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गांधी शहादत दिवस पर देश भर में किसानों ने रखा उपवास

26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान लालकिला पर हिंसा भले ही दीप सिद्धू की अगुवाई में भाजपा के लोगों ने अंजाम दिया हो लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 73 वीं पुण्यतिथि पर उपवास रखने का एलान किया था। बता दें कि अंग्रेजों के खिलाफ़ साल 1922 में सविनय अवज्ञा आंदोलन को उस वक़्त वापस ले लिया जब चौरी-चौरा कांड में हिंसा की घटना हुई थी। इतना ही नहीं गांधी ने हिंसा के प्रायश्चित स्वरूप उपवास भी रखा। हिंसा जैसी ऐसी चीज के लिए खुद की नैतिक जिम्मेदारी तय करके खुद को सजा देना और प्रयाश्चित के लिए उपवास रखना गांधी जैसे निशच्छल, अहिंसावादी, सत्यनिष्ठ और ईमानदार व्यक्तित्व का दिखाया रास्ता है जिस पर किसान आंदोलनकारी चल निकले हैं। गोडसे को आदर्श मानने वालों के शासनकाल में जब एक लोकतांत्रिक अहिंसक किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए हिंसा को हथियार बनाकर आंदोलन के खिलाफ़ इस्तेमाल किया जा रहा है तब ग़ाजीपुर, टिकरी, सिंघु बॉर्डर और तमाम दूसरे धरनास्थलों पर देश के लाखों किसान आंदोलनकारियों ने आज दिन भर का उपवास रखा और उसे सद्भावना दिवस के तौर पर मनाया।

बता दूँ कि आज के ही दिन यानि 30 जनवरी, 1948 को संघ से ताल्लुक रखने वाले दक्षिणपंथी हत्यारे नाथूराम गोडसे ने राष्ट्रपिता को गोली मारकर हत्या कर दी थी।

ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा की ठोस मांगें:

इससे पहले ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा द्वारा अपील की गयी थी कि 30 जनवरी हिंदुत्व के कट्टरपंथी नेता द्वारा की गयी गांधी की हत्या के अवसर पर दिन भर उपवास व विरोध धरना आयोजित करें। किसान आंदोलन  को बदनाम करने के लिए लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने देने के आरएसएस-भाजपा सरकार के षड्यंत्र का पर्दाफाश करो।  मांग करो:

1 खेती के तीन कानून रद्द करो ।

2 सी 2 + 50 फ़ीसदी के सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो ।

3 दीप सिद्धू व अन्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई करो।

4 किसान नेताओं पर यूएपीए व देशद्रोह के दर्ज फर्जी केस वापस लो।

वहीं सरकार द्वारा 26 जनवरी की रिपोर्टिंग के सिलसिले में पत्रकारों के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज़ करने पर प्रतिक्रिया देते हुए आज प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके कहा है कि “भाजपा सरकार द्वारा पत्रकारों एवं जन प्रतिनिधियों को FIR कर धमकाने का चलन बहुत ही खतरनाक है। लोकतंत्र का सम्मान सरकार की मर्ज़ी नहीं बल्कि उसका दायित्व है। भय का माहौल लोकतंत्र के लिए ज़हर के समान है। भाजपा सरकार ने वरिष्ठ पत्रकारों व जन प्रतिनिधियों को धमकाने के लिए FIR करके लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार किया है।”

आंदोलन अब किसानों के सम्मान और स्वाभिमान का संघर्ष बन गया है- AIKSSS

वहीं आज इंदौर में भी किसान आंदोलन के समर्थन में प्रायश्चित उपवास तथा सदबुद्धि  धरना दिया गया।  अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की इंदौर इकाई से जुड़े किसान संगठनों ने आज गांधी प्रतिमा पर आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही किसान आंदोलन के साथ सत्ताधारी दल और सरकार द्वारा की जा रही हठ धर्मी के खिलाफ प्रायश्चित उपवास का आयोजन किया । इसी के साथ किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने सरकार को सद्बुद्धि  देने के लिए 3 घंटे तक गांधी प्रतिमा पर धरना भी दिया। आज के कार्यक्रम में किसान संघर्ष समिति, किसान खेत मजदूर संगठन, अखिल भारतीय किसान सभा ,एटक और सीटू के कार्यकर्ता शामिल हुए।

