नस्ल भेद विरोधी आंदोलन पहुंचा नये चरण में, निशाने पर अब दास प्रथा और औपनिवेशिक दौर के प्रतीक

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रानी विक्टोरिया के चहरे के विरुपण का दृश्य।

अमेरिका में जॉर्ड फ्लायड की हत्या के खिलाफ जो आंदोलन शुरू हुआ था उसने अब पूरे यूरोप को अपनी आगोश में ले लिया है। आस्ट्रेलिया से लेकर कनाडा तक इसकी धमक सुनायी दे रही है। समय बढ़ने के साथ ही वैचारिक स्तर पर इसने एक बड़े फलक पर विस्तार हासिल कर लिया है। अभी तक जो लड़ाई नस्लीय घृणा और उत्पीड़न के खिलाफ केंद्रित थी उसने अब औपनिवेशिक काल और दास प्रथा के दौर को अपने दायरे में समेट लिया है। जगह-जगह इन दौरों के प्रतीकों, वह मूर्तियां हों या कि मेमोरियल, पर हमले शुरू हो गए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन की पूर्व रानी विक्टोरिया और अमेरिका की खोज करने वाले कोलंबस तक को नहीं नहीं बख्शा जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि कई शहरों के मेयरों ने स्मारक और मूर्तियां बने रहें या नहीं इसको लेकर फिर से मूल्यांकन शुरू कर दिया है।

मंगलवार को ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ प्रदर्शनकारियों द्वारा लीड्स हाउस के टाउन हॉल में स्थित रानी विक्टोरिया की मूर्ति पर ग्रेफिटी स्प्रे करके उसे विरूपित कर दिया गया। और मूर्ति के चारों तरफ ‘मर्डरर’, ‘स्लैग’ और ‘स्लेव ऑनर’ भी लिखा गया।  

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी कॉलेज से 19 वीं सदी के ब्रिटिश साम्राज्यवादी सेसिल रोड्स की मूर्ति को हटाने के लिए मंगलवार को हजारों प्रदर्शनकारी जुटे। इसके साथ ही राष्ट्र के औपनिवेशिक अतीत के अन्य स्मारकों को हटाने पर बहस छिड़ गई है।

इससे पहले रविवार को, ब्रिस्टल में ब्लैक लाइव्स मैटर के प्रदर्शनकारियों ने 17 वीं शताब्दी के दास व्यापारी एडवर्ड कॉलस्टोन की एक मूर्ति को नीचे गिरा दिया और सड़क पर बेलनियाते हुए एवन नदी में फेंक दिया।

बता दूं कि एडवर्ड कॉलस्टन एक कंपनी चलाता था, जिसने 84,000 किडनैप्ड अफ्रीकी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अमेरिका भेजा था – इनमें से 19,000 के करीब लोगों के क्रॉसिंग के दौरान मारे जाने का अनुमान है।

इंग्लैंड में पूरे देश भर में कई कंफेडरेट स्मारक भरे पड़े हैं, जबकि प्रदर्शनकारी विवादास्पद स्थलों को हटाने के लिए जोर दे रहे हैं। 

लेबर काउंसिल ने इंग्लैंड और वेल्स के तमाम शहरों और कस्बों की मूर्तियों और स्मारकों के समीक्षा शुरू की

प्रदर्शनकारियों द्वारा जगह-जगह मूर्तियों को तो तोड़ने और गिराने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र लेबर काउंसिल ने पूरे इंग्लैंड और वेल्स के तमाम शहरों और कस्बों के स्मारकों और मूर्तियों की समीक्षा करने की शुरुआत की है। 

ब्रिटेन के कस्बों और शहरों में कोल्सटन जैसे स्मारक भरे हुए हैं। मंगलवार को, लंदन के मेयर, सादिक खान ने राजधानी के आस-पास के स्थलों के भविष्य की जांच करने के लिए एक आयोग की घोषणा की, जिसमें भित्ति चित्र, सड़क कला, सड़क के नाम और प्रतिमाएं शामिल हैं।

इसी कड़ी में ब्रिटिश दास व्यापारी रॉबर्ट मिलिगन की मूर्ति को लंदन अथॉरिटी द्वारा कल हटा दिया गया।

जबकि पूरे देश में कई विवादास्पद मूर्तियों के भाग्य का निर्धारण कर दिया गया है, इंडियानापोलिस, इंडियाना में स्मारक; रॉकी पर्वत, उत्तरी केरोलिना, रोनॉक, नॉरफ़ॉक और वर्जीनिया में स्मारक शेष बने हुए हैं, लेकिन उनके हटाने की योजना गति में है। 

अमेरिका में तोड़ी जा रहीं मूर्तियां और स्मारक

जॉर्ज फ्लॉयड की कस्टोडियल हत्या के बाद बुतों को गिराने का सिलसिला अमेरिका में शुरू हो चुका है। कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा और कुछ शहर के मेयर द्वारा।

