देश में जनता विलाप रही है और पीएम चुनावी मंचों पर हंस रहे हैं: प्रियंका गांधी

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“आज भी वे चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। वे मंच से (रैलियों में) हंस रहे हैं। लोग रो रहे हैं, मदद के लिए चिल्ला रहे हैं, ऑक्सीजन, बेड, दवाइयाँ मांग रहे हैं, और आप विशाल रैलियों में जा रहे हैं और हँस रहे हैं! आप ऐसा कैसे कर सकते हैं।” उपरोक्त बातें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एएनआई के साथ इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में कही हैं।

दरअसल देश में 24 घंटे में कोरोना के नये मामले तीन लाख के पार चले गये हैं, वहीं 24 घंटे में कोरोना से मरने वालों की संख्या दो हजार पार कर गई है। हर तरफ चीख-पुकार विलाप मचा हुआ है, लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी तीन चरणों के चुनाव बाक़ी हैं। देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इन चुनावी रैलियों में अट्टहास कर रहे हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री की हंसी को अश्लील मानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा है कि क्या ये राजनीतिक रैलियों में हंसने का समय है? उन्होंने कहा कि पीएम को दिखाने की ज़रूरत है। उन्हें रैली के मंच से उतरने की ज़रूरत है, जहां हंसी और फटाके हैं। उन्हें यहां आने की ज़रूरत है, लोगों के सामने बैठें, उनसे बात करें और उन्हें बताएं कि वह कैसे जान बचाने जा रहे हैं।

दरअसल समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर के बाद सरकार की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक रही है। उन्होंने कहा कि यह समय पीएम के लिए प्रचार अभियान चलाने का नहीं, बल्कि लोगों की आंखों के आंसू पोंछने और नागरिकों को घातक वायरस से बचाने का समय है।

सीरो सर्वे के संकेत को सरकार ने किया नज़रअंदाज
प्रियंका गांधी ने इंटरव्यू में आगे कहा है कि भारत की ऑक्सीजन के लिए उत्पादन क्षमता दुनिया में सबसे बड़ी है। फिर कमी क्यों है? आपके पास 8-9 महीने थे (पहली और दूसरी लहर के बीच), आपके अपने सीरो सर्वे ने संकेत दिया कि एक दूसरी लहर आने वाली है, आपने इसे नज़रअंदाज कर दिया।

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि आपके पास समय था। आप कर सकते थे पर आपने नहीं किया। आज, भारत में केवल 2000 ट्रक ही ऑक्सीजन का परिवहन कर सकते हैं। यह कितना दुखद है कि ऑक्सीजन उपलब्ध है, लेकिन यह उस स्थान तक नहीं पहुंच पा रहा है जहां इसे होना चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा कि अक्तूबर-नवंबर में सरकार ने अपने सीरो सर्वे में कहा कि पांच करोड़ लोग वायरस के संपर्क में आए। परीक्षण को तेजी से बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। यूपी सरकार ने 70% एंटीजन टेस्ट शुरू किए जिसका मतलब है कि केवल 30% आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जा रहा है। उन्होंने टेस्टिंग क्यों नहीं बढ़ाई? एंटीजन टेस्ट क्यों? उनकी संख्या कम करने के लिए? आज भी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि निजी लैबों को परीक्षण बंद करने के लिए कहा जा रहा है। क्यों? क्या महत्वपूर्ण है- लोगों का जीवन या आपकी संख्या और आपकी सरकार की छवि?

योजना की कमी से शॉर्टेज हो रही है
प्रियंका गांधी ने कहा कि पिछले छह महीनों में 11 लाख रेमेडिसविर इंजेक्शन निर्यात किए गए थे। आज, हम कमी का सामना कर रहे हैं। सरकार ने छह करोड़ वैक्सीन जनवरी-मार्च में निर्यात किए। इस दौरान 3-4 करोड़ भारतीयों को टीका लगाया गया था। भारतीयों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई? खराब प्लानिंग के कारण वैक्सीन की कमी आई, कोई प्लानिंग नहीं होने के कारण रेमेडेसविर की कमी आई, कोई रणनीति न होने के कारण ऑक्सीजन की कमी है। यह सरकार की विफलता है।

विपक्षी सुझाव को को नज़रअंदाज कर देती है ये सरकार
इस दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह जी 10 साल के लिए पीएम थे। हर कोई जानता है कि वह किस तरह के व्यक्ति हैं। यदि वह सुझाव दे रहे हैं, जब राष्ट्र महामारी का सामना कर रहा है, तो सुझावों को उसी गरिमा के साथ लिया जाना चाहिए जिसके साथ उन्हें पेश किया गया था।उन्होंने कहा कि यह सरकार आईएसआई से बात कर सकती है। वे दुबई में आईएसआई से बात कर रहे हैं। क्या वे विपक्षी नेताओं से बात नहीं कर सकते? मुझे नहीं लगता कि कोई भी विपक्षी नेता है जो उन्हें रचनात्मक और सकारात्मक सुझाव नहीं दे रहा है।

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