Tuesday, December 7, 2021

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रणजीत हत्याकांड में राम रहीम और चार अन्य को आजीवन कारावास, राम रहीम पर 31 लाख का जुर्माना

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रणजीत सिंह हत्याकांड में अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। उम्रकैद की सजा के बाद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम का अब लंबे समय तक जेल में बंद रहना पक्का हो गया है। इस केस में राम रहीम के अलावा बाकी चार दोषियों के नाम जसबीर, अवतार, कृष्ण लाल और सबदिल हैं। पंचकूला में सीबीआई जज सुशील गर्ग ने राम रहीम पर 31 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। बाकी चारों दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। राम रहीम को इससे पहले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उम्रकैद की सजा हो चुकी है। इसके अलावा दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में भी राम रहीम को 10-10 साल की सजा हो चुकी है।

अदालत का फैसला आने के बाद सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने स्पष्ट किया कि राम रहीम मरते दम तक जेल में ही रहेगा। उन्होंने बताया कि रणजीत सिंह हत्याकांड में जो सजा सुनाई गई है, वह पहले सुनाई जा चुकी सजा के साथ ही चलेगी।‘

इससे पहले सोमवार सुबह दोषी राम रहीम की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। वहीं अन्य 4 दोषियों को पंचकूला कोर्ट लाया गया। सोमवार को फैसला आने के पहले पंचकूला जिला प्रशासन ने सुबह से ही पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी। पूरे पंचकूला में ITBP के जवानों के साथ पुलिसकर्मी तैनात रहे। शहर में आने वाले लोगों को पूरी तलाशी लेने के बाद ही आगे जाने की अनुमति दी गई।

सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने राम रहीम और चारों दोषियों के लिए फांसी की सजा मांगी थी, मगर अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इससे पहले राम रहीम ने अदालत में कहा कि वह इस देश का नागरिक है और उसे अदालत पर पूरा भरोसा है। उसने डेरे की ओर से चलाए जा रहे सामाजिक कार्यों और अपनी बीमारी की दुहाई देकर सजा में रियायत की मांग की। रणजीत सिंह हत्याकांड में CBI कोर्ट ने 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। दोषियों के वकीलों द्वारा CBI की ओर से दी गई दलीलों को पढ़ने के लिए समय मांगने पर CBI जज सुशील गर्ग ने 18 अक्टूबर की तारीख दी थी।

10 जुलाई 2002 को डेरा सच्चा सौदा की मैनेजमेंट कमेटी के मेंबर कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने ही साध्वी यौन शोषण मामले में अपनी बहन से गुमनाम चिट्ठी लिखवाई। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत सिंह के पिता ने जनवरी 2003 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने बेटे की हत्या की जांच CBI से करवाने की मांग की, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया। सीबीआई ने इस मामले में डेरामुखी राम रहीम समेत 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। 2007 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए और 8 अक्टूबर 2021 को उन्हें दोषी करार दे दिया।

रणजीत सिंह के परिवार के लोग विजय मनाते हुए।

रणजीत सिंह हत्याकांड में 3 लोगों की गवाही महत्वपूर्ण रही। इनमें से 2 चश्मदीद गवाहों सुखदेव सिंह और जोगिंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि उन्होंने आरोपियों को रणजीत सिंह पर गोली चलाते देखा। तीसरा गवाह डेरामुखी का ड्राइवर खट्टा सिंह रहा। खट्‌टा सिंह के अनुसार, उसके सामने ही रणजीत सिंह को मारने की साजिश रची गई। खट्टा सिंह ने अपने बयान में कहा कि डेरामुखी राम रहीम ने उसके सामने ही रणजीत सिंह को मारने के लिए बोला। केस की शुरुआती सुनवाई के समय खट्टा सिंह अदालत में इस बयान से मुकर गया था, मगर कई साल बाद वह फिर कोर्ट में पेश हुआ और गवाही दी। उसकी गवाही के आधार पर ही पांचों को दोषी ठहराया गया।