कल रात प्रदर्शनकारियों द्वारा जेनिफर डेविस की मूर्ति को तोड़कर नीचे गिरा दिया गया। 

ध्वस्त करते वक्त कन्फेडरेट सिपाही की मूर्ति एक प्रदर्शनकारी पर गिर गई, वो गंभीर रूप से घायल हो गया। ये पोर्ट्समाउथ, में आज रात यह हुआ।

कल रात रिचमंड वर्जीनिया में क्रिस्टोफर कोलंबस की मूर्ति को तोड़कर सिटी लेक में फेंक दिया गया था। इस सप्ताह कोलंबस के एक अन्य पुतले के सिर को प्रदर्शनकारियों द्वारा तोड़कर अलग फेंक दिया गया था।

पेडस्टल जहां कभी राफेल सेम्स की मूर्ति खड़ी थी, अब खाली है। मेयर सैंडी स्टिम्पसन ने एक ट्वीट में बताया कि शहर में 5 जून शुक्रवार को तड़के ही कॉन्फेडरेट एडमिरल राफेल सेम्स की प्रतिमा को हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

प्रदर्शनकारियों द्वारा रविवार को स्मारक ढहाए जाने के बाद सोमवार को विवादित एडवर्ड कार्मेक की मूर्ति को शहर के कैपिटल मैदान से दूर ले जाया गया। बता दें कि एडवर्ड कार्मेक पूर्व अमेरिकी सीनेटर, अखबार के मालिक और  इडा बी वेल्स जैसे नागरिक अधिकारों के पैरोकारों पर हमला करने के लिए जाने जाते हैं। 

ऐतिहासिक ओल्ड टाउन अलेक्जेंड्रिया में क्रू ने मंगलवार सुबह “एपोमैटॉक्स” नामक एक कॉन्फेडरेट सैनिक की एक कांस्य प्रतिमा को हटा दिया। स्मारक को 1889 में वर्जीनिया शहर से कॉन्फेडरेट सैनिकों को सम्मानित करने के लिए बनाया गया था।

अलेक्जेंड्रिया के मेयर जस्टिन विल्सन ने मूर्ति हटाने की तस्वीरें ट्वीट करते हुए लिखा – “अलेक्जेंड्रिया, सभी महान शहरों की तरह, लगातार बदल रहा है और विकसित हो रहा है।”

लुइसविले के मेयर ग्रेग फिशर के अनुसार, शहर के मध्य में स्थित जॉन ब्रेकेनरिज कैसलमैन स्मारक में लगी एक कन्फेडरेट सैनिक की मूर्ति को सोमवार को हटा दिया गया।

फिशर ने अगस्त 2018 में ही कैसलमैन स्मारक को हटाने की योजना की घोषणा की थी। मूर्ति को स्थानांतरित करने के दो साल के प्रयास के बाद, जेफरसन काउंटी सर्किट कोर्ट के न्यायाधीश ने शुक्रवार को कहा कि शहर कैसलमैन स्मारक को स्थानांतरित करने में सक्षम है।

2 साल पहले इसे हटाने का प्रस्ताव करते हुए फिशर ने कहा था, “हम सभी इस रिपोर्ट से सहमत हैं कि हमारे शहर को उन प्रतिमाओं को संरक्षित नहीं करना चाहिए जो नस्लवादी या पक्षपाती विचारधारा के लिए मान्य प्रतीकों के रूप में काम करते हैं – यही कारण है कि हमने लुइसविले विश्वविद्यालय के पास कॉन्फेडरेट प्रतिमा को स्थानांतरित किया।

जैक्सनविले के हेमिंगिंग पार्क में क्रूज़ ने मंगलवार सुबह एक 122 साल पुरानी प्रतिमा और पट्टिका को गिरवा दिया, जिसे कि कन्फेडरेट सैनिकों के सम्मान में बनाया गया था।

मेयर ने कहा, “हम आपको सुनते हैं…..मैं आपके गुस्से और हताशा को समझता हूं …. हम कानून को आगे ला रहे हैं। आपकी आवाज सुनने के लिए सभी सरकारी एजेंसियों को जनता के साथ एकजुट करेंगे।”

सिटी हॉल की सीढ़ियों पर मंगलवार को एक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के दौरान, मेयर लेनी करी ने घोषणा की कि शहर के सभी कन्फेडरेट स्मारकों को हटा दिया जाएगा। इसमें तीन स्मारक और आठ ऐतिहासिक मार्कर शामिल हैं।

लेनी करी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि “अगर हमारा इतिहास हमें अपने भविष्य में पूरी क्षमता के साथ पहुंचने से रोकता है, तो हमें कार्रवाई करने की आवश्यकता है। “मेरा स्टाफ जैक्सन विले कल्चरल काउंसिल के विशेषज्ञों के साथ इतिहास और कला पर काम करेगा ताकि हम अपने अतीत को पूर्ण और समग्र तरीके से स्वीकार कर सकें जिससे आगे एक ऐसा रास्ते निकल सके जिस पर किसी भी व्यक्ति के अनुभव और विरासत पीछे न छूटे।

