्रदेश का मिनी सचिवालय बनाकर विभाजन के मुद्दे पर ‘सांप मरे पर लाठी न टूटे’ वाला काम कर लिया जाय? इससे विभाजन के सभी लाभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिल जाऐंगे तथा क्षेत्र की जनता को छोटे-बड़े कामों के लिए आए दिन लखनऊ नहीं भागना पड़ेगा। हस्तिनापुर में शासन के पास इसके लिए समुचित जमीन भी उपलब्ध है। मेरठ के रोजगार में इससे बड़ा फर्क पड़ेगा। इससे हाईकोर्ट बेंच का यहाँ आना सुविधापूर्ण हो जाएगा।

कुल मिलाकर देखें तो सरकारें रोजगार सृजन के वादे तो करती हैं परन्तु वास्तविकता यह है कि छंटनी भी हो रही है व बेरोजगारी बढ़ रही है। ऐसे में हमें विश्वास है कि मेरठ पर ध्यान देकर प्रदेश व केन्द्र सरकार क्षेत्र के विकास में पंख अवश्य लगायेगी।

रोजगार अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। सरकार को रोजगार सृजन के साथ बेरोजगार युवाओं में विश्वास पैदा करना पड़ेगा। रोज-रोज के झूठ से समाज का प्रत्येक वर्ग हताश है अब नारे व मुहावरे गढ़ने से काम नहीं चलेगा। बेरोजगारी की विकराल समस्या पर सरकार व विपक्ष दोनों को खींचतान छोड़ विकास के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

(गोपाल अग्रवाल समाजवादी नेता हैं। और आजकल मेरठ में रहते हैं।)

This post was last modified on March 10, 2021 8:49 pm

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