राम रहीम को रणजीत हत्याकांड में 20 साल की उम्रकैद की सजा दी गई है। इससे पहले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी डेरा प्रमुख को 20 साल की ही उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।इसके अलावा दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में भी उसे 10-10 साल कैद की सजा हो चुकी है, जो फिलहाल चल रही हैं। इस तरह अब तक राम रहीम को कुल 60 साल कैद की सजा हो चुकी है।इनमें से उम्रकैद की सजाएं एक साथ चलेंगी यानी उसे इनके लिए 40 की जगह 20 साल ही जेल में काटने होंगे। लेकिन साध्वियों के यौन शोषण मामलों में एक सजा खत्म होने पर दूसरी सजा शुरू होगी यानी उसे 20 साल कैद रहना होगा। उम्रकैद की सजाएं अभी चल रही सजाओं की अवधि खत्म होने पर शुरू होंगी।

राम रहीम पर अभी अपने ही डेरे के साधुओं को नपुंसक बनाने का एक और मामला सीबीआई की विशेष अदालत में लंबित है। इस मामले में कार्रवाई पर फिलहाल हाईकोर्ट का स्टे चल रहा है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई अभी लंबी चल सकती है। तब तक इस मामले में भी सजा की संभावना बनी रहेगी।

गुरमीत राम रहीम को 31 लाख रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ेगा । अन्य दोषियों में सबदिल को 1.5 लाख रुपये, कृष्णलाल और जसबीर को 1.25-1.25 लाख रुपये और अवतार को 75,000 रुपये की जुर्माना राशि भरनी होगी । इस जुर्माना राशि का पचास फीसदी हिस्सा मृतक रणजीत सिंह के परिवार को जाएगा । इस मामले में छठे आरोपी की एक साल पहले मौत हो गई थी ।

रणजीत सिंह की 10 जुलाई, 2002 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र के खानपुर कोलियां गांव में गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी । एक अज्ञात पत्र प्रसारित करने में संदिग्ध भूमिका के चलते उनकी हत्या की गई थी। इस पत्र में बताया गया था कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम डेरा मुख्यालय में किस प्रकार महिलाओं का यौन शोषण करते हैं। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, डेरा प्रमुख का मानना था कि इस अज्ञात पत्र को प्रसारित करने के पीछे रणजीत सिंह थे और उसने उनकी हत्या की साजिश रची।

डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर रणजीत सिंह की 10 जुलाई 2002 को हत्या हुई थी। गुमनाम खत एक साध्‍वी ने 13 मई 2002 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा था । इस खत में एक लड़की ने सिरसा डेरा सच्चा सौदा में गुरु राम रहीम के हाथों अपने यौन शोषण का वाकया बताया था। रणजीत साध्वी के इस गुमनाम खत के आने से कुछ समय पहले ही अपनी बहन को लेकर अपने घर कुरुक्षेत्र चले गए थे। डेरा को शक था कि यह खत रणजीत ने अपनी बहन से लिखवाया है।

डेरे में रेप और यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद रणजीत सिंह बहुत आहत थे।इसी बात को लेकर उन्होंने डेरे के मैनेजर पद से इस्तीफा दे दिया था। अब वो डेरे से अलग हो चुके थे। उनके परिवार के लोग भी डेरे का मोह छोड़ चुके थे। लेकिन इसी दौरान अचानक 10 जुलाई 2002 को अज्ञात बदमाशों ने रणजीत सिंह की हत्या कर दी। उस वक्त डेरा प्रमुख को शक था कि रेप और यौन शोषण का खुलासा करने वाली चिठ्ठी रणजीत ने अपनी बहन से लिखवाई थी। उसी की वजह से रणजीत के कत्ल का शक डेरा प्रमुख पर जा रहा था। बाद में सीबीआई जांच में शक हकीकत में तब्दील हो गया।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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