बरमिंघम अलबामा के लिन पार्क में प्रदर्शनकारियों ने 31 मई को एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान 115 साल पुराने स्मारक को हटाने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही मेयर रान्डेल वुडफिन घटनास्थल पर पहुंचे, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि उनका ये काम हम खत्म करेंगे। साथ ही शहर के मेयर ने प्रदर्शनकारियों से गुहार लगाई कि पुलिस आकर प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करे इससे पहले उन्हें पार्क से चले जाना चाहिए।

बता दें कि लिन पार्क दिग्गजों को समर्पित स्मारक है, और कन्फेडरेट नाविक चार्ल्स लिन की मूर्ति है।

जैसा कि जानते हैं अलबामा विश्वविद्यालय के परिसर में युद्ध स्मारक बनाया गया है। ताजा खबर ये है कि न्यासी बोर्ड और विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ने परिसर में तीन पट्टियों को हटा दिया है। 

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पट्टिकाएं गोरगास लाइब्रेरी के सामने थीं, लेकिन उन्हें हटा दिया गया और “डॉ. बेल की सिफारिश पर उन्हें ज्यादा उचित ऐतिहासिक सेटिंग में रखा गया।”

इसके अतिरिक्त, अलबामा यूनिवर्सिटी के सभी परिसरों की इमारतों के नामों की समीक्षा और अध्ययन करने के लिए विश्वविद्यालय के न्यासियों का एक समूह गठित किया गया है।

प्रदर्शनकारियों ने 1 जून को मोंटगोमरी में ली हाई स्कूल के सामने खड़े जनरल रॉबर्ट ई. ली. की एक मूर्ति को को ध्वस्त कर दिया था। इसके लिए मोंटगोमरी पुलिस ने चार लोगों पर फर्स्ट-डिग्री आपराधिक शरारत और गुंडागर्दी का केस दर्ज किया है।

वर्जीनिया के गवर्नर, राल्फ नॉर्थम ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के अन्य राज्यों की तुलना में वर्जीनिया में अधिक कन्फेडरेट कमेमोरेशन्स हैं इनके बारे में जल्द ही फैसला लिया जाएगा।

नॉर्थम ने कहा किरिचमंड कैपिटल के सामने लगी रॉबर्ट ई. ली. की मूर्ति को हटाने का फैसला किया गया है। 

अमेरिका एक बार फिर नेतृत्व के लिए वर्जीनिया की ओर देख रहा है। और कोई गलती न करे – एक प्रतीक को हटाना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह केवल एक कदम है। हमें अभी भी इस देश में बदलाव की जरूरत है। हमें सबसे अधिक उपचार की आवश्यकता है। लेकिन प्रतीक मायने रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि यही समय है। और इतिहास इसका गवाह बनेगा।

मूर्ति हटाने के पक्ष-विपक्ष

अमेरिका में विवादित कन्फेडरेट स्मारकों को लेकर हमेशा से बहस चली आ रही है। विशेषकर साल 2015 में डाइलन रूट द्वारा साउथ कैरोलिना में 9 अफ्रीकी अमेरिकियों की हत्या के बाद तो जैसे नस्ल युद्ध ही शुरू हो गया।

साल 2017 में श्वेत राष्ट्रवादियों द्वारा वर्जीनिया के शार्लोट्सविले में एक रॉबर्ट ई. ली. की प्रतिमा को हटाए जाने के खिलाफ प्रोटेस्ट मार्च निकालने के बाद यह फिर से भड़क गया, जहां प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों के बीच एक काउंटर प्रोटेस्टर की हत्या कर दी गई थी।

श्वेत समुदाय का कहना है कि ये स्मारक और मूर्तियां इतिहास और सम्मान की विरासत को चिह्नित करते हैं। जबकि दूसरे समुदाय का तर्क है कि वे अमेरिका की गुलामी के स्याह विरासत के नस्लवादी प्रतीक हैं। कुछ शहरों ने ऐसे प्रतीकों को पहले ही हटाने के प्रयास किए हैं, जबकि कई शहरों ने उनकी रक्षा के लिए कानून पारित किए हैं।

इससे पहले वाशिंगटन की मेयर द्वारा व्हाइट हाउस की ओर जाने वाली सड़क का नाम बदलकर ‘ब्लैक लाइव्स मैटर प्लाजा’ कर दिया गया। 

प्रदर्शनकारियों के बाबत बफैलो पुलिस ऑफिसर द्वारा एक क्रूर ट्वीट के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। 

33 सीज़न के सफल प्रसारण के बावजूद बाद, “कॉप्स” को पैरामाउंट नेटवर्क द्वारा दुनिया भर में पुलिस क्रूरता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के चलते स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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