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सरकार के पत्र पर विचार-विमर्श के लिए किसान नेताओं की आज बैठक

नई दिल्ली। सरकार के वार्ता के नये प्रस्ताव पर बातचीत और विचार-विमर्श करने के लिए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की आज बैठक होगी। गौरतलब है कि सरकार के प्रस्ताव में किसानों से बातचीत के लिए तारीख का सुझाव मांगा गया है।

सरकार से प्रस्ताव हासिल करने वाले क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष डॉ. दर्शन पाल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार अपने प्रयासों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि “हमने पहले ही सरकार को बता दिया है कि किसी भी तरह का संशोधन स्वीकार्य नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर से कानून को पूरी तरह से खत्म करने की मांग की।

जम्हूरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि अगले कदम को तय करने के लिए विभिन्न किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों की आज बैठक होगी। पत्र के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “उन्होंने केवल पांच पेज का एक पत्र दिया है जिसमें पहले की बैठकों में क्या हुआ उसको तफ्शील से लिखा गया है। यह केवल समय बरबाद करने की रणनीति है।”

संधू उन 39 किसान नेताओं में हैं जिनके नाम इस पत्र में शामिल हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा कि “पत्र इस बात का इशारा करता है कि सरकार कोई बैठक नहीं बुलाना चाहती है। यह केवल एक औपचारिकता है। सरकार अगले चक्र की वार्ता को लेकर गंभीर नहीं है। वरना वह तारीख और समय भी अपनी तरफ से देती जैसा कि पहले की बैठकों में हुआ है।”

कक्का ने कहा कि 40 संगठनों का किसानों का छाता मंच आज बैठकर इस बात को तय करेगा कि इसका क्या जवाब दिया जाए।

भारतीय किसान यूनियन एकता (दकौंदा) के महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला ने कहा कि इतने लंबे पत्र की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि “हमने पहले ही इस बात को साफ कर दिया है कि हम तीनों कानूनों को खत्म करने पर ही समझौता करेंगे। इसके साथ ही सभी के लिए एमएसपी के लिए कानून बनाए जाएं। सरकार को इधर-उधर भटकने की जगह इन सब मांगों पर केंद्रित करना चाहिए। हम कल (आज) की बैठक में सरकार के प्रस्तावों पर विचार करेंगे।”

कुल हिंद किसान सभा (पंजाब) के महासचिव बलदेव सिंह निहालगढ़ ने केंद्र के पत्र को कुछ और नहीं किसानों और कड़कड़ाती ठंड में उनके विरोध-प्रदर्शन का अपमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि “अगर सरकार सचमुच में मुद्दे को हल करना चाहती है तो उसे हमारी मांग स्वीकार कर लेनी चाहिए। हम सरकार को एक पत्र भेजेंगे और तब देखेंगे कि क्या वो हमारी मांगों पर बातचीत के लिए आमंत्रित करेंगे।”

पंजाब की सबसे बड़ी किसानों की यूनियन बीकेयू (उग्राहन) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलान ने कहा कि उनकी कल पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति (पीकेएमएससी) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी और उसमें तय किया गया कि जब तक उनकी सारी मांगें स्वीकार नहीं की जातीं सरकार के साथ वो किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे।

उन्होंने कहा कि “लेकिन हम 32 संगठनों द्वारा कल (आज) लिए जाने वाले फैसले का सम्मान करेंगे।”

एक और किसानों के छाता संगठन आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने कृषि मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि उन्होंने बातचीत में भाग लेने से कभी इंकार नहीं किया।

मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने रविवार को पत्र लिखकर अगले चक्र की वार्ता के लिए तारीख मांगी थी। पत्र में कहा गया है कि “अपनी सुविधा के मुताबिक जिससे एक और बैठक के जरिये मामले को हल किया जा सकता है।”

यह पत्र 16 दिसंबर को दर्शन पाल के जरिये भेजे गए एक ईमेल के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने किसान कानूनों में केंद्र के छूट के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

इसके पहले दोनों पक्षों के बीच पांच चक्रों की वार्ता हो चुकी है लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला है।

(ज्यादातर इनपुट इंडियन एक्सप्रेस से लिए गए हैं।)

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This post was last modified on December 22, 2020 10:33 am

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