धरना स्थल पर हुई सभा को रामस्वरूप मंत्री, कैलाश लिंबोदिया, अरुण चौहान, प्रमोद नामदेव, सीएल सरावत, एसके दुबे, रूद्र पाल यादव ,रामबाबू अग्रवाल, राजेंद्र अटल,   हरिओम सूर्यवंशी, मोहम्मद अली सिद्दीकी, छेदी लाल यादव, डॉक्टर त्रिवेदी, सहित विभिन्न वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की हठधर्मिता और फर्जी तरीके से अपने कार्यकर्ताओं को आंदोलन में शामिल कर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश का पर्दाफाश हो चुका है और सरकार और सत्ता दल की हरकतों के चलते आज किसान आंदोलन तीनों किसान कानून की वापसी की मांग के साथ ही किसानों की अस्मिता और स्वाभिमान का आंदोलन बन गया है । इसी के चलते आज देश भर में एक लाख से ज्यादा स्थानों पर इस तरह के उपवास का आयोजन हो रहा है ।  किसानों का संकल्प है कि जब तक सरकार किसानों की मांगें नहीं मानेगी तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा।

किसान आंदोलन के समर्थन में एआईपीएफ कार्यकर्ताओं ने किया उपवास

वहीं आज लखनऊ में आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट, जय किसान आंदोलन से जुड़े मजदूर किसान मंच, वर्कर्स फ्रंट और युवा मंच के कार्यकर्ताओं ने गांधी जी के शहादत दिवस के अवसर पर सद्भावना उपवास रखा। जबकि बिहार के सीवान में पूर्व विधायक व एआईपीएफ के प्रदेश प्रवक्ता रमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में मानव श्रृंखला बनाई गई और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एआईपीएफ के प्रदेश अध्यक्ष डा. बी. आर. गौतम, सीतापुर में मजदूर किसान मंच नेता सुनीला रावत, युवा मंच के नागेश गौतम, अभिलाष गौतम, लखनऊ में वर्कर्स फ्रंट अध्यक्ष उपाध्यक्ष उमाकांत श्रीवास्तव, एडवोकेट कमलेश सिंह, वाराणसी में प्रदेश उपाध्यक्ष योगीराज पटेल, सोनभद्र में प्रदेश उपाध्यक्ष कांता कोल, कृपाशंकर पनिका, मंगरू प्रसाद गोंड़ आदि ने अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

एआईपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी व मजदूर किसान मंच के महासचिव डा. बृज बिहारी ने कहा कि देशी विदेशी कारपोरेट घरानों की गुलामी में लगी मोदी सरकार देश के किसानों और आम नागरिकों को तबाह करने वाले कृषि कानूनों को लागू करने के लिए इतनी बेकरार है कि वह देश में गृह युद्ध तक कराने पर आमादा है। दरअसल सरकार और आरएसएस की किसान आंदोलन को बदनाम करके उसका दमन करने की तमाम कोशिशों के बावजूद देशभर में किसान आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है और लोग सरकारी हथकंडों के बारे में भी सचेत हो रहे हैं। यही कारण है कि सरकार के हर स्तर पर बौखलाहट है। लेकिन आरएसएस व सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद यह आंदोलन सफल होगा और लोकतांत्रिक, विकसित और आधुनिक भारत निर्माण की नई इबारत लिखेगा।

भाकपा (माले) ने लालकुआं स्थित अपने कार्यालय में की एक दिवसीय भूख-हड़ताल

किसान एकता मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान के मद्देनजर भाकपा (माले)-लखनऊ की जिला लीडिंग टीम ने एक दिवसीय भूख हड़ताल का आयोजन किया। यह आयोजन लालकुआं स्थित पार्टी जिला कार्यालय पर किया गया। भूख-हड़ताल के माध्यम से पार्टी ने किसान आंदोलन से अपना समर्थन एवं संवेदना ज़ाहिर करते हुए तीनों कृषि कानूनों को तत्काल बिना शर्त वापस लेने की मांग भी की। इस दौरान कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती सरकार द्वारा की गई थी।

मौके पर मौजूद पार्टी राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव ने कहा कि, “आज महात्मा गांधी के शहादत दिवस को याद करने का सबसे बेहतर तरीका किसान आंदोलन के साथ एकता बनाते हुए उनकी मांगों को मजबूत करना ही हो सकता है।” सिंघु बॉर्डर पर कल भाजपाई गुंडों द्वारा किसानों पर हुए हमले की निंदा-भर्त्सना करते हुए उन्होंने कहा कि, “यह आंदोलन अब सिर्फ कृषि बचाने का नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का बन गया है। देश के बड़े जनमानस को सक्रिय रूप से इसमें भागीदारी बढ़ानी चाहिए।”

भूख-हड़ताल में शामिल भाकपा (माले) पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड रामजी राय ने कहा कि, “दिल्ली की सीमाओं पर डटा किसान ही अब इस देश में लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का अगुवा है। किसानों के साथ देश भर की जनता को एकजुटता दिखानी होगी। यह आंदोलन भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता संग्राम के बरक्श दूसरी मिसाल पेश करेगा।” कार्यालय के बाहर पुलिस की तैनाती की भी उन्होंने कड़ी भर्त्सना की एवं उसे ग़ैर लोकतांत्रिक करार दिया।

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This post was last modified on January 30, 2021 7:47 pm

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