आरबीआई ने जारी की विलफुल डिफाल्टरों की पहली सूची, 30 कंपनियों के पास 50 हजार करोड़ से ज्यादा का बकाया

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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक आफ इंडिया यानी आरबीआई ने विलफुल डिफाल्टर यानी क्षमता होते भी जानबूझ कर अपना ऋण न चुकाने वाली कंपनियों की पहली सूची जारी कर दी है। इसमें 30 कंपनियां शामिल हैं। ऐसा उसने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया है। इसके लिए दि वायर ने 2016 में एक आरटीआई दायर की थी। लेकिन आरबीआई यह कहते हुए सूची देने से मना कर दिया था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट गया और कई सुनवाइयों के बाद कोर्ट ने सेंट्रल बैंक को डिफाल्टरों की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश जारी कर दिया।

सेंट्रल बैंक द्वारा मुहैया कराए गए डाटा के मुताबिक 30 कंपनियों में तीन कंपनियां भगोड़े डायमंड व्यापारी मेहुल चौकसी से जुड़ी हुई हैं। इनमें कुल तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपये की राशि शामिल है जिसे बैंक ने माफ कर दिया है। इसको और अगर सही रूप में पेश किया जाए तो दिसंबर 2018 तक तकरीबन 11,000 कंपनियां विलफुल डिफाल्टर की सूची में आ गयी हैं। और इस हिसाब से यह राशि तकरीबन 1.61 लाख करोड़ के आस-पास बैठती है।

आऱबीआई उसी कंपनी को विलफुल डिफाल्टर यानी जानबूझ कर ऋण न चुकाने वाली घोषित करती है जब वह क्षमता होने के बावजूद ऋण की अदायगी नहीं करती है।

इस डाटा में विलफुल डिफाल्टरों के एकाउंट के बैड लोन और एनपीए का डाटा शामिल नहीं है।

इसमें बहुत सारी वही कंपनियां शामिल हैं जिनके नाम तत्कालीन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने पीएमओ को भेजे थे और उससे उनके खिलाफ कार्रवाई करने और जनता के रुके हुए पैसों को वसूलने की मांग की थी।

इनमें से कुछ के ही खिलाफ जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की। और उनकी संपत्तियों को जब्त किया।

वित्तमंत्री द्वारा संसद में दिए गए एक आंकड़े के मुताबिक 2018-19 तक देश के सरकारी बैंकों का कम से कम 1.50 ट्रिलियन रुपये की राशि विलफुल डिफाल्ट की सूची में है। इसमें सबसे बड़ी राशि स्टेट बैंक की है जो पूरी राशि का तकरीबन एक तिहाई है।

बैंकों के अलग-अलग हिस्से के हिसाब से एसबीआई का कुल 461.58 बिलियन रुपया, पीएनबी का 25.9 बिलियन रुपया और बैंक आफ इंडिया का 98.9 बिलियन रुपया विलफुल डिफाल्टर मद में सूचीबद्ध है।

आरबीआई के मुताबिक 31 मार्च, 2019 तक सभी बैंकों की यह राशि 638.2 बिलियन रुपये हैं।  

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