Sunday, December 4, 2022

‘क्रांति से प्रतिक्रांति’ की ओर बढ़ा एनडीटीवी

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तथाकथित रुप से भारत का सबसे लिबरल टीवी चैनल एनडीटीवी कल से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इंटरव्यू चला रहा है। उस इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जो मेरे मित्र हैं-उनके कार्यकाल में भारत महानता की तरफ बढ़ता जा रहा है। मोदी महान है।’ 

एनडीटीवी की पत्रकारिता और लिबरल वैल्यू पर तो बात होती ही रहती है लेकिन उसके भीतर चल रहे तरह-तरह के खेल की जानकारी आम तौर पर लोगों को नहीं होती है। इसलिए एक बार इस पर बात करना जरूरी हो गया है क्योंकि परसों मतलब 7 सितबंर से राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरु हुई है। कोई भी तथाकथित राष्ट्रीय चैनल राहुल गांधी की यात्रा को ठीक से कवर नहीं करेगा, यह मोटे तौर पर तय है। एक सामान्य लेकिन भोला-भाला भारतीय नागरिक यह अपेक्षा रखता है कि एनडीटीवी लोकतांत्रिक मूल्यों की ‘रक्षा करने के लिए’ ही बना है, इसलिए वह तो जरूर ही राहुल गांधी के कार्यक्रम को दिखाएगा! लेकिन ठीक यात्रा के अगले दिन से वहां डोनाल्ड ट्रंप का वह साक्षात्कार दिखाया जा रहा है जिसमें मोदी के महानता के कसीदे काढ़े जा रहे हैं!

अब इस तथ्य को दूसरी तरह से देखिए और अंदाजा लगाइए। एक तरफ राहुल गांधी की यात्रा शुरु हुई है, लेकिन उस यात्रा को कवरेज न देकर वहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति का इंटरव्यू चलाया जा रहा है। मतलब यह कि एनडीटीवी द्वारा जानबूझ कर न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के आठ साल के सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को नजरअंदाज किया जा रहा है बल्कि एक ऐसे आदमी की तारीफ करते हुए वह इंटरव्यू चला जा रहा है जिसके ऊपर देश के सभी विपक्षी दलों सहित कांग्रेस पार्टी का यह आरोप है कि उसने देश की एकता-अखंडता समेत अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, मंहगाई आसमान छू रही है, गरीबी न सिर्फ अपने शिखर पर है, बल्कि संपन्न मध्यम वर्गों को भी जीवन जीने में कठिनाई हो रही है।

अपने साक्षात्कार में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन पर आरोप लगाता है कि सरकार (बाइडन की सरकार) एफबीआई का जिस रुप में दुरुपयोग कर रही है वैसा दुरुपयोग अमेरिका के इतिहास में आज तक कभी नहीं हुआ। डोनाल्ड ट्रंप को अपने प्रतिद्वंदी पर यह आरोप लगाने का अधिकार है और वह ऐसा आरोप लगा सकते हैं लेकिन क्या साक्षात्कारकर्ता श्रीनिवासन जैन को यह सवाल नहीं पूछना चाहिए था कि यही काम आपके अनन्य मित्र नरेन्द्र मोदी भारत में लगातार कर रहे हैं? क्या आपको इस बारे में कोई जानकारी है? लेकिन ट्रंप के इस आरोप पर एनडीटीवी के श्रीनिवास जैन पूरी तरह चुप हैं।

इंटरव्यू के उसी हिस्से में उतना ही ‘मजेदार’ बात रिपब्लिकन हिन्दू कॉलिएशन के शलभ शाली कुमार ने कही है। एनडीटीवी इस बात को स्वीकार करता है कि उसी व्यक्ति के चलते यह साक्षात्कार संभव हो पाया है। चूंकि शलभ शाली कुमार ने इंटरव्यू कराने में मदद की है इसलिए उस इंटरव्यू में वह भी ‘मन की बात’ कहता है। जब ट्रंप आरोप लगाता है कि बाइडन की सरकार बदले की कार्यवाही कर रही है तब शलभ कुमार इस बात को बड़ी सिद्दत से कहता है कि बिल्कुल वैसा ही जैसा कि 2002 -2014 के बीच सभी नरेन्द्र मोदी को जेल में डाल देना चाहते थे, लेकिन आज वह सबसे लोकप्रिय आदमी हैं। पिछले छह वर्षों से अमेरिका में भी यही हो रहा है।

मतलब यह कि पहले नरेन्द्र मोदी को कांग्रेस पार्टी फंसाकर हर हाल में प्रधानमंत्री नहीं बनने देना चाह रही थी और आज जब मोदी प्रधानमंत्री बन गए हैं, तब इतने ‘विजनरी’ व महान आत्मा को प्रधानमंत्री पद से अपदस्त करने के लिए वही कांग्रेस पार्टी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकालकर षड्यंत्र रच रही है!

