झारखंड के तमाम संगठन भी होंगे मजदूरों की हड़ताल में शामिल

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रांची। मजदूर संगठन समिति ने एक पर्चा जारी कर देशभर में 28-29 मार्च को मजदूरों के दो दिवसीय हड़ताल को समर्थन देने का आह्वान किया है। पर्चे में कहा गया है कि भारत सरकार ने वर्ष 1990 में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (WTO) के साथ संधि कर नई आर्थिक व औद्योगिक नीति उदारीकरण,निजीकरण,भूमंडलीकरण के जरिए देश को कॉरपोरेट घरानों एवं साम्राज्यवादी देशों को लूट के लिए खुला छूट दे दी है। देश की सरकार के द्वारा संचालित सार्वजनिक प्रतिष्ठानों मसलन कोयला,बिजली,रेल,सेल,एयर इंडिया एवं बंदरगाह समेत जनता की सहूलियत के लिए बनाए गए स्कूलों-कालेजों,अस्पतालों,बैंक-बीमा क्षेत्रों को औने-पौने दामों में निजी हाथों में धड़ल्ले से सौंपा जा रहा है या फिर उन्हें बंद कर दिया जा रहा है।

संगठन के केन्द्रीय संयोजक बच्चा सिंह की ओर से जारी पर्च में कहा गया है कि फासिस्ट मोदी सरकार ने कारपोरेट घराने को लूट और ज्यादा मुनाफा के लिए मजदूरों के संघर्ष और बलिदान के बल पर बने 44 श्रम कानून को समाप्त कर उसे चार लेबर कोड में तब्दील कर दिया गया है। जिससे मजदूरों को 8 घंटे काम की अवधि को समाप्त कर मजदूरों को श्रम कानून के सहयोग से मिलने वाले अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है।

देश में बढ़ती गरीबी,बेरोजगारी,महंगाई ने मेहनतकश अवाम का जीना दूभर कर दिया है। वहीं चार लेबर कोड लागू होने से मालिकों को मनमाने तरीके से मजदूरों की छटनी और शोषण को बड़े पैमाने पर करने का अधिकार मिल जाएगा।
यह बार लेबर कोड मजदूरों के गुलामी की जंजीर है जिसे तोड़ना मजदूर वर्गों के कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी है। पर्चे में कहा गया है कि मजदूर वर्गों को वर्ष 1886 के मई दिवस के संघर्ष को हमेशा याद रखना चाहिए क्योंकि “मजदूरों के पास खोने के लिए बेड़ियां हैं और जीतने के लिए सारी दुनिया है।”

पर्चे में मजदूरों से अपील की गई है कि वे फासिस्ट मोदी सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड और मजदूरों के अधिकारों पर बढ़ते हमलों के विरोध में 28-29 मार्च को सड़क पर उतर कर जोरदार विरोध करें।

बता दें कि देश के मजदूर संगठनों ने 28-29 मार्च को आम हड़ताल की घोषणा की है। केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी नीति का आरोप लगाते हुए सीटू,एटक,एचएमएस,मसंस व इंटक और उससे संबद्ध यूनियन्स ने आंदोलन की घोषणा की है। जबकि भारतीय मजदूर संघ का आंदोलन को समर्थन नहीं है।

इधर,सार्वजनिक सेक्टरों के प्रबंधनों ने मजदूर संगठनों से हड़ताल पर नहीं जाने का आग्रह किया है। जबकि बैंक,कोयला सहित निजी सेक्टरों में भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। मजदूर संगठनों ने बताया है कि विभिन्न सेक्टरों के करीब 60 लाख मजदूर आंदोलन में हिस्सा लेंगे।

वहीं कोयला,इस्पात,कॉपर,बॉक्साइट व माइका सेक्टर के चार लाख से ज्यादा मजदूर हड़ताल पर रहेंगे। लौह अयस्क खदान में भी इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है। संगठनों ने बताया कि राज्य के 10 लाख निर्माण कामगार,चार लाख परिवहन मजदूर के अलावा दो लाख से अधिक स्कील वर्कर भी हड़ताल में शामिल होंगे। बैंक,इंश्योरेंस,पोस्टल आरएमएस के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे।
27 मार्च को पूरे राज्य में सैकड़ों जगह मशाल जुलूस निकाला जायेगा। दूसरी तरफ किसान संगठनों ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है। इस सिलसिले में रांची में आयोजित एक प्रेस वार्ता को सीटू के प्रकाश विप्लव,अनिर्वान बोस,एटक के पीके गांगुली,सच्चिदानंद मिश्र, एक्टू के शुभेंदु सेन,भुवनेश्वर केवट,इंटक के संजीव सिन्हा,एआईयूटीयूसी के मिंटू पासवान बेफी के एमएल सिंह,अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नवीन चौधरी ने संबोधित किया।

एचइसी रांची के तीन श्रमिक संगठनों ने भी हड़ताल का आह्वान किया है। जबकि एचईसी प्रबंधन ने कर्मियों से हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील की। प्रबंधन की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में एचईसी के समक्ष कई चुनौतियां हैं। इधर हड़ताल में शामिल हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन,हटिया कामगार यूनियन व हटिया मजदूर यूनियन के नेताओं ने कर्मियों के साथ बैठक कर हड़ताल को सफल बनाने पर रणनीति तय की है।

सीसीएल ने संयुक्त सलाहकार समिति के सदस्यों से हड़ताल पर नहीं जाने का आग्रह किया है। उसने कहा है कि हड़ताल का मुद्दा कोयला कर्मियों से जुड़ा नहीं है। हड़ताल से उत्पादन प्रभावित होगा। जबकि मजदूर संगठनों ने कहा कि यह राष्ट्रीय आह्वान पर आंदोलन हो रहा है। इसमें सीसीएल या कोयला कंपनियों से जुड़े मजदूर संगठन कुछ नहीं कर सकते हैं। बैठक में इंटक,एटक,सीटू और एचएमएस के प्रतिनिधि भी थे।

मजदूर संगठनों की प्रमुख मांगों में मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को रद्द करने, किसानों के फसल के लिए एमएसपी की गारंटी करने,
निजीकरण पर रोक लगाने,आयकर के दायरे से बाहर रहने वालों पर प्रतिमाह 7500 रुपये का भुगतान करवाने,मनरेगा में रोजगार गारंटी योजना का विस्तार करने, असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को सार्वभौमिक सुरक्षा देने,पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी करने, ठेका प्रथा व आउटसोर्सिंग बंद करने और नयी पेंशन स्कीम रद्द करने की मांगें शामिल हैं।

बता दें कि भाजपा से सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस)ने इस दो दिवसीय हड़ताल में हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया है। संघ के महामंत्री विनय कुमार सिन्हा ने कहा है कि हड़ताल विशुद्ध रूप से राजनीति से प्रेरित है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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