हां, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एनडीटीवी के अंग्रेजी वेबसाइट पर ट्रंप के इंटरव्यू का पूरा ट्रांसक्रिप्श्न मौजूद है, उसी एनडीटीवी के हिन्दी वेबसाइट की डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी सबसे बड़ी खबर यह है कि डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ेगी! यह खबर है न मजेदार- वहां क्रांति की अलग धारा बह रही है जो आपको अडानी की पूंजी से बहुत दूर लेकर चला जाता है!  

डोनाल्ड ट्रंप के बहाने कांग्रेस पार्टी के भारत जोड़ो यात्रा को नहीं दिखाए जाने का क्या लाभ है, इस पर गौर करने की जरूरत है। पिछले आठ वर्षों में मोदी राजनीतिक रुप से इतना असहज पहली बार हुए हैं (इसका जिक्र किसी न्यूज चैनल में तो कतई नहीं हो सकता है)। पिछले महीने 9 अगस्त को बीजेपी के तीसरे सबसे विश्वसनीय सहयोगी जनतादल यू के नीतीश कुमार के बीजेपी से अलग होकर बीजेपी के सबसे कट्टर प्रतिद्वंदी राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार बना लिया।

इससे पहले कृषि कानून पर बीजेपी के दूसरे महत्वपूर्ण सहयोगी अकाली दल ने उसका साथ छोड़ दिया था। उससे तीन साल पहले शिवसेना अलग हो गयी थी। अकाली दल के अलग होने से भाजपा की सीट पर बहुत अंतर नहीं पड़ता था लेकिन इसका वैचारिक प्रभाव यह था कि बीजेपी दुनिया को यह संदेश दे रही थी कि मुसलमानों के अलावा भारत के सभी धर्मों के लोग बीजेपी के हिन्दुत्व के एजेंडे से सहमत हैं। लेकिन सबसे पहले शिवसेना, उसके बाद अकाली और बाद में नीतीश कुमार ने बीजेपी को काफी असहज कर दिया है। नीतीश कुमार ने न सिर्फ उसके हिन्दुत्व को छकाया है बल्कि सीट के मामले में भी अपने समीकरणों से उसे कई तरह की परेशानियों में डालने में कामयाब हो सकता है।

बिहार में बीजेपी हमेशा नीतीश कुमार के बल पर अपनी जमीन तलाशने में कामयाब रही है और जब उसे किसी ताकतवर पार्टी का साथ नहीं मिला है, लड़खड़ा गई है। वर्ष 2015 में जब लालू-नीतीश एक साथ हुए तो उस समय नरेन्द्र मोदी ने बीजेपी की तरफ से मोर्चा संभाला। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनावों में दर्जनों सभाओं को संबोधित किया, लेकिन उनकी पार्टी सत्ता से काफी दूर ही रह गई। इतना ही नहीं, अगर उस समय उनके साथ जीतनराम मांझी का सहयोग नहीं होता, जिनकी पकड़ मगध क्षेत्र में है और जिन्हें 2.3 फीसदी वोट मिला था, तो मतगणना विशेषज्ञों की मानें तो बीजेपी की हैसियत 30 सीट से अधिक की नहीं होती। कुल मिलाकर, बीजेपी की हैसियत आज के दिन 30 विधानसभा सीटों पर सिमट जा सकती है।

अगर इसी समीकरण को ध्यान में रखकर आकलन किया जाए तो 2024 का लोकसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने की उम्मीद है। 2019 में बिहार की 40 सीटों में से 39 सीटें एनडीए गठबंधन को मिली थीं, इसकी पूरी संभावना है कि अगले चुनाव में यह समीकरण बिल्कुल उलट जाए। इस नए गठबंधन का असर बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड पर भी पड़ेगा जहां की 14 सीटों में से 11 सीटों पर बीजेपी काबिज है। अर्थात लोकसभा की 54 सीटों पर बीजेपी को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, जहां उसे व उसके सहयोगियों को 50 सीटें मिली थीं।

अगर सिर्फ नीतीश कुमार के अलग होने की कहानी को ठीक से बयां किया जाए तो बीजेपी पहली बार स्पष्ट बहुमत को छूने की स्थिति में नहीं दिख रही है। और अगर कहीं गठबंधन की बातें आगे तक चली जाती हैं और जिसकी एक झलक नीतीश कुमार के फिलहाल के दिल्ली दौरे में दिखाई भी पड़ा है, तो बीजेपी के कई पार्टनर उससे दूर भी हो सकते हैं। यही कारण है कि मोदी के अनन्य मित्र अडानी के पैसे से चलने वाला यह चैनल भारत जोड़ो यात्रा को नजरअंदाज करके मोदी के प्रशस्ति गान करने वाले डोनाल्ड ट्रंप का इंटरव्यू चला रहा है!

(जितेंद्